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शनि जयंती: दुर्भाग्य दूर करने के लिए शनिदेव के साथ करें उनकी पत्नी की भी पूजा

ज्योतिष में शनिदेव को न्याय करने वाला देवता माना गया है।

Danik Bhaskar | May 03, 2018, 05:00 PM IST

रिलिजन डेस्क। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 15 मई, मंगलवार को है। ज्योतिष में शनिदेव को न्याय करने वाला देवता माना गया है। मनुष्य अपने जीवन में जो भी अच्छे या बुरे काम करता है, उसका फल उसे शनिदेव ही देते हैं। जब किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती व ढय्या का प्रभाव होता है तो उस समय वह शनि से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।


इस समय वक्रीय है शनि

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, वर्तमान में शनि धनु राशि में वक्रीय है। शनि की यह स्थिति 6 सितंबर तक रहेगी। शनि के वक्रीय होने के कारण जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढय्या का प्रभाव है, उन्हें और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय धनु, वृषभ और कन्या पर शनि की ढय्या व वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए शनि जयंती पर आगे बताया गया उपाय करें-

शनि देव की पत्नियों के नामों का जाप इस प्रकार करें-
ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया।
कंटकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा।।
शनेर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन‍् पुमान्।
दुःखानि नाशयेन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखम।।


1. ध्वजिनी
2. धामिनी
3. कंकाली
4. कलहप्रिया
5. कंटकी
6. तुरंगी
7. महिषी
8. अजा


इस तरह शनिदेव की पत्नियों का नाम लेने से दुखों का नाश होता है और सौभाग्य बढ़ता है। ये उपाय शनि जयंती के अलावा हर शनिवार को भी किया जा सकता है। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं।