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पूर्व मंत्री राजेंंद्र सिंह का निधन, अंचल में कांग्रेस की राजनीति के एक युग का अवसान

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर.  पूर्व मंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह नहीं रहे। यह खबर रविवार को देर रात तब आई जब ज्यादातर लोग नींद के आगोश में थे। लिहाजा, सोमवार की सुबह जिसने पढ़ा, सुना वह सन्न था। यकायक भरोसा नहीं हुआ। कुछ ने कहा- सुबह ही तो शताब्दी से भोपाल गए थे भाई साहब। सच भी यही था। वे रविवार की सुबह ही भोपाल गए थे। वहीं आधी रात को दिल का दौरा पड़ा तो कुछ ही देर में सांसे थम गईं। वे ऐसे विरले नेता थे, जिनका सम्मान सभी दलों के लोग दिल से करते थे।

 

सरल, सहज, सौम्य व्यक्तित्व के धनी, कम आैर धीमा बोलने आैर सबको अपना बना लेने वाले राजेंद्र जी कुछ लोगों के लिए  भाई साहब तो कुछ के लिए बाबूजी थे। गांधीवादी विचारक कक्का डोंगर सिंह के पुत्र  राजेंद्र सिंह  1967 में पार्षद चुने गए। इसके बाद 1972 में मुरार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए आैर श्यामाचरण शुक्ल के मंत्रिमंडल में लोक निर्माण राज्यमंत्री। इसी दौर में उन्होंने शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई रेलवे स्टेशन क्षेत्र के सौंदर्यीकरण से लेकर बाड़े पर सड़कों के चौड़ीकरण आैर नजरबाग, सुभाष मार्केट, गांधी मार्केट का निर्माण उनके प्रयासों की देन है। सिटी सेंटर के विकास की परिकल्पना उनकी देन है। शहर में रोप-वे का निर्माण उनका सपना था, जो आज भी अधूरा है। 1977 में विधानसभा आैर 1980 में लोकसभा चुनाव  असफलता के  बाद भी जनता के बीच सक्रिय रहे। पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष आैर प्रभारी अध्यक्ष भी रहे। 

 

अंचल में शोक की लहर : दलगत राजनीित से परे सकारात्मक सोच के नेता थे वे

 

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वे सामाजिक प्रतिबद्धता के लिए समर्पित सकारात्मक सोच के नेता थे। सर्वहारा की भलाई के लिए सदैव संघर्षशील रहने वाले श्री सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेताआें में शुमार थे। उनका निधन अंचल की राजनीति की एक बड़ी क्षति है।

 

सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पूर्व मंत्री सिंह का निधन पार्टी की अपूरणीय क्षति है। हमने एक जुझारू,निष्ठावान कार्यकर्ता खोया है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।


मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि वे अंचल के एक कद्दावर, सौम्य आैर विनम्र राजनेता थे। वे उस राजनीतिक परंपरा के नेता थे, जाे पक्ष-विपक्ष की सीमा से परे उठकर सहज संवाद में भरोसा रखते थे।

 

मेयर विवेक शेजवलकर ने बताया कि अंचल के विकास को लेकर वे सत्ता में रहते हुए तो प्रयासरत रहे ही, विपक्ष में रहकर भी विकास के लिए चिंतित रहते थे। अलग विचारधारा का होने के बाद भी मुझे हमेशा उनका स्नेह मिलता रहा। उनके निधन से हमने एक मिलनसार, हंसमुख व्यक्तित्व खो दिया है। 

 

 

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने बताया कि हमने अपने परिवार का अभिन्न अंग, सुख-दुख का साथी आैर उत्कृष्ट मार्गदर्शक खोया है। उनसे मेरे पारिवारिक आैर घनिष्ठ मित्रवत संबंध थे। ईश्वर उनके परिजनों को इस गंभीर दुख को सहन करने की शक्ति आैर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। 

 

सीनियर कांग्रेस लीडर वासुदेव शर्मा ने कहा कि राजेंद्र सिंह जी के निधन से कांग्रेस की राजनीति में एक गांधीवादी युग का अंत हो गया है। वे अंचल में सबको साथ लेकर चलने वाले नेता थे। जॉति-पांति की भावना से दूर संगठन में सबको साथ लेकर संगठन के लिए काम आैर सतत संघर्ष करने वाले नेता। 
 

शहर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष चंद्रमोहन नागौरी ने बताया कि मेरे परिवार का उनके साथ तीन पीढ़ियों का रिश्ता है। वे राजनीति को लोकसेवा का माध्यम मानने वाले आैर अपने आदर्शों का पालन करने के लिए किसी भी हद तक त्याग करने वाले नेता थे।  यही वजह है कि कई बार विचारों का मेल न खाने वाले नेता भी उनका सम्मान करते थे। 

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