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15 फ़ीट पानी में कैसे बीते वो चार दिन

7 वर्ष पहले
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गीता पांडे

बीबीसी संवाददाता

कश्मीर में आई बाढ़ ने श्रीनगर को एक तरह से निगल लिया है और संपर्क के तमाम साधन ठप पड़ गए हैं. लंदन में रह रही सबा महजूर अपने पिता को लेकर काफ़ी परेशान हैं.

उनके पिता अब्दल महजूर बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र राजबाग़ में रहते हैं. उनकी बेटी उनसे संपर्क नहीं कर पा रहीं हैं.

उन्होंने कहा, \"मैंने राजबाग़ से बचाई गई अपनी दोस्त से बात की थी. उन्होंने बताया कि बाढ़ के पानी में तैरती कई लाशें देखीं. मुझे बहुत बुरे ख़्याल आ रहे थे.\"

तब उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक पर एक पोस्ट डाली. इसमें उन्होंने लिखा, \"यह मेरे पिता हैं अब्दल महजूर. अगर किसी को इनके बारे में कोई सूचना हो तो कृपया मुझे बताएं. \"

सलामत

उनकी अपील ने लोगों में हमदर्दी पैदा की और आख़िर उन्हें एक रिश्तेदार से संदेश मिला कि उनके पिता सही सलामत हैं.

उन्होंने लंदन से फ़ोन पर बीबीसी को बताया, \"मंगलवार रात उन्हें बचाया गया था.\"

सबा ने कहा, \'\'पिछले शुक्रवार दोपहर अधिकारियों ने राजबाग़ को खाली करने की चेतावनी दी थी. मेरी मां दिल्ली में थीं. इसलिए मेरे पिता अपनी बहन के यहां चले गए. जो पास के ही जवाहर नगर क्षेत्र में रहती हैं.\'\'

उनके पिता ने सोचा था कि सुबह घर लौट जाएंगे पर रात में जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया. दो घंटे में पानी 15 फीट तक आ गया और घर में पानी घुसना शुरू हो गया.

रात में मकान की पहली मंज़िल पूरी तरह पानी में डूब गई और सुबह तक मकान की तीनों मंज़िलें डूब गईं. महजूर अपनी बहन के परिवार के साथ जिसमें एक नवजात भी था, अटारी पर फंस गए.

चिंता

सबा ने बताया, \"अटारी पर चार दिन तक सात लोग फंसे रहे. उनके पास कुछ दिन का राशन था, जिसे वो दिन में एक बार खाकर गुज़ारा कर रहे थे ताकि राशन ज़्यादा दिन चल सके.\"

\"मंगलवार रात एक नाव वाले को देखा और उसे पुकार लगाई. उस रहमदिल इंसान ने मेरे पिता और उनकी बहन के परिवार को बचाया. जिस समय उन्हें बचाया गया, तब उनके पास खाने को कुछ नहीं था और पीने के लिए सिर्फ़ एक लीटर पानी बचा था.\"

बचाए जाने के बाद अगले 24 घंटे में कोई सूचना न मिलने पर फिर वे घबरा गईं थीं.

गुरूवार रात बदगाम गांव में रिश्तेदारों के साथ रह रहे अपने पिता से बात कर अब वह खुश हैं लेकिन कश्मीर घाटी में फंसे हज़ारों लोगों को लेकर चिंतित हैं.

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