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महाभारत 2019: सरकार को पाठ नहीं पढ़ाऊंगा, पर आईना तो दिखाऊंगा- शत्रुघ्न सिन्हा

विवाद, मंत्री पद, पार्टी में अनदेखी और 2019 की तैयारी जैसे मुद्दों पर खुलकर बोले शत्रुघ्न सिंन्हा।

धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया/संतोष कुमार | Last Modified - Jun 28, 2018, 06:53 AM IST

महाभारत 2019: सरकार को पाठ नहीं पढ़ाऊंगा, पर आईना तो दिखाऊंगा- शत्रुघ्न सिन्हा

नई दिल्ली.बिहार के पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा अपनी ही पार्टी के खिलाफ लगातार बोल रहे हैं। भास्कर ने महाभारत 2019 के तहत उनसे खास बातचीत की। इसमें एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे सरकार को पाठ तो नहीं पढ़ाएंगे, लेकिन आईना जरूर दिखाएंगे। साथ ही उन्होंने सरकार के खिलाफ एकजुट विपक्ष के रौद्र रूप दिखाने की बात कहते हुए पार्टी को अहंकार छोड़कर लालकृष्ण आडवाणी से माफी मांगने की सलाह भी दे डाली।

Q. अगर भाजपा टिकट न दे, तो क्या करेंगे?
A. ये छुटभैये हैं, छोटे-छोटे लोग हैं, वे हल्ला करते हैं। मुझे किसी नेता ने नहीं कहा कि टिकट नहीं देंगे। टिकट तो पिछली बार भी नहीं दे रहे थे। देश में सबसे आखिरी में मेरे नाम की घोषणा की। नहीं देंगे तो उफ न करूंगा। अपने लिए मिनिस्ट्री की बात भी नहीं करता।

Q. आप पटना साहिब से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे या नहीं?
A. सिचुएशन कुछ भी हो लोकेशन तो वही होगी। और खासकर अब।

Q. 2019 के लोकसभा चुनाव में आपकी क्या भूमिका होगी?
A. 2019 में यूनाइटेड अपोजिशन का बड़ा रौद्र रूप दिखाई पड़ेगा। इसलिए मैं चिंता के साथ कहता हूं कि संपर्क फॉर समर्थन नहीं होना चाहिए, संपर्क फॉर समर्पण होना चाहिए। अपने अहंकार, तेवर एक तरफ रखो और जाओ आडवाणीजी के चरणों में, वे पिता तुल्य हैं। उन्हें कहो कि हमसे भूल हो गई है। जो अपने लोग हैं, चाहे अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा या हम जैसे लोग। पार्टी में ही हैं ना, क्या आपका फर्ज नहीं बनता कि आप ही गले लगा लो? अब अहंकार से काम नहीं चलेगा। मैं कोई दल-बदलू नहीं हूं। गैरों को गले लगा रहे हो।

Q. क्या मोदी लहर अभी भी वैसी ही है जैसी 2014 में थी?
A. लहर अभी नहीं है। फिर भी एक बात कहूंगा, सारे नेताओं में मोदी से बढ़िया ऑरेटर, संपूर्ण व्यक्तित्व और उनसे बड़ा कैंपेनर कोई नहीं है देश में। इरादे भले नेक हों पर वादों पर खरे नहीं उतर पाए।

Q. आप अपनी बात पार्टी फोरम पर क्यों नहीं कहते हैं?
A. पार्टी फोरम ही नहीं मिल रहा है। कई बार लगता है कि पार्टी फोरम पर बोलें। मैं राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य हूं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग जब हुई है, तो मैं गया हूं। इलाहाबाद भी गया था। अब तो मीटिंग शाम को शुरू होती है और दूसरे दिन लंच के बाद खत्म। आप बोल ही नहीं पाते। वो जो कहना चाहते हैं, वो सुन लो।

Q. तेजस्वी यादव की आपने तारीफ की थी, इससे आपके आरजेडी में जाने की चर्चा है, इफ्तार पार्टी में टिकट के रूप में आपको ईदी भी देनी चाही। क्या कहेंगे?
A. वो तो हमेशा पार्टी में आने का कहते हैं। मीसा ने तो यहां तक कहा कि जहां से चाहें, वहां से लड़ लें। तेजप्रताप भी मुझे प्यारा लगता है। तेज-तेजस्वी दोनों तेजी से मैच्योर हो रहे हैं। तेजस्वी में लोगों को रोल मॉडल और भविष्य दिखता है। मैं झूठ क्यों बोलूं, लालूजी ने भी कहा है कि आप ही गार्जियन हो।

Q. आप किसके साथ हैं, भाजपा , राजद, आप पार्टी, यशवंत सिन्हा या किसी के साथ नहीं?
A. शुरू से भाजपा का दमदार उम्मीदवार हूं। इसके बावजूद सबसे पहले मेरी कर्तव्य परायणता और जिम्मेदारी भारत की जनता के प्रति है। मैं नानाजी देशमुख, अटल बिहारी वाजपेयी, रामनाथ गोयनकाजी और जयप्रकाश नारायणजी से प्रभावित होकर राजनीति में आया। एक और नाम है जिन्होंने मुझे राजनीतिक जीवन में एंट्री करवाई, कांग्रेस के बड़े नेता सुबोधकांत सहाय। उन्होंने मुझे बिहार बनाओ और बिहार बचाओ आंदोलन के जरिए सार्वजनिक जीवन में उतारा। मैं स्वस्थ्य राजनीति की ओर आया था। निस्वार्थ राजनीति के लिए आया था, क्योंकि मैं जानता था कि सत्ता हासिल हो तो वह सेवा का माध्यम होना चाहिए, मेवा का नहीं। आज अधिकांश लोगों के लिए यह मेवा का माध्यम बन गई है।

Q. आपकी पार्टी में भी, यह मेवा का माध्यम बनती जा रही है?
A. डिग्री या कम ज्यादा का फर्क हो सकता है, लेकिन कोई भी पार्टी अछूती नहीं है।

Q. भाजपा में लोग दबी जुबान आरोप लगाते हैं कि विवाद पैदा करना अापकी आदत में शुमार हो गया है?
A. कभी कारण भी तो पूछना चाहिए पार्टी को। क्या अनुभवी नहीं हूं, परिपक्व नहीं हूं, लोकप्रिय नहीं हूं, क्या छवि खराब है, क्या आरोप है? आप बिल्ली को ही कमरे में बंद कर दें और रास्ता ना दें, तो वह झपट्‌टा तो मारेगी। मेरी तुलना तो लोग शेर से करते हैं। मैं स्तुतिगान नहीं कर सकता।

Q. आप मोदी सरकार की मुखालफत क्यों करने लगे?
A. मैं सरकार का नहीं, सिस्टम का आलाेचक हूं। मेरी ट्रेनिंग भाजपा में ही हुई है। अटलजी ने भी तो राजधर्म का पाठ पढ़ाया था। मैं कोशिश करता हूं कि पाठ नहीं पढ़ाऊंगा, इतना बड़ा नहीं हूं। लेकिन दर्पण दिखाऊंगा। नोटबंदी या जीएसटी की मैंने बुराई की तो कौन सी पार्टी छोड़ दी? नहीं मान रहे, लेकिन हम जो कह रहे हैं, आज दुनिया मान रही है।

Q. राजनीति और फिल्म इंडस्ट्री में आपसे जूनियर स्मृति ईरानी और बाबुल सुप्रियो मंत्री हैं, आप नहीं। क्या इससे बुरा लगता है?
A. अब नहीं लगता। जो बात आपसे कह रहा हूं वही बात मैंने मोदीजी को भी कही थी। आपका विशेषाधिकार है, आपने मंत्री नहीं बनाया, कोई बात नहीं। मैं इन चीजों से ऊपर निकल चुका हूं, राजनीति में इसलिए नहीं आया था कि मंत्री बनूंगा। मैं जीवन में ढंग का संतरी बन जाऊं यही मेरी बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन मेरे प्रशंसकों को, समर्थकों को, हमारे रिश्तेदारों को, वोटर्स को लगता है कि क्या कसूर था? क्या इसलिए कि ये आडवाणीजी के करीब रहे, उन्हें फ्रेंड, फिलॉस्फर, लीडर और गुरु मानते रहे?

Q. मोदी सरकार और वाजपेयी सरकार में क्या फर्क है?
A. ये सरकार सोलो डिसीजन की सरकार दिखती है। वन-मैन शो और टू-मेन आर्मी। अटलजी की सरकार कलेक्टिव डिसीजन की सरकार थी।

Q. भाजपा में एक अघोषित मापदंड उम्र को लेकर बनाया गया है कि 75 पार वाले मंत्री नहीं होंगे और इस बार शायद चुनाव में टिकट भी नहीं दिया जाए, आपकी क्या राय है?
A. उम्र कोई मापदंड नहीं हो सकती है। यह गलत है, मूर्खता है। राम जेठमलानी 95 वर्ष के हैं, लेकिन 40 साल के व्यक्ति से बेहतर हैं। आडवाणीजी 90 वर्ष से अधिक के हैं, पर 40 वर्ष के व्यक्ति से भी अधिक सक्रिय हैं। आप दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर क्यों फेंक रहे हैं।

Q. विवादों के बावजूद बीजेपी राज्यों में तो चुनाव जीत रही है?
A. जीतती जा रही थी। भगवान करे आगे भी जीते। यूपी में जीते, लेकिन ईवीएम पर सवाल उठे। सूरत में जहां सबसे ज्यादा हंगामा हुआ, वहां भी 16 में से 15 सीटें जीत गए। फिर हम ऐसा मौका क्यों देते हैं? ऐसा क्यों हुआ कि सुप्रीम कोर्ट के जज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गए?

Q. मोदी सरकार की बड़ी नाकामियां क्या मानते हैं?
A. क्या बात है कि दलित तबका हमारे खिलाफ है? क्या बात है कि देश का किसान आत्महत्या करने को विवश हैं? नौजवानों को दो करोड़ नौकरी देने की बात थी तो कहां है नौकरी? बाहर घूमकर आए, झूला झूल लिए अच्छी बात है, लेकिन रिजल्ट क्या मिला देश को? क्या देश में करोड़ों डॉलर आए? ऐसी कोई तकनीक, हवाई जहाज या एयरफोर्स की चीज आई, जिसकी आवश्यकता हैै? पहले घर की महिलाएं अच्छी नीयत से छुपा कर पैसा रखती थीं। जोड़कर देखें तो नोटबंदी से करोड़ों लोगों को दुख पहुंचा। हम बोलते हैं तो कहते हैं कि पार्टी का डिसीजन था। अगर पार्टी का डिसीजन होता तो आडवाणीजी को मालूम होता, मुरली मनोहर जोशी को मालूम होता, यशवंत सिन्हा को मालूम होता, किसी को मालूम नहीं। इसीलिए कहते हैं कि लोकशाही में तानाशाही दिखती है तो दर्द होता है।

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