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शाहकोट उपचुनाव: 96 बूथों पर वोटर्स को चुनावी हिंसा का डर, पैसों का भी हो सकता है इस्तेमाल

3 वर्ष पहले
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जालंधर. शाहकोट विधानसभा हलके के 96 बूथों पर वोटर्स ने चुनावी हिंसा, लड़ाई-झगड़े और वोटर्स को लुभाने के लिए पैसों व शराब इत्यादि के इस्तेमाल की आशंका जताई है। इन बूथों के लगभग 9600 लोगों पर पुलिस और प्रशासन की तरफ से जॉइंट सर्वे में यह नतीजे सामने आए हैं, जिसके बाद पुलिस ने इन बूथों को वलनरेबल बूथ घोषित कर दिया है। इन बूथों की सिक्योरिटी कड़ी कर दी गई है। दरअसल हर बार विधानसभा या लोकसभा चुनाव से पहले संवेदनशील बूथों पर एक वलनरेबिलटी सर्वे करवाया जाता है। शाहकोट विधानसभा क्षेत्र में कुल 236 बूथ हैं। इसमें से 96 बूथों को सर्वे के बाद वलनरेबल घोषित किया गया है। 

 

सिस्टम अपडेट नहीं, मुलाजिमों की लगी डबल ड्यूटी

- जिला प्रशासन की एक गलती से कई महकमों के मुलाजिम मुसीबत में फंस गए हैं। सरकारी मुलाजिमों की डबल इलेक्शन ड्यूटी लगा दी गई है। इसके बाद दूसरी ड्यूटी पर पेश नहीं होने की वजह से उन्हें शो-कॉज नोटिस भी जारी किए गए हैं।
- नोटिस में लिखा है कि 24 घंटे में पेश होकर जवाब नहीं देते तो एफआईआर दर्ज की जाएगी। ये ड्यूटियां सिस्टम अपडेट नहीं होने की वजह से लगाई गई हैं। उपचुनाव के लिए प्रशासन की तरफ से अलग-अलग सरकारी महकमों को कई काम सौंपे गए थे। इन कार्यों को सिरे चढ़ाने के लिए कई कमेटियां बनाई गईं। जैसे मीडिया मॉनिटरिंग कमेटी, मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट कमेटी, होर्डिंग, बैनर उतारने के लिए कमेटियां बनाई गईं।

 

ड्यूटी लगने पर बढ़ा बीपी-शुगर 

 

इलेक्शन ड्यूटी लगने के बाद कई मुलाजिमों की तबीयत खराब हो गई है। किसी का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा है तो किसी की शुगर। तबीयत खराब होने के बाद मुलाजिम फैमिली डॉक्टर से अपना मेडिकल सर्टिफिकेट लेकर इलेक्शन ड्यूटी कटवाने के लिए पहुंचने लगे हैं। मगर डीसी इस बार काफी सख्त हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक दिन की ड्यूटी है, फिर लोग इस तरह इससे बचने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। कई केसों में डीसी ने लोगों के आवेदन सिविल अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के पास भेज दिए हैं। वहां से जांच के बाद अगर एप्लीकेंट की तबीयत खराब निकली तभी ड्यूटी काटी जाएगी। मेडिकल बोर्ड को केस रेफर होने के बाद कई मुलाजिमों ने अपने आवेदन भी वापस ले लिए हैं।  

 

 

पहले महकमों ने और फिर प्रशासन ने लगाईं ड्यूटियां
जिन मुलाजिमों की ड्यूटियां कमेटियों में लगी हैं, उनकी ड्यूटी दोबारा पोलिंग और काउंटिंग स्टाफ में लगा दी गई है। पहले ड्यूटियां प्रशासन ने नहीं, संबंधित महकमों ने खुद लगाई थीं। जबकि दोबारा ड्यूटियां प्रशासन ने लगाईं हैं। प्रशासन के पास महकमों की तरफ से अलग-अलग कमेटियों में लगाई गई ड्यूटियों की लिस्ट मौजूद नहीं थी।

 

नहीं लगेगी डबल ड्यूटी : एडीसी 
इस बारे एडीसी भुपिंदर सिंह ने कहा कि चाहे किसी की भी गलती के कारण मुलाजिमों को परेशान होना पड़ा है, अब मुलाजिमों की परेशानी दूर की जाएगी। जिस किसी भी मुलाजिमों की डबल ड्यूटी लग गई है, वो दफ्तर आकर करेक्शन करवा सकते हैं।

 

 

केस-1: एक सरकारी स्कूल के टीचर को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट से संबंधित कमेटी में और सीधी ड्यूटी भी दी गई है। एक ड्यूटी न दोने के कारण शो कॉज नोटिस जारी हुआ है।

केस-2: एक निगम मुलाजिम को बैनर व होर्डिंग उतारने के लिए तैनात किया गया है जबकि, जिला प्रशासन ने पोलिंग स्टाफ के तौर पर ड्यूटी लगा दी है। अब उसे शो कॉज नोटिस जारी कर दिया है।

 

वोट के बाद निकलेगी पर्ची 

वीवीपैट वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल से लोग ये देख पाएंगे कि जिसे उन्होंने वोट की है, उसके खाते में वोट गई है या नहीं। वोट के तुरंत बाद ईवीएम मशीन से एक वोटिंग स्लिप जनरेट होगी। वोटर ये देख पाएगा कि उसका वोट कौन से कैंडीडेट को गया है। मगर वह स्लिप कोई साथ नहीं ले जा सकेगा। वोटिंग के बाद स्लिप नष्ट कर दी जाएगी। इसके अलावा आयोग बूथों पर डायरेक्ट निगाह रखेगा।  पोलिंग वाले दिन इन बूथों की लॉ एंड ऑर्डर की डिटेल लगातार चुनाव आयोग के पास जाती रहेगी।

 

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