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शहर में लगेंगे 800 कैमरे और बनेगा पुलिस कमांड-कंट्रोल सेंटर, टेक्नोलॉजी से पकड़े जाएंगे वांटेड क्रिमिनल

3 वर्ष पहले
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जोधपुर.  सूचना केंद्र के पास शहर में हाल ही में शुरू हुए पुलिस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी अपराधियों को पकड़वाने में मददगार होगी। जोधपुर के अभय कमांड सेंटर की फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन लैब में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के उपकरण व सॉफ्टवेयर इंस्टाल किए गए हैं। शहर में लगे हाई डेफिनेशन कैमरे नजर रखेंगे। इनसे कमिश्नरेट के किसी भी थाने के वांटेड की फोटो फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर में अपलोड होगी। पुलिस के कैमरे उस बदमाश की तलाश कर न सिर्फ उसका लेटेस्ट चेहरा ही दिखाएंगे, बल्कि कुछ ही मिनटों में उसकी लोकेशन भी पुलिस के पास पहुंच जाएगी।

 

 

जालोरी गेट पर भाजपा जिलाध्यक्ष की घड़ी का टाइम भी कैमरे में दिखा 

अभय कमांड सेंटर पर लगे कैमरे से 300 मीटर तक जूम करके सड़क पर पड़ी कोई वस्तु भी साफ देखी जा सकती है। मंगलवार शाम जालोरी गेट चौराहा पर भाजपा कर्नाटक चुनाव का जश्न मना रही थी। भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र जोशी भी कैमरे में नजर आए। जूम करके देखने पर जोशी के हाथ घड़ी में 5:58 बजे का टाइम साफ नजर आया।  

 

अभय कमांड सेंटर से 24 घंटे रहेगी शहर की हर गतिविधि पर नजर

100 नंबर पर फरवरी-मार्च व अप्रैल 2018 में करीब 60 लाख कॉल आईं। 1,16,944 लोगों ने बात की। ये कॉल सेंटर के सर्वर में भी रिकॉर्ड हुई, जिन्हें जब चाहे सुना जा सकता है। किसी भी मोबाइल की कॉल डिटेल्स व अन्य जानकारी पुलिस इन्वेस्टिगेशन के लिए उपलब्ध। 155 कैमरे लग चुके हैं। शेष लगाने का काम जारी है। 40 अधिकारी-जवानों की टीम तीन शिफ्ट में काम कर रही। 

 

कैसे काम करता है फेस रिकग्निशन सिस्टम?

फेसबुक पर यूजर्स द्वारा अपलोड की फोटो में जो भी चेहरे नजर आते हैं, उन्हें फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के जरिए उन चेहरों की डाटाबेस से छानबीन के बाद उनकी पहचान सामने आती है और दूसरे लोगों को उस फोटो में दिखने वाले चेहरों के नाम भी नजर आते हैं। सॉफ्टवेयर चेहरे के कुछ खास हिस्सों को पाइंट करके एक थ्रीडी डाटाबेस तैयार कर लेता है। जब भी वो चेहरा किसी दूसरी फोटो में नजर आता है, डाटाबेस और फेसबुक प्रोफाइल से सर्च होने के बाद उस चेहरे का नाम नजर आने लगता है। यही तकनीक इस सेंटर में भी है।

 

 

क्राइम कंट्रोल के लिए हर इलाके का डाटाबेस बनाएंगे
- पुलिस कमिश्नरेट के कौन से इलाके में किस तरह के अपराध हो रहे हैं, इन सबका डाटाबेस बन रहा है। कुछ ही समय में इन्हीं डाटाबेस के आधार पर क्राइम की श्रेणी और उन पर अंकुश के लिए मैकेनिज्म भी तैयार हो रहा है। कंट्रोल रूम में लाइव रिकॉर्डिंग देख रही टीम की सूचना पर संबंधित थाने की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच सकेगी।

 

- पुलिस की रात्रिगश्त टीमों में सुनसान में गाड़ी खड़ी कर सोने वाले सेंटर के सॉफ्टवेयर से पकड़ में आ जाएंगे। इसके लिए जल्द ही पुलिस की चेतक गाड़ियों पर कैमरे भी लगेंगे, जिनसे ये गाड़ी जहां भी जाएगी, वहां का पूरा दृश्य कंट्रोल रूम में नजर आएगा। 
-  कौनसी गाड़ी किस जगह कितनी देर खड़ी रही, ये जानकारी कंप्यूटर में रहेगी। इनकी मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट मिलेगी। शहर में ऐसी जगह जहां कैमरे नहीं हैं, वहां पुलिस का द्रोण कैमरा नजर रखेगा व वीडियो कमांड सेंटर पर देखा व रिकॉर्ड किया जा सकेगा।

 

 

ट्रैफिक सिस्टम ताेड़ने वालों को कैप्चर कर चालान बनाएंगे

- प्रदेश में जयपुर व कोटा के बाद जोधपुर तीसरा शहर है, जहां इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया गया है। इसके जरिए कमांड सेंटर में बैठी टीम ग्राउंड पर व्यवस्था में लगी पुलिस टीमों को किस जगह पर ज्यादा ट्रैफिक, इसे व्यवस्थित करने के लिए वैकल्पिक रास्ते व डायवर्जन बताएगी। रोड पर चल रही हर गाड़ी की नंबर प्लेट को ऑटोमैटिकली पढ़ना और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के चालान भी सिस्टम से ही बनेंगे। 

 

- चोरी हुई गाड़ियों के नंबर सिस्टम में अपडेट होने के बाद उन वाहनों की तलाश भी सिस्टम ही सड़क पर चलने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट स्कैन करके खुद ही करेगा। अगर गाड़ी कैमरे की नजर में आई तो पुलिस को इसका अलर्ट मिलेगा।
- कंट्रोल रूम में आने वाली फर्जी कॉल्स पर अंकुश लग सके, इसके लिए सिस्टम को अपडेट किया  है। कंट्रोल रूम में कॉल करने वाले शख्स की लोकेशन भी देखी जा सकती है।

 

 

सोशल मीडिया  पर शहर की एक्टिविटीज पर नजर, झूठे मैसेज पकड़ेंगे
-  लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से पुलिस और आईटी एक्सपर्ट की टीमें सोशल मीडिया पर नजर रख रही हैं। पूरे जोधपुर या किसी भी अन्य शहर, मोहल्ले या गली के लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर मैसेज, फेसबुक, ट्विटर या यू-ट्यूब इत्यादि सोशल साइट्स पर नजर रख सकती है।

- सोशल मीडिया पर इन दिनों भ्रमित करने वाले वीडियो, ऑडियो मैसेज खूब वायरल होते हैं। शरारती तत्व इनमें छेड़छाड़ और कांटछांट करके अर्थ का अनर्थ बना देते हैं। 
- भ्रमित करने वाले या मॉर्फिंग  किए वीडियो, ऑडियो या फोटो की जांच भी यहां हो सकेगी। यानी सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली दुर्भावना और अफवाहों पर भी काफी हद तक अंकुश लगेगा। इसके साथ ही ऐसे आपत्तिजनक मैसेज या फोटो वायरल करने वाले लोगों को भी आसानी से पकड़ा जा सकेगा।

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