- Hindi News
- National
- Hamirpur News Sfi And Abvp Activists Call Police To Calm The Fighting Atmosphere
एसएफआई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं में मारपीट माहौल शांत करवाने के लिए बुलानी पड़ी पुलिस
पीजी कॉलेज हमीरपुर में शुक्रवार को एसएफआई के नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा भी नारेबाजी करने के बाद दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं में एक दूसरे के कार्यक्रम को लेकर नौक झोंक हो गई। एबीवीपी के कार्यकर्ता जब प्रिंसिपल के ऑफिस पहुंच गए तो प्रिंसिपल ने मौके पर पुलिस बुला ली। तब जाकर मामला शांत हुआ। हालांकि किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हुआ, लेकिन दोनों ही संगठनों के कार्यकर्ताओं को माहौल खराब न करने की सख्त हिदायत दी गई। काबिलेगौर है एसएफआई द्वारा काॅलेज कैंपस में मांगों पर राज्य सचिव अमित ठाकुर के नेतृत्व में नाटक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था। अभी यह खत्म नहीं हुआ था कि इसी बीच एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने भी अलग से प्रदर्शन करके मुर्दाबाद जैसी नारेबाजी शुरू कर दी। जिसका एसएफआई वालों ने विरोध किया उनका नुक्कड़ नाटक चल रहा, नारेबाजी से इसमें बाधा पड़ रही। इसे बाद में भी कर सकते हो। इसी बात पर उनमें कहासुनी हो गई।
एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज चंद प्रोफेसर स्टूडेंट्स पर अपनी राजनीति करके उन्हें उकसाने का कार्य करते हैं। नोकझोंक के बीच ही एबीवीपी के कार्यकर्ता प्रिंसिपल रूम में पहुंच गए और सुरक्षा मांगी। उधर एसएफआई ने इसे एबीवीपी का झूठा ड्रामा बताया है। जबकि अचानक यह देखकर प्रिंसिपल ने पुलिस को मौके पर बुलाया लिया। पुलिस टीम ने कॉलेज पहुंचकर दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं से पूछताछ की और इस तरह घटनाओं को बढ़ावा न देने की नसीहत देकर मामला शांत करवाया। वहीं एसएफआई ने नाराजगी जताई की कॉलेज प्रशासन उन्हें हर बार किसी भी कार्यक्रम को लेकर अनुमति नहीं देता है, जबकि दूसरे छात्र संगठनों के कार्यक्रमों में बाहरी लोग भी शिरकत करते हैं। जिला सचिव दिनेश संधू और स्टेट सचिव अमित ठाकुर ने कहा कि छात्र संघ चुनाव लंबित हैं। जिसके कारण छात्रों को बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रदेश के कॉलेजों में टीचरों की कमी है। शिक्षा का बजट लगातार कम किया जा रहा है।
छात्र संगठनों की इस बारे में कोई भी लिखित शिकायत उनके पास नहीं, दोनों को ही माहौल खराब न करने की हिदायत दी गई। कॉलेज में बाहरी लोगों को किसी भी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की मंजूरी नहीं दी जाती है।
डॉ. अंजू बत्ता सहगल, प्राचार्य।