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डाउनलोड करेंजमशेदपुर (झारखंड़). मां ने पढ़ने के लिए डांट लगाई तो सातवीं के छात्र अमृत आनंद (13 साल) ने फांसी लगा ली। कमरे में बंद होकर उसने रविवार की रात खिड़की के सहारे फंदे से झूल गया। अमृत की मां पूनम सिंह उसी स्कूल की लाइब्रेरी अटेंडर हैं, जिसमें बेटा पढ़ता था। वे जमशेदपुर के उलियान विद्यासागर मार्ग पर स्थित नटराज क्लासिक अपार्टमेंट में रहती हैं। दो साल पहले इंजीनियर पति मनोज सिंह की बीमारी से मौत हो गई थी। अमृत उनका इकलौता बेटा था और उनकी बेटी चित्रा (14) है। ये था पूरा मामला...
- घटना की जानकारी, सोमवार सुबह करीब 9 बजे हुई, जब चित्रा उसे नाश्ते के लिए बुलाने गई। मां की डांट के बाद अमृत ने रविवार रात कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था।
- चित्रा ने आवाज लगाई, जवाब नहीं मिला। परेशान होकर वह दरवाजे को जोर-जोर से पीटने लगी, जिससे अंदर की कुंडी टूट गई।
- वह कमरे में गई तो भाई को फंदे से झूलता देख बेहोश हो गई। होश आने पर चिल्लाने लगी। अपार्टमेंट में रहने वाले लोग फ्लेट में पहुंचे, उस समय पूनम स्कूल में थीं।
- पड़ोसियों ने फोन कर उन्हें घर जल्दी आने को कहा। पूनम घर पहुंची तो होश उड़ गए। कदमा थाना प्रभारी विनोद पासवान टीम के साथ पहुंचे और शव को नीचे उतारा गया।
- अमृत के कमरे में बिस्तर पर किताबें खुली हुई थीं। शायद रात में उसने पढ़ाई के बाद फांसी लगाई। फंदे से झूलने के बाद वह छटपटाया था, जिसके कारण घुटने व पैर में कई जगह चोट के निशान भी थे।
मैंने पढ़ने के लिए डांटा, इसलिए कि पिता की तरह अच्छा आदमी बनेगा
- इकलौते बेटे की मौत से आहत पूनम सिंह ने कहा, दो साल पहले पति ने साथ छोड़ दिया। सोचा था- बच्चों के सहारे जिंदगी कट जाएगी। बेटा सहारा बनेगा लेकिन वह भी साथ छोड़ गया। अब जिंदगी बोझ बन गई है।
- मेरा बेटा अमृत जिद्दी स्वभाव का था। रविवार रात मैंने उसे पढ़ने के लिए कहा तो वह भागने लगा। फिर अपने कमरे में चला गया।
- मैंने गुस्से में अमृत के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। शायद यही मेरी भूल थी। कुछ देर बाद कुंडी खोल दी लेकिन अमृत ने भी अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था।
- 9 दिनों में शहर के तीन छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। औसतन हर तीसरे दिन एक छात्र ने आत्महत्या की। कारण- पढ़ाई का दबाव।
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