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शनिदेव क्यों नहीं करते शिव भक्तों को परेशान, किसने किया था उन पर प्रहार?

Dainik Bhaskar

May 12, 2018, 05:00 PM IST

पुराणों में बताया गया है कि शनि की गति मंद यानी धीमी है, लेकिन कम ही लोग ये जानते होंगे कि ऐसा क्यों है?

Shani Jayanti 2018, Shani Jayanti On 15th May, Shani's Measures,
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रिलिजन डेस्क। इस बार 15 मई, मंगलवार को शनि जयंती है। उज्जैन के पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, ग्रंथों में शनिदेव के संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं। पुराणों में बताया गया है कि शनि की गति मंद यानी धीमी है, लेकिन कम ही लोग ये जानते होंगे कि ऐसा क्यों है? आखिर क्यों शनि मंद गति से चलते हैं। इसके बारे में भी हमारे ग्रंथों में एक कथा का वर्णन है, जो इस प्रकार है...

इन्होंने किया था शनि पर प्रहार
- पुराणों के अनुसार, भगवान शंकर ने अपने परम भक्त दधीचि मुनि के यहां पुत्र रूप में जन्म लिया। भगवान ब्रह्मा ने इनका नाम पिप्पलाद रखा, लेकिन जन्म से पहले ही इनके पिता दधीचि मुनि की मृत्यु हो गई।


- युवा होने पर जब पिप्पलाद ने देवताओं से अपने पिता की मृत्यु का कारण पूछा तो उन्होंने शनिदेव की कुदृष्टि को इसका कारण बताया। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्रोधित हुए और उन्होंने शनिदेव के ऊपर अपने ब्रह्म दंड का प्रहार किया।

- शनिदेव ब्रह्म दंड का प्रहार नहीं सह सकते थे इसलिए वे उससे डर कर भागने लगे। तीनों लोकों की परिक्रमा करने के बाद भी ब्रह्म दंड ने शनिदेव का पीछा नहीं छोड़ा और उनके पैर पर आकर लगा।

- ब्रह्म दंड पैर पर लगने से शनिदेव लंगड़े हो गए, तब देवताओं ने पिप्पलाद मुनि से शनिदेव को क्षमा करने के लिए कहा। देवताओं ने कहा कि शनिदेव तो न्यायाधीश हैं और वे तो अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं।

- देवताओं के आग्रह पर पिप्पलाद मुनि से शनिदेव को क्षमा कर दिया और वचन लिया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक के शिवभक्तों को कष्ट नहीं देंगे यदि ऐसा हुआ तो शनिदेव भस्म हो जाएंगे। तभी से पिप्पलाद मुनि का स्मरण करने मात्र से शनि की पीड़ा दूर हो जाती है।

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