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डाउनलोड करेंस्काटलैंड में हुए जनमत संग्रह में ब्रिटेन के पक्ष में नतीजे आने के बाद यूरोपीय संघ के देशों और नेटो ने राहत की सांस ली है.
हालांकि कुछ लोगों को लगता है कि यूरोप में अलगाववाद का जिन्न बोतल के बाहर आ सकता है.
नेटो ने भी ब्रिटेन को मुबारकबाद दी.
अमरीENका समेत अन्य देशों ने जनता के इस निर्णय की सराहना की है.
नेटो के महासचिव एंडर्स फॉग रासमुसेन ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को बधाई दी है और कहा है कि वो आश्वस्त थे कि ब्रिटेन अमरीकी नीत सैन्य गठबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहेगा.
हालांकि, स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो राजोय ने कहा, \'\'स्कॉटिश लोगों ने एक गंभीर आर्थिक, सामाजिक, संस्थागत और राजनीतिक दुविधा से बचना उचित समझा.\'\'
असल में स्पेन उत्तरी पूर्वी इलाके कैटेलोनिया में उठे जनमत संग्रह की मांग से जूझ रहा है.
स्पेन में भी उठी मांगकैटेलोनिया क्षेत्र के प्रेसीडेंट आर्तर मास ने शुक्रवार को आज़ादी के लिए नौ नवम्बर को होने वाले जनमतसंग्रह की योजना को आगे बढ़ाया है. स्पेन सरकार कहना है कि यह ग़ैरक़ानूनी है.
जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने स्कॉटलैंड के जनमत संग्रह का अन्य जगहों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा.
यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैनुअल बारोसो ने कहा, \'\'हम स्कॉटलैंड की सरकार और जनता ने बारबार यूरोपीय संघ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है.\'\'
आंदोलनअसल में 28 देशों वाले यूरोपीय संघ को उम्मीद है कि इस संघ में ब्रिटेन के शामिल रहने के मुद्दे पर 2017 में होने वाले जनमतसंग्रह पर इसका साकारात्मक असर पड़ेगा.
बेल्जियम के यूरोपीय संघ कमिश्नर कैरेल डी गुच ने कहा कि यदि स्कॉटलैंड अलग हो जाता तो यह सोवियत संघ के बिखराव के स्तर की राजनीतिक उथल-पुथल होता.
फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांदे ने मतदान के ख़त्म होने के पहले ही यूरोपीय संघ के बिखरने की चिंता जताई थी.
यूरोपीय संघ का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य फ्रांस है जो कोर्सिका, ब्रिटैनी और बाकेस देशों में आज़ादी के आंदोलनों को बहुत पसंद नहीं करता.
लेकिन स्पेन, इटली और बेल्जियम जैसे देश इस तरह के आंदोलना के बड़े दबाव में हैं.
ग़रीबी से बढ़ा अलगाववादइटली के प्रधानमंत्री माटेओ रेंजी ने कहा कि इस जनमतसंग्रह से इस बात की उम्मीद बढ़ी है कि अधिक विकेंद्रित ब्रिटेन यूरोपीय संघ में बना रहेगा.
यूरोपीय संसद के अध्यक्ष और जर्मन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता मार्टिन शुल्ज ने कहा कि यूरोप में अलगाववादी आंदोलन सामाजिक और आर्थिक ग़ैरबराबरी, बेरोजगारी और ग्रामीण ग़रीबी के कारण पैदा हो रहे हैं.
चेकोस्लोवाकिया के प्रधानमंत्री बोहुस्लाव सोबोत्का ने कहा कि स्कॉटिश जनमतसंग्रह ने दिखा दिया है कि दुनिया पूरी तरह पागल नहीं हो गई है.
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