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श्रीधर ने 66 साल बाद काटे नाखून, 5 सवाल नाखून से जुड़े जिनके जवाब आप जरूर जानना चाहेंगे

नाखून चबाने की आदत को आॅन्कोफेजिया कहते हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 13, 2018, 01:40 PM IST

श्रीधर ने 66 साल बाद काटे नाखून, 5 सवाल नाखून से जुड़े जिनके जवाब आप जरूर जानना चाहेंगे
  • नाखून पर व्हाइट स्पॉट होने के कई कारण हो सकते हैं
  • नेल बाइटिंग एक तरह का यह एक बिहेवियर डिसआॅर्डर है
  • नाखून और बाल दोनों ही किरेटिन से बने होते हैं जो एक तरह का प्रोटीन है

हेल्थ डेस्क.गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने श्रीधर चिल्लाल (82) ने 66 वर्षों के बाद अपने कटवा दिए हैं। इन्हें अमरीका में न्यूयॉर्क के रिप्लीज़ बिलीव इट ऑर नॉट म्यूज़ियम में रखा गया है। उनके अंगूठे का नाखून 197.8 सेमी लंबा था। श्रीधर ने 16 वर्ष की उम्र से ही नाखून बढ़ाना शुरु कर दिया था। एक बार उनके टीचर ने उनसे कहा कि वो तब तक नाखून बढ़ाने का दर्द नहीं समझ पाएंगे जब तक वो खुद से नाखून नहीं बढ़ाते। यही बात श्रीधर के घर कर गई और उन्होंने नाखून बढ़ाना शुरु कर दिया। नाखून से जुड़े कई सवाल अक्सर जेहन में आते हैं जैसे इन पर मौजूद वाइट स्पॉट क्यों पड़ते हैं, इससे सेहत का हाल कैसे मिलता है, ये किस पदार्थ से बने होते हैं। जानते हैं ऐसे ही 5 सवालों के जवाब...


1. नाखून पर व्हाइट स्पॉट का क्या मतलब है?
ज्यादातर लोग समझते हैं कि नाखून पर व्हाइट स्पॉट का मतलब शरीर में ​कैल्शियम या जिंक की कमी होना है, यह पूरी तरह से सच नहीं है क्योंकि हर स्थिति में ऐसा नहीं होता है। कुछ मामलों में ल्यूकीमिया के कारण भी ऐसा होता है। अन्य कारणों में एलर्जी, फंगल इंफेक्शन और नेल इंजरी शामिल है।

2. नाखून किस पदार्थ से बने होते हैं?
नाखून और बाल दोनों ही किरेटिन से बने होते हैं। किरेटिन एक तरह का प्रोटीन है। जिसकी ग्रोथ के लिए शरीर में हेल्दी आॅयल्स और फैट होना जरूरी है। इसके अलावा बालों और नाखून की ग्रोथ के लिए फल और सब्जियां लें ताकि जरूरी विटामिंस, प्रोटीन, मिनिरल्स, एंटीआॅक्सीडेंट्स मिल सकें। इससे ग्रोथ के साथ चमक भी बढ़ती है।

3. नाखून चबाने की आदत क्यों पड़ती है?
इसका सटीक कारण अब तक नहीं पता चल सका है। वेबएमडी की रिपोर्ट के अनुसार नाखून चबाने की आदत 10 साल से 30 साल तक की उम्र वालों में देखी जाती है। इससे सीधे तौर पर कोई गंभीर ​बीमारी तो नहीं लेकिन संक्रमण हो सकता है जो आगे चलकर प्रभावित कर सकता है। इसे मेडिकल भाषा में आॅन्कोफेजिया कहते हैं। यह एक बिहेवियर डिसआॅर्डर है। जो आनुवांशिक भी होता है। कई ​अध्ययनों के मुताबिक एंजायटी की स्थिति में भी कुछ लोगों को नाखून चबाते हुए देखा जाता है।

4. नाखून का रंग देखकर सेहत का हाल कैसे पता करते हैं?
रंग के आधार पर कई बीमारियों का संकेत मिलता है। जैसे नाखून का रंग हल्का पीला है तो यह एनीनिया (आयरन की कमी), लिवर प्रॉब्लम्स और कुपोषण की ओर इशारा है। अगर नाखून ऊपर से नीचे तक सफेद है तो यह हिपेटाइटिस का लक्षण हो सकता है। नाखूनों का नीला शरीर में आॅक्सीजन की कमी को बताता है यह फेफड़ों से जुड़ी समस्या का एक लक्षण है। गहरा पीला रंग फंगल इंफेक्शन का बताता है। इसके अलावा इसकी सतह पर बारीक से गड्ढे हैं तो यह सोरायसिस और इंफ्लेमेट्री आर्थराइटिस की ओर इशारा करते हैं। कई बार नाखून टूटने लगते हैं ऐसा फंगल इंफेक्शन की वजह से भी होता है।

5. नाखून बढ़ते क्यों हैं जबकि ये डेड होते हैं?
नाखून बढ़ते रहते हैं इसलिए इसे डेड नहीं कहा जा सकता है। इसकी ग्रोथ के लिए ब्लड सर्कुलेशन, शरीर में आॅक्सीजन की पूर्ति और पोषक तत्वों का होना जरूरी है। इसलिए कभी भी नाखून के रंग में बदलाव लंबे समय तक दिखाई दें तो चर्म रोग विशेषज्ञ से राय जरूर लें।

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