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डाउनलोड करेंअंबिकापुर. सेंट्रल जेल में उल्टी-दस्त से कई कैदी व बंदी बीमार हो गए हैं। यहां से पिछले दो तीन दिनों में रोज चार से पांच मरीजों को मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बुधवार को अस्पताल में भर्ती एक कैदी की मौत हो गई। उल्टी-दस्त की शिकायत पर उसे मंगलवार की शाम को यहां भर्ती कराया गया था। अस्पताल के जेल वार्ड में गंभीर रूप से पीड़ित 16 कैदियों का इलाज चल रहा है।
उधर, जेल के अंदर अस्पताल में 40 से ज्यादा बंदियों को भर्ती कराया गया है। उन्हें भी दस्त की शिकायत बताई जा रही है लेकिन प्रबंधन जेल में अस्पताल में भर्ती बीमार कैदियों को अलग-अलग रोगों से पीड़ित होना बता रहा है। इधर जेल से बीमार बंदियों की संख्या अचानक बढ़ने से अस्पताल के जेल वार्ड में जगह की कमी पड़ गई है। इससे कुछ बंदियों को यहां के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल व पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कैदी पालन लोहार 27 वर्ष को मंगलवार को उल्टी दस्त की शिकायत होने पर शाम को जेल से लाकर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत काफी गंभीर थी। यहां इलाज के बाद भी उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और बुधवार की सुबह उसकी मौत हो गई। पालन लोहार जशपुर जिले के टोंगरी थाना अंतर्गत बटईकेला का रहने वाला था और अनाचार के मामले में उसे 10 वर्ष की सजा हुई थी। कोर्ट से सजा होने के बाद उसे जशपुर से अंबिकापुर के सेंट्रल जेल में कुछ महीने पहले ही शिफ्ट किया गया था। अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।
जगह कम पड़ने से जेल वार्ड से मेडिकल वार्ड में किया गया शिफ्ट
मेडिकल कालेज अस्पताल में जेल वार्ड की क्षमता पांच बेड की है। बीमार बंदियों की संख्या बढ़ने पर वार्ड के अंदर ही फ्लोर पर बेड लेकर दो-तीन बंदियों को भर्ती कर दिया जाता है लेकिन अचानक 16 मरीज होने से वार्ड में जगह कम पड़ गई। इससे आधे मरीजों को मेडिकल वार्ड में बुधवार को शिफ्ट किया गया। इससे अब मेडिकल वार्ड में भर्ती बंदियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था में जवान लगाने पड़ रहे हैं।
अलग-अलग जगह से उल्टी-दस्त के 38 अन्य मरीज भर्ती
मौसम में हो रहे बदलाव से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है। इससे अस्पताल में रोज उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यहां के आसोलेशन वार्ड में जगह कम पड़ने से बरामदे में जमीन पर लिटाकर मरीजों का इलाज चल रहा है। आइसोलेशन वार्ड में अलग-अलग जगह के 38 मरीज भर्ती हैं। इनमें सूरजपुर जिले के प्रेमनगर थाना अंतर्गत रमेशपुर के पांच मरीज भी शामिल है। इसी प्रकार शहर सहित अन्य जगह के मरीज यहां भर्ती है। जेल में अचानक उल्टी-दस्त के मरीज बढ़ने से फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई जाने लगी है। बंदियों का इलाज करने वाले डाक्टरों के अनुसार उल्टी दस्त की बीमारी फूड प्वाइजनिंग से होती है। वहां से पिछले दो तीन दिनों में जो भी मरीज आए उन सभी को उल्टी-दस्त की शिकायत है। इससे फूड प्वाइजनिंग से इनकार नहीं किया जा सकता है।
सेंट्रल जेल में लगभग ढाई हजार कैदी हैं बंद
सेंट्रल जेल में अलग-अलग मामलों में लगभग ढाई हजार से कैदी बंद है। यहां के जेल की क्षमता डेढ़ हजार की है। इससे यहां की व्यवस्था प्रभावित होती है। हालांकि प्रबंधन इससे इनकार करता है लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बंदियों के बीमार होने से इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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