श्रीमद्भागवत एक ज्ञान यज्ञ, जीवन को बना देता है रसमय, इसमें भगवन कृ़ष्ण की अदभुत लीलाओं का वर्णन भी-राधेशनंदन

Panchkula Bhaskar News - श्रीमद्भागवत एक ज्ञान यज्ञ है, यह मानवीय जीवन को रसमय बना देता है, भगवन कृ़ष्ण की अदभुत लीलाओं का वर्णन इसमें...

Bhaskar News Network

Aug 19, 2019, 07:25 AM IST
Panchkula News - shrimad bhagwat is a knowledge sacrifice makes life beautiful in it also describes the amazing pastimes of lord krishna radheshanandan
श्रीमद्भागवत एक ज्ञान यज्ञ है, यह मानवीय जीवन को रसमय बना देता है, भगवन कृ़ष्ण की अदभुत लीलाओं का वर्णन इसमें समाहित है। यह कहना है स्वामी हरिदास राधेशनन्दन जू का, जिन्होंने बताया कि भव-सागर से पार पाने के लिए श्रीमद्भागवत कथा एक सुन्दर सेतु है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से जीवन धन्य-धन्य हो जाता है। इस पुराण में 12 स्कन्ध एवं 335 अध्याय हैं। ब्यास जी ने 17 पुराणों की रचना कर ली लेकिन श्रीमद्भागवत कथा लिखने पर ही उन्हें सन्तोष हुआ। फिर ब्यास जी ने अपने पुत्र शुकदेव जी को श्रीमद्भागवत पढ़ाई, तब शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को जिन्हें सात दिन में मरने का श्राप मिला, उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की कथा सुनायी। जिससे राजा परीक्षित को सात दिन में मोक्ष की प्राप्ति हुई। दरअसल, ठाकुर रमण विहारी ट्रस्ट और राणा परिवार की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का आसयोजन किया गया। कथा के पहले दिन स्वामी हरिदास राधेशनन्दन जू ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का वक्ता विद्वान ब्राह्मण, शास्त्रज्ञ, देवभक्त, निर्लोभी, आचारवान, संयमी, एवं संशय निवारण में समर्थ होना चाहिये। उसे शास्त्रों एवं वेदों का सम्यक् ज्ञान होना चाहिये। श्रीमद्भागवत कथा में सभी ब्राह्मण सदाचारी हों और सुन्दर आचरण वाले हों। वो सन्ध्या बन्धन एवं प्रतिदिन गायत्री जाप करते हों। ब्राह्मण एवं यजमान दोनों ही सात दिनों तक उपवास रखें। केवल एक समय ही भोजन करें। भोजन शुद्ध शाकाहारी होना चाहिये। स्वास्थ्य ठीक न हो तो भोजन कर सकते हैं। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य को आत्मज्ञान होता है। भगवान की दिव्य लीलाओं को सुनकर मनुष्य अपने ऊपर परमात्मा की विशेष अनुकम्पा का अनुभव करता है। श्रीमद्भागवत कथा करने से मनुष्य अपने सुन्दर भाग्य का निर्माण शुरू कर देता है। वह ईह लोक में सभी प्रकार के भोगों को भोग कर परलोक में भी श्रेष्ठता को प्राप्त करता है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीना सिखाती है तथा मृत्यु के भय से दूर करती है एवं पितर दोषों को शान्त करती है।

जिस व्यक्ति ने जीवन में कोई सत्कर्म न किया हो, सदैव दुराचार में लिप्त रहा हो, क्रोध रूपी अग्नि में जो हमेशा जलता रहा हो, जो व्यभिचारी हो गया हो, परस्त्रीगामी हो गया हो, यदि वह व्यक्ति भी श्रीमद्भागवत की कथा करवायें तो वह भी पापों से मुक्त हो जाता है।

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