पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंनई दिल्ली. शहर के पॉश इलाके चाणक्यपुरी स्थित रिजाला मार्ग पर विवेकानंद कैंप के सामने ब्रिटिश स्कूल की एक निजी बस ने सड़क पर खेल रहे दो मासूमों को टक्कर मार दी। इसमें 10 साल के राहुल की इलाज के दौरान मौत हो गई। जबकि 12 साल के जगदीश की हालत गंभीर है। शुक्रवार को हुई यह पूरी घटना राहुल की 13 वर्षीय बहन के सामने हुई। उसने बताया कि वह बस रोकने के लिए चिल्लाती रही लेकिन ड्राइवर ने सुना ही नहीं और पिछला टायर राहुल पर चढ़ गया। राहुल की बहन की आवाज सुनकर ही बस्ती के लोग बस की ओर भागे। भीड़ देखकर चालक बस छोड़कर फरार हो गया। हालांकि, पुलिस ने आरोपी बस चालक 57 वर्षीय रेशम पाल को गिरफ्तार कर लिया है।
ऐसे हुआ हादसा... चालक ने तेजी से बस बैक की, टायर के नीचे आए दो मासूम, एक की मौत
- पुलिस के अनुसार, घटना शुक्रवार शाम 5 बजे की है। राहुल के पिता कालू मजदूर हैं। जगदीश के पिता सुखलाल दिव्यांग हैं। दोनों परिवार चाणक्यपुरी स्थित विवेकानंद कैंप में रहते हैं।
- कैंप के सामने ही दूसरी ओर रशियन दूतावास और ब्रिटिश स्कूल है। स्कूल के लिए चलने वाली निजी बसें सड़क किनारे पार्क होती हैं। बच्चे इसी सड़क के फुटपाथ पर खेलते हैं।
- शुक्रवार शाम दोनों बच्चे फुटपाथ खेल रहे थे। तभी स्कूल बस चालक रेशम पाल बस पार्क करने को वहां पहुंचा। छुट्टी हो जाने से वह घर जाने की जल्दी में था। उसने देखा ही नहीं कि पीछे बच्चे खेल रहे हैं।
- उसने तेजी से बस बैक की, तभी दोनों बच्चे बस की चपेट में आ गए। टक्कर से जगदीश फुटपाथ पर ही गिर गया, राहुल सड़क पर गिरा और बस के पिछले टायर के नीचे आ गया।
लाचारी... मदद के लिए बहन गुहार लगाती रही, लेकिन कोई नहीं आया, सैनिक ने की मदद
- हादसे के बाद मौके पर पहुंची राहुल की बहन और बस्ती के अन्य लोगों ने बस के नीचे आए राहुल को बाहर निकाला। लोगों के अनुसार उस समय राहुल की सांसें चल रही थीं।
- उसकी बहन वहां से गुजर रही गाड़ियों को रुकवाकर मदद की गुहार लगाती रही लेकिन किसी ने गाड़ी नहीं रुकी। तभी सेना का एक ट्रक वहां पहुंचा, स्थिति देखकर चालक ने ट्रक रोक दिया और दोनों बच्चों को अस्पताल पहुंचाया।
- राहुल की बहन का कहना है कि हादसे के समय चालक के साथ कोई हेल्पर नहीं था, जो यह बता पाता कि पीछे क्या है? अगर कोई हेल्पर होता तो शायद ये हादसा न होता।
बेबसी... दिव्यांग पिता खून से लथपथ बेटे को देखता रहा
- घायल जगदीश के पिता जो दिव्यांग हैं, वे भी बेटे के हादसे का शिकार होने की खबर सुनकर किसी तरह मौके पर पहुंचे।
- मगर दिव्यांग होने के कारण खून से लथपथ अपने बेटे को उठा नहीं सके। वे अपने लहूलुहान बेटे को उसी तरह सड़क पर देखते रहे।
- करीब आधा घंटा बाद कुछ लोग आए और जैसे-तैसे बच्चे को उठाकर सेना के ट्रक में रखा। जब तक पुलिस पहुंची लोग दोनों बच्चों को लेकर जा चुके थे।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.