इंदौर। यदि किसी व्यक्ति के द्वारा सप्लाई किए गए माल पर लगने वाले टैक्स का भुगतान नहीं किया गया तो उसे 10 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा। टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन द्वारा बुधवार को प्रीतमलाल दुआ सभागृह में जीएसटी पर आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों द्वारा यह जानकारी दी गई।
- - विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसी कारोबारी ने जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स रिबेट का गलत क्लेम ले लिया हैं, अथवा गलत रिफंड क्लेम कर दिया है तब भी 10000 रुपए या चुकाए जाने वाले टैक्स की राशि का 10 प्रतिशत जुर्माने के रूप में सरकार को देना होगा।
- - इसके साथ ही यदि जांच में यह पाया जाता हैं कि कारोबारी द्वारा फ्राड करने के उद्देश्य से टैक्स जमा नहीं किया है या इनपुट टैक्स क्रेडिट अधिक क्लेम कर ली है या गलत रिफण्ड प्राप्त कर लिया है तो ऐसी स्थिति में कम से कम 10000 रुपए और अधिकतम चुकाए जाने वाले टैक्स की राशि के बराबर जुर्माना वसूला जाएगा।
- - संस्था के स्टेट टैक्स सचिव जेपी सराफ ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति केंद्र या राज्य के जीएसटी अधिकारियों के द्वारा जारी किए गए समन के परिपालन में उपस्थिति नहीं होते है तो उन्हें भी 25000 तक की पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता हैं।
- - जीएसटी के अंतर्गत छोटी-मोटी भूलों/त्रुटियों के लिए किसी भी प्रकार कोई पेनाल्टी नहीं लगाए जाने के प्रावधान लाए गए हैं। यदि जीएसटी के किसी नियम के उल्लंघन के कारण 5000 रुपए से कम टैक्स की राशि हो तो ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की कोई पेनल्टी नहीं लगाने का प्रावधान हैं।
- - यदि माल के परिवहन के दौरान यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति के द्वारा किसी माल का परिवहन अथवा संग्रहण (स्टोरेज) जीएसटी की धाराओं एवं नियमों के विरूद्ध किया गया हैं, तो ऐसी स्थिति में उस माल पर देय कर (टैक्स) एवं कर (टैक्स) के बराबर की पेनाल्टी देय होगी। किंतु यह रियायती पेनाल्टी केवल उसी परिस्थिति में लागू होगी जब माल का मालिक कर एवं पेनाल्टी की राशि भरने के लिए आगे आता हैं।
- - यदि माल का मालिक कर एवं पेनाल्टी की राशि को जमा करने हेतु आगे नहीं आता हैं तो ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति पर माल के मूल्य के बराबर पेनल्टी देय होगी।
जीएसटी के तहत स्थाई संपत्ति के वर्क्स कांट्रेक्ट को सेवाओं की सप्लाई माना गया है
- वरिष्ठ कर सलाहकार आरएस गोयल ने बताया कि भारत के संविधान में सन 1986 में हुए संविधान संशोधन के अनुसार वर्क्स कांट्रेक्ट को डीम्ड सेल्स ऑफ गुड्स माना गया है जबकि जीएसटी के प्रावधानों के अनुसार किसी भी स्थाई संपत्ति के लिए किए गए वर्क्स कांट्रेक्ट को सेवाओं की सप्लाई माना गया हैं।
- - यदि किसी निर्माता व्यवसायी द्वारा अपनी निर्माण ईकाई (फैक्ट्री) के भवन के निर्माण हेतु सीमेंट, स्टील, रेती, गिट्टी, चद्दर, टाईल्स, पेंट आदि की खरीदी जीएसटी चुकाकर की गई है तथा उस फैक्ट्री में निर्मित माल पर पूर्ण दर से जीएसटी चुकाकर विक्रय किया जाता हैं तो भी निर्माता व्यवसायी को उनके द्वारा जीएसटी चुकाकर खरीदे गए सीमेंट, स्टील, रेती, गिट्टी, चद्दर, टाईल्स, पेंट इत्यादि का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त नहीं होगा।
- - किंतु यदि किसी निर्माता व्यवसायी (उद्योगपति) द्वारा अपनी फैक्ट्री में स्थापित करने हेतु मशीनों को खरीदा जाता हैं तो ऐसी मशीनों पर चुकाए गए जीएसटी की पूर्ण छूट (इनपुट टैक्स क्रेडिट) उस व्यवसायी को प्राप्त होगी। इसी के साथ मशीन को स्थापित करने हेतु फाउंडेशन में लगे सरीये, सीमेंट, स्टील एवं अन्य एसेसरीस पर चुकाए गए कर की छूट भी उस व्यवसायी को मिलेगी।
- - यदि किसी व्यवसायी के द्वारा किसी अचंल सम्पत्ति के रिकंस्ट्रक्शन, रिनोवेशन, एडिशन, अल्ट्रेशन एवं रिपेयर का कार्य किया जाता हैं। तथा इस कार्य में लगे खर्चों को केपिटलाइस्ड ना किया जाकर अपने प्रॉफिट एण्ड लॉस अकाउण्ट में रेवेन्यू एक्सपेनडिचर के रूप के दर्शाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में उन्हें उपरोक्त कार्य को करने हेतु क्रय किए गए मालों एवं प्राप्त की गई सेवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त होगा।
- - यदि किसी व्यवसायी द्वारा अलग-अलग जीएसटी की दरों का माल एक साथ एक ही पैकेट में बेचा जाता है। और उस पैकेट पर उन मालों का अलग-2 मूल्य ना दर्शाते हुए एक ही मूल्य पर बेचा जाता हैं, तो ऐसी स्थिति में बेचे गए मालों में जिस माल पर कर की दर अधिकतम होगी उसी दर से पूरे मूल्य पर जीएसटी देना होगा।