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डाउनलोड करेंनई दिल्ली/चंडीगढ़. 1988 में पटियाला रोड रेज मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में आरोपी पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के वकील आरएस चीमा ने सिद्धू को हत्या का दोषी बताए जाने का विरोध किया। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि उक्त फैसला एक ओपिनियन पर आधारित था, मेडिकल सबूतों पर नहीं। मेडिकल सबूतों में काफी विरोधाभास है। सिद्धू के खिलाफ गवाहों ने भी अलग-अलग बयान दिए हैं।
जांच के लिए बनाए गए 6 सदस्यीय बोर्ड को गवाह नहीं बनाया- दलील
सिद्धू के वकील चीमा ने केस के 3 गवाहों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अलग अलग बातें कहीं हैं। मौत के कारणों की जांच के लिए जो 6 सदस्यीय बोर्ड बनाया गया था। उनको गवाह नहीं बनाया गया। कोर्ट मामले में बुधवार को भी सुनवाई जारी रखेगा।
झगड़े में हुई थी बुजुर्ग की मौत
- 1988 में सिद्धू की पटियाला में गुरनाम से हाथापाई हो गई। बाद में गुरनाम की मौत हो गई। पुलिस ने सिद्धू और उनके दोस्त के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
- 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू और रुपिंदर को दोषी करार दिया। 3 साल की सजा हुई थी। तब सिद्धू भाजपा के सांसद थे।
पंजाब सरकार ने अपने ही मंत्री सिद्धू की सजा का किया समर्थन
- पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने ही कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ रोड रेज और गैर-इरादतन हत्या के मामले में हाईकोर्ट के तीन साल की सजा बरकरार रखने का समर्थन किया है। - पंजाब सरकार के वकील सरनाम सिंह सरोन ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस मामले में शामिल होने से इनकार करने वाला सिद्धू का बयान गलत है और मामले में एक चश्मदीद है, जिस पर भरोसा किया जाना चाहिए।
ट्रायल कोर्ट से बरी हो चुके हैं सिद्धू
- 1988 में पटियाला में रोड रेज के दौरान सिद्धू से झगड़े के बाद गुरनाम सिंह की मौत के मामले में 2006 में हाईकोर्ट से सिद्धू और एक अन्य आरोपी रुपिंदर सिंह संधू को 3 साल की सजा मिली थी। इसके खिलाफ सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में दोनों को दोषी ठहराने के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिससे सिद्धू अमृतसर से चुनाव लड़ सके थे। हालांकि, इससे पहले 1999 में ट्रायल कोर्ट से सिद्धू सहित दोनों आरोपी बरी हो गए थे।
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