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डाउनलोड करेंग्वालियर. 12वीं में फेल होने से दुखी छात्रा ने शुक्रवार शाम को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना मुरार थानाक्षेत्र के गुलाबपुरी इलाके में हुई। छात्रा 3 विषय में फेल हो गई थी, इसके बाद से ही परेशान थी। घरवालों ने उसे समझाया भी। उन्हें लगा कि छात्रा फिलहाल दुख से उबर गई है लेकिन शुक्रवार को मां और भाइयों के घर से निकलते ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
मां को लगा... सब ठीक हो गया है
मुरार के गुलाबपुरी इलाके में राजकुमार कुशवाह का परिवार रहता है। श्री कुशवाह सीआरपीएफ कार्यरत हैं और छत्तीसगढ़ में पदस्थ हैं। यहां पर उनकी पत्नी अंगूरी, बेटी नीतू (17) बेटे राज (11) और नैतिक (7) यहां पर रहते थे। बेटी नीतू ने इस साल हायर सेकंडरी की परीक्षा दी थी। 14 मई को रिजल्ट आया था, इसमें वह 3 विषय में फेल हो गई थी। रिजल्ट देखने के बाद वह परेशान हुई थी, रोई थी लेकिन परिजन ने समझाया कि वह हिम्मत से काम ले अगली साल फिर परीक्षा होगी। उस समय तो ऐसा लगा कि वह समझ गई है और हालात ठीक हो गए। शुक्रवार शाम 4.30 बजे मां अंगूरी देवी बेटों राज और नैतिक के साथ रिश्तेदार के यहां पर चली गई थीं, इस दौरान नीतू घर में दादी के साथ रह गई थी। वह अपने कमरे में जाने की बात कहकर गई और कमरे में दुपट्टे से फांसी लगा ली। मां घर लौटीं तो घटना का पता चला। उन्होंने अपने देवर रामू को सूचना दी, रामू पुलिस में सिपाही हैं। घटनास्थल पर पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी।
17 दिन पहले जान देने वाली छात्रा के पिता का दर्द
बेटू...आत्मविश्वास तो तुम्हारी ताकत थी.. तुम इतनी जल्दी कैसे हार गईं
मुरार कैंटोनमेंट की फाफा कॉलोनी का क्वार्टर नंबर-48/7। यहां आकर बड़ी से बड़ी परेशानी में उलझे पड़ोसी, रिश्तेदार मुस्कुराने लगते थे। इस आवास में से अब सिर्फ बेटी की याद में बिलखते माता-पिता की वेदना सुनाई देती है। हर वक्त हंसाने और दूसरों को भी हिम्मत देने वाली 15 साल की बेटू की हिम्मत इतनी जल्दी जवाब दे देगी, कोई सोच भी नहीं सकता था। भरे गले से बेटू (सपना) के पिता रमेश सिंह राणा बताते हैं कि आत्मविश्वास उसकी ताकत थी। वह आर्मी अफसर बनना चाहती थी। जब मैं परेशानी में होता था तो मुझे भी संभालने वाली वही थी। आखिर वो इतनी जल्दी कैसे हार गई। विश्वास ही नहीं होता। एक दिन पहले ही तो मैंने फोन पर बात की थी। उसे समझाया था कि फेल हो जाने से जीवन के रास्ते बंद नहीं हो जाते। गिरकर फिर उठने वालों की ही जीत होती है, फिर भी पता नहीं वो कैसे हार गई।
यह हुआ था
राकेश राणा भारतीय सेना में हैं और उनकी पोस्टिंग वर्मा बॉर्डर पर है। उनकी बेटी सपना नेशनल स्कूल मुरार में कक्षा 11वीं की छात्रा थी। सपना मां ममता और भाई आशु के साथ कैंटोनमेंट के फाफा कॉलोनी में रहती थी। मार्च में परीक्षा दी थी और अप्रैल में रिजल्ट आया। परीक्षा में उसे सप्लीमेंट्री आई थी। 1 मई को परिणाम आया तो वह फिर फेल हो गई। सपना ने 2 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
फेल छात्र निराश न हों, साल खराब नहीं होगा
फेल छात्र निराश न हों। इस बार भी रुक जाना नहीं योजना के तहत परीक्षा का एक मौका दिया गया है। असफल हुए छात्र 25 मई तक सभी विषयाें में इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत होने वाली परीक्षा के बाद आने वाले परिणाम में टॉप टेन छात्रों का सम्मान किया जाएगा।
रोकी जा सकती हैं आत्महत्या की घटनाएं
परीक्षा परिणाम आने के समय अधिकांश बच्चे दबाव में रहते हैं, संतोषजनक परिणाम न आने पर आत्महत्या तक का कदम उठा लेते हैं। इस तरह की आत्महत्या को शत-प्रतिशत रोका जा सकता है। सिर्फ कुछ समय ऐसा होता है जब इस तरह के नकारात्मक विचार आते हैं। विज्ञान के मुताबिक, सेरोटॉनिन लेवल बढ़ने पर आत्महत्या के विचार आते हैं। सिर्फ वह समय निकाल लिया जाए तो इसे रोका जा सकता है।
मनोचिकित्सक डॉ.कमलेश उदैनियां ने बताया- किस तरह बच्चों को ऐसा कदम उठाने से रोका जा सकता है...
- परिजन बच्चों से अपेक्षाएं करें लेकिन टारगेट न दें, जो परिणाम आएं उसे स्वीकार करें और हतोत्साहित न करें।
- जो भी परिणाम आए बच्चों पर क्रिटिकल कमेंट न करें, उन्हें मोरल सपोर्ट करें और समझाएं कि बेहतर के लिए हमेशा प्रयास करें। एक बार असफल होने पर निराश न हों।
- बच्चे की गतिविधि जरा भी संदिग्ध दिखे तो उसे निगरानी में लें।
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