पंचकूला जिले को हरा-भरा बनाने को 18 सितंबर तक ड्रोन से गिराए जाएंगे बीज

Panchkula Bhaskar News - फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, हरियाणा ने पंचकूला जिले में शिवालिक एरिया को हरा-भरा करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:36 AM IST
Panchkula News - seeds to be dropped by drone to make panchkula district green
फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, हरियाणा ने पंचकूला जिले में शिवालिक एरिया को हरा-भरा करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न पेड़ों के बीज गिराने का अभियान शुरू किया है।

इस इनोवेटिव अभियान के तहत ड्रोन की मदद से बीज गिराए जा रहे हैं। यह पहला मौका है जब ड्रोन की मदद से जिले के फॉरेस्ट एरिया में बीज गिराए जा रहे हो। यह अभियान 12 सितंबर को शुरू किया गया है जोकि 18 सितंबर तक जारी रहेगा। ड्रोन से पंचकूला जिले में नीम, जामुन, आंवला सहित बरगद, पीपल, पिलखन, खैर आदि के बीज गिराए गए हैं। टेक्नोलॉजी को टैस्ट करने के लिए पॉयलेट बेसिस पर इस अभियान को चलाया जा रहा है। इस सीडिंग ड्रोन को आईआईटी, कानपुर के स्टूडेंट्स ने स्टार्ट अप के तौर पर इसे तैयार किया है।

यह ड्रोन दो किलोग्राम तक के बीज अपने साथ हवा में ले जाने में सक्षम हैं। इसमें विभिन्न साइज के बीज 10 से 15 मीटर की ऊंचाई से रूक-रूक कर गिराने की क्षमता है। एक ड्रोन दिन में उड़ते हुए 20 से 30 हजार पेड़ लगा सकता है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर डॉ. अनिल हुड्‌डा ने आज माधना, मोरनी में इस पायलट प्रोजैक्ट के बारे में बताया। उन्होंने कि चीफ सेक्रेटरी, हरियाणा केशनी आनंद अरोड़ा ने इस अभियान में विशेष दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने ही शिवालिक एरिया में एरियल ट्री सीडिंग ऑपरेशन चलाने के लिए डिपार्टमेंट को मोटिवेट किया। उनका कहना है कि लो डेंसिटी एरिया में ड्रोन की मदद से पौधारोपण में काफी मदद मिलेगी। ड्रोन की मदद से ऐसे एरिया में भी पौधारोपण किया जा सकता है जिसमें उबड़-खाबड़ या मुश्किल रास्ता होने के कारण पहुंचना आसान नहीं है। यहां लोगों की मदद से पौधे लगाना संभव नहीं है। यह टेक्नोलॉजी भविष्य में हरियाली को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। इसमें लगा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी बेसड सिस्टम से पाैधे लगाने के लिए साइट्स को सलेक्ट किया जा सकता हैं और उसमें बीज गिराकर पौधारोपण संभव है। ड्रॉन से मिट्‌टी में नमी की मात्रा भी चैक की जा सकती है।

जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी का कर रहे इस्तेमाल...फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर विनोद कुमार का कहना है कि डिपार्टमेंट फॉरेस्ट बाउंडरी का मैप तैयार करने, फॉरेस्ट कवर की जानकारी और फॉरेस्ट्री रिसोर्स और एसेट्स की मोनिटरिंग के लिए जियोस्पेशियल टेकनोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। लेटेस्ट सेटेलाइट इमेज से खाली पड़ी जमीन की जियोलोकेशन और लो डेंसिटी एरिया का पता किया जा सकता है। इसका डाटा ड्रोन सॉफ्टवेयर में फीड कर ऑटो प्लांटेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट मोबाइल बेसड एप भी डेवलप करा रहा है जिससे फॉरेस्ट एरिया की अच्छे ढंग से मैनेजमेंट हो सकेगी। इसमें डाटो को मोनिटर कर सकेंगे और फॉरेस्ट एरिया की पूरी जानकारी होगी।

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