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बजट से अब तक 26 सत्र में 5088 अंक गिरा सेंसेक्स, 19 लाख करोड़ रुपए साफ

एक वर्ष पहले
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सभी 19 सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट, एनर्जी इंडेक्स में 9.74% लुढ़का

कोरोनावायरस के डर और यस बैंक की विफलता से देश के शेयर बाजारों की नब्ज पहले ही कमजोर थी। खाड़ी युद्ध के बाद क्रूड में आई करीब तीस साल की तेज गिरावट ने दुनिया के शेयर बाजारों का मूड बिगाड़ दिया। निवेशकों और कारोबारियों ने विश्व अर्थव्यवस्था के मंदी की चपेट में आने के डर से बिकवाली शुरू कर दी। भारतीय बाजार भी इससे अछूते नहीं रहे। सेंसेक्स-निफ्टी एक दिन की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 1941.67 अंक (5.17%) गिरकर 35,634.95 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी-50 में 538 अंक (4.90%) की गिरावट रही। यह 10,451.45 पर बंद हुआ।

दोपहर में डेढ़ बजे के करीब गिरावट का दबाव इतना अधिक था कि सेंसेक्स ने 2,467.44 अंक (6.57%) की गिरावट के साथ 35109.18 का निचला स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी ने 695 अंक (6.32%) की गिरावट के साथ 10,294.45 का निचला स्तर छुआ। शाम को कारोबार की समाप्ति पर बीएसई के सभी 19 सेक्टोरल इंडेक्स 2.87% से 9.74% गिरकर बंद हुए।

सोमवार की गिरावट में बीएसई में निवेशकों की संपत्ति 6.84 लाख करोड़ रुपए (4.74%) कम हो गई। बीएसई का मार्केट कैप 137.47 लाख करोड़ रुपए रह गया। यह बीते शुक्रवार कारोबार की समाप्ति पर 144.31 लाख करोड़ रुपए था। बजट पेश होने के दिन (1 फरवरी) सेंसेक्स काफी लुढ़क चुका है। तब से अब तक 26 कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में 5,088.54 अंक (12.17%) की गिरावट देखने को मिली है। मार्केट कैप 19.04 लाख करोड़ रुपए (12.50%) की कमी आई है।

गिरावट चिंताजनक लेकिन क्वालिटी स्टॉक में निवेश का अच्छा समय भी

कच्चे तेल की कीमत का स्टॉक प्राइस पर सीधा असर होता है। एक अन्य बड़ा कारण यस बैंक प्रकरण के कारण उपजा लिक्विडिटी संकट है। हालांकि, ऐसी स्थिति में भी निवेशकों को पैनिक नहीं करना चाहिए। उन्हें इस समय निवेश के लिए शेयर मार्केट में क्वालिटी स्टॉक तलाशने चाहिए।

-उमेश मेहता, रिसर्च हेड, सैमको सिक्युरिटीज

3. क्या जारी रहेगी कच्चे तेल में गिरावट?

अगर ओपेक देशों और रूस के बीच आने वाले दिनों में कच्चे तेल का उत्पादन घटाने पर सहमति बन जाती है तो क्रूड के दाम एक बार फिर बढ़ सकते हैं। हालांकि, बहुत जल्द ऐसा कुछ होने की संभावना नहीं है। साथ ही कोरोनावायरस के असर पर भी बाजार की नजर रहेगी। कोरोनावायरस पर जल्द नियंत्रण पा लिया गया तो चीन सहित कई देशों से एक बार फिर कच्चे तेल की डिमांड बढ़ेगी। ऐसा होने पर इसके दामों में तेजी देखने को मिलेगी।

2. भारत को फायदा तो बाजार क्यों लुढ़के?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आने से भारत को फायदा होगा और इसका आयात बिल कम होगा। लेकिन, कई उद्योग और सेक्टर ऐसे हैं जो तेल के कारोबार से जुड़े हैं। देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्री भी इस कारोबार में है। इसके शेयर 12.35% गिरकर बंद हुए। इसके असर में उन कंपनियों के शेयर भी गिरे जिनका कारोबार इन कंपनियों से जुड़ा हुआ है।

तीन सवालों से जानिए कच्चे तेल में गिरावट का असर और भावी संभावनाएं

1. कच्चा तेल इतना सस्ता होने से क्या अब भारत में कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

मौजूदा गिरावट के कारण देश का आयात बिल कम होगा। अगर गिरावट का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है तो पेट्रोल के दाम 50 रुपए प्रति लीटर तक आ सकते हैं। हालांकि, भविष्य में कीमत बढ़ने की आशंका से पूरा ग्राहकों को पूरा लाभ कम ही दिया जाता है। टैक्स बढ़ाकर कीमतें अधिक रखी जा सकती हैं। दिल्ली में सोमवार को पेट्रोल 24 पैसे घटकर 70.59 रुपए लीटर और डीजल 25 पैसे घटकर 63.26 रुपए लीटर हुआ।

भारत का क्रूड आयात बिल आधा रह सकता है

भारत का क्रूड आयात बिल घटकर आधा हो सकता है। 2018-19 में कुल 11,200 करोड़ डॉलर का कच्चा तेल आयात हुआ था। विशेषज्ञों के मुताबिक अगल लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है तो भारत का क्रूड आयात बिल 6400 करोड़ डॉलर रह सकता है।

करीब एक महीने में सोना 9.51% महंगा

सोमवार को सोना 22 रुपए बढ़कर 45,063 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बिका। 12 फरवरी से अब तक सोना 9.51 फीसदी महंगा हो चुका है। इसी अवधि में अमेरिकी डॉलर के सामने रुपया 281 पैसे (3.94%) कमजोर हुआ है।

ग्लोबल इम्पैक्ट: एशियाई बाजार 5%, तो यूरोपीय 7% से ज्यादा गिरे

1. ब्रेंट क्रूड 6 जनवरी से अब तक 34 दिन में 52% टूटा

आपेके देशों और रूस के बीच प्राइस वॉर छिड़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 33% गिर कर 33.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद करीब 30 साल में यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6 जनवरी को ब्रेंट क्रूड की कीमत 68.91 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी 34 दिनों में यह 52% लुढ़क चुका है।

रिलायंस के शेयर में दस साल की सबसे बड़ी गिरावट, टीसीएस बनी सबसे मूल्यवान कंपनी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में 10 साल से भी ज्यादा समय की सबसे बड़ी गिरावट देखने का मिली। कंपनी के शेयर 12.35% नुकसान के साथ 1113.15 रुपए पर बंद हुए। इस गिरावट के बाद बीएसई में रिलायंस का मार्केट कैप 7.05 लाख करोड़ रुपए रह गया। वहीं, टीसीएस रिलायंस को पछाड़कर देश की देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। टीसीएस के शेयर 6.88% गिरकर 1,972.20 रुपए पर बंद हुए। कंपनी का मार्केट कैप 7.40 लाख करोड़ रुपए हो गया।

876543210

एफटीएसई-100

यूके)

6543210

निक्केई-225

(जापान)

बीएसई के 19 इंडेक्स 2.87-9.74% गिरे

इंडेक्स गिरावट (%)

{एनर्जी 9.74 

{मेटल 7.62 

{आईटी 5.40 

{ऑयल-गैस 5.22 

{टेक 5.13 

{बैंकेक्स 5.01 

{फाइनेंस 4.83 

{यूटिलिटीज 4.80 

{पावर 4.48 

{मटेरियल 4.43 

{कैपिटल गु्ड्स 4.39 

{इंडस्ट्रियल 4.36 

{ऑटो 3.66 

{रियल्टी 3.51 

{हेल्थकेयर 3.31 

{सीजीडीएस 3.24 

{एफएमसीजी 3.14 

{कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.96 

{टेलीकॉम 2.87 

ब्रेंट क्रूड एक दिन में सबसे अधिक 33% गिरा, 33.02 डॉलर प्रति बैरल पर आया


4. यस बैंक का संकट

3. कोरोना का प्रकोप बढ़ा, अब तक 1.13 लाख लोग संक्रमित

भारत में कोरोनावायरस के मरीजों की संख्या 40 हो गई। केरल में 5 नए मामले सामने आए हैं। दुनियाभर में मरीजों की संख्या 1,13,751 हो गई है। दुनियाभर में अब तक 3,990 लोगों की मौत हो चुकी है। इटली में 366 की मौत हो चुकी है। 1.5 करोड़ लोगों पर ट्रैवल बैन लगा है। स्कूल, जिम, म्यूजियम, नाइट क्लब बंद कर दिए गए हैं।

2. खराब वैश्विक संकेत मिले, अमेरिका-चीन में भी गिरावट

अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट पर बंद हुए थे। शुक्रवार के कारोबार में एसएंडपी 500 और नैस्डैक करीब 2% गिरे थे। इधर, एशिया-प्रशांत और यूरोप के बाजारों में 3% से लेकर 7% से अधिक गिरावट देखने को मिली। अमेरिका में अच्छे रोजगार आंकड़े से भी सहारा नहीं मिला। फरवरी में 2.75 लाख नई नौकरियां जुड़ीं।

सोमवार को एक दिन में निवेशकों के 6.84 लाख करोड़ रुपए डूबे


एशिया की सबसे बड़ी गिरावट जापान में दर्ज

कोरोनावायरस के कारण पहले ही दुनियाभर के शेयर बाजार दबाव में थे। इसके बाद यस बैंक मामला और अब क्रूड में प्राइस वॉर होने से बाजार और खस्ताहाल हो गए। एफआईआई ने इस महीने अब तक 17,315 करोड़ रुपए की निकासी कर ली है। दूसरा पहलू यह है कि भारत को क्रूड की कीमत गिरने से फायदा होगा, जो हमारे बाजार को निवेश के लिए आकर्षक बनाएगा।

अर्पित जैन, एवीपी, अरिहंत कैपिटल

यस बैंक संकट से देश की आर्थिक स्थिरता पर सवाल खड़े हुए हैं। कई तरह पाबंदियों के कारण दो लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि फंसी हुई है। इससे निवेशकों में लगातार नकारात्मक संकेत जा रहा है। लगातार दूसरे दिन इस संकट ने शेयर बाजार पर असर डाला और इससे बिकवाली को बढ़ावा मिला।

मंदी का डर }ब्रेंट क्रूड के दाम में 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद सबसे बड़ी गिरावट, विश्व अर्थव्यवस्था के मंदी की चपेट में आने की आशंका बढ़ी
**

{आंकड़े गिरावट प्रतिशत में।

3.01

4.23

7.41

7.32

6.97

5.07

कैक-40

(फ्रांस)

शंघाई कंपोजिट

(चीन)

डैक्स

(फ्रांस)

हेंगसेंग

(हांगकांग)

यूरोप के बाजार**

एशिया-प्रशांत के बाजार**

{ सेंसेक्स की अंकों में गिरावट**

क्रूड ऑयल
**

यस बैंक संकट**

1 फरवरी से 5 बड़ी गिरावट और इसके पीछे के कारण**

बजट कोरोनावायरस

1 फरवरी 24 फरवरी 28 फरवरी 6 मार्च 9 मार्च

988 807 1,448 894 1,942

शेयर बंद भाव गिरावट

{ओएनजीसी 74.65 16.26 (%) 

{ रिलायंस 1,113.15 12.35 (%) 

{ इंडसइंड बैंक 906.2 10.66 (%) 

{ टाटा स्टील 322.3 8.23 (%) 

{ टीसीएस 1,972.20 6.88 (%) 
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