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पिता की मौत हुई तो अंतिम संस्कार में कोई नहीं आया, बेटों की शादी में भी अकेले बाराती बनना पड़ा

3 वर्ष पहले
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राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)। जिले के डोंगरगांव ब्लाॅक में रहने वाले 60 साल के शत्रुहन सोनकर को पिछले 26 सालों से उनके ही समाज ने बहिष्कृत कर रखा है। यहां तक कि कुछ समय पहले बेटे की मौत होने पर इन्होंने जब लोगों से अंतिम संस्कार में शामिल होने की गुहार की तो उनसे 6 हजार रुपए तक मांग लिए गए। इसके बावजूद भी संस्कार में कोई नहीं आया। अकेले ही बने थे बाराती ...

 

- शत्रुहन सोनकर को उसके समाज ने 26 साल पहले किसी बात पर बहिष्कृत कर दिया था।

- समाज के सदस्यों ने शत्रुहन के परिवार के सुख- दुख में शामिल नहीं होने और न ही किसी तरह का रिश्ता इस परिवार से जोड़ने का फरमान जारी किया।

- कुछ साल बाद किसी तरह बेटों की शादी हुई, लेकिन तमाम मिन्नतों के बाद भी समाज के पदाधिकारियों ने उन्हें अपने साथ शामिल करने से इनकार कर दिया। इसके चलते शत्रुहन को अपने बेटों की शादी में अकेले ही बाराती बनकर जाना पड़ा।

- आज शत्रुहन का 5 बेटों के साथ 24 सदस्यों का परिवार है, लेकिन बहिष्कार के चलते इन सभी सदस्यों को सामाजिक जीवन जीने का अधिकार नहीं मिल सका है।

- शत्रुहन बुढ़ापे में भी यही उम्मीद लेकर न्याय के लिए भटक रहे हैं कि उनकी जिंदगी तो बीत गई लेकिन नाती पोतों को ऐसे बुरे दिन से न गुजरना पड़े। 


मौत में शामिल होने मांगे थे 6 हजार रुपए : 

- शत्रुहन ने बताया कि कुछ समय पहले ही उनके बड़े बेटे की मौत हो गई। जब उन्होंने अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में शामिल होने की मिन्नत समाज के सदस्यों से की, तो समाज ने इसके एवज में उनसे 6 हजार रुपए बतौर अमानत राशि मांगी। शत्रुहन ने बताया कि वे रकम देने के लिए भी तैयार हो गए थे, लेकिन इसके बावजूद समाज का कोई भी सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं आया। 


बराबर की सदस्यता के लिए पहल करूंगा : समाज अध्यक्ष

 

सोनकर समाज के प्रदेश अध्यक्ष रामचरण सोनकर ने कहा कि मेरे कार्यकाल को दो साल हुए हैं। इस दौरान मुझ तक शत्रुहन ने इस तरह की शिकायत नहीं की है। मैं उनसे संपर्क कर स्वयं उनकी समस्या सुनूंगा और परिवार को समाज में बराबर की सदस्यता दिलाने की पहल करूंगा।