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मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पुरुष प्रधान देश भारत में महिला पुरुष की बराबरी हर क्षेत्र में करने का प्रयास कर रही है. पर इसी देश में ऐसा भी वर्ग है जिसे समाज में सिर्फ तिरस्कार ही मिला है.
भारत में करीबन चार लाख नब्बे हज़ार किन्नर हैं जिन्हें रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में कई तकलीफें झेलनी पड़ती हैं. इनका गुज़ारा सड़क पर भीख मांगकर या शादियों में नाच कर होता है.
आमिर खान के शो सत्यमेव जयते ने इस वर्ग की पीड़ा और संघर्ष को लोगों के समक्ष रखा. इस वर्ग के कई लोग अब अलग अलग व्यवसाय में हाथ आज़मा रहे हैं.
मुंबई की सड़कों पर अब जल्द ही ट्रांसजेंडर टैक्सी चलेगी जिसमें सारे चालक किन्नर होंगे.
इसी तरह से शादियों और सड़को में गाने बजाने वाले 6 किन्नरों को मौका मिला है भारत का पहला ट्रांसजेंडर बैंड का हिस्सा बनने का. अब तक सिर्फ मज़ाक और हास्य के लिए फ़िल्मों में दिखने वाले किन्नर को यशराज फ़िल्म्स के वाय फ़िल्म ने भारत का पहला किन्नर बैंड \"सिक्स पैक\" शुरु किया है.
करीबन 200 किन्नर के ऑडिशन के बाद 6 किन्नरों को चुना गया.
फिलहाल इस बैंड के दो गाने रिलीज़ हो चुके है- पहला विदेशी सिंगर फेर्रेल विलियम के गाने \"हैप्पी\" का कवर गाना है और दूसरा इस बैंड ने सोनू निगम के साथ \"रब के बन्दे\" गाया है.
गाने के संगीतकार समीर टंडन है.
इस बैंड की सदस्य है चाँदनी गुरु, कोमल, आशा, रवीना, भाविका और फ़िदा खान.
छाछ बेचने वाले की बेटी चाँदनी गुरु ने सातवी कक्षा में अपने साथी छात्रों के तानों से तंग आकर स्कूल छोड़ दिया और घर पर बैठकर पूजा पाठ करना शुरू किया.
घर के खर्चे चलाने के लिए चाँदनी गुरु ने माता के जगराता में गाना शुरू किया और कमाना शुरू किया. चाँदनी गुरु को किन्नर होने में कोई अफ़सोस नहीं है पर उन्हें उम्मीद है की इस बैंड की सफलता से लोगो के नज़रिये में बदलाव आएगा.
वो कहते हैं, \"मेरा बचपन खो गया था. ज़िन्दगी से बहुत डर लगता था. लोगो ने इतने ताने मारे हैं की अब कोई फ़र्क नहीं पड़ता.\"
यशराज की मदद से बने किन्नरों के म्यूज़िक बैंड \'सिक्स पैक\' का हिस्सा बनी रवीना इस बैंड के बन जाने को अभी भी एक सपना मानती हैं.
वो कहती हैं,\"दूसरों से अलग होने के कारण मुझे ताने सुनने पड़ते थे और इन्हीं तानोें से तंग आकर मैंने 12 साल की उम्र में घर छोड़ दिया.\"
बैंड की दूसरी सदस्य हैं भाविका, जिन्हें नर्स की नौकरी मिली लेकिन समाज में जगह नहीं.
भाविका ने बीबीसी को बताया,\"मैं पढ़ी लिखी हूं और नर्सिंग का कोर्स करने के बाद मुझे एक अस्पताल में काम भी मिला था लेकिन किन्नर होने के चलते मुझे कम पैसे दिए जाते और ज्यादा पैसे मांगने पर पहचान उजागर करने की धमकी मिलती.\"
वो आगे कहती हैं,\"छोटी उम्र में ही मुझे पता चल गया था की मैं सामान्य नहीं हूँ. पर मैं अपने लिए सामान्य नौकरी चाहती थी. मैंने नर्सिंग का कोर्स किया और कई अस्पतालों में कभी लड़के के अवतार में, तो कभी लड़की के अवतार में काम किया. लेकिन किसान पिता की आय और मां की बीमारी के चलते नर्सिंग के पेशे से घर नहीं चल सकता था.\"
ग्रेजुएट भाविका ने टीवी और सिनेमा में किन्नर की भूमिका में पिछले चार सालों से काम शुरु किया है और \'सिक्स पैक\' उनके लिए किसी जीवनदान जैसा है.
सिक्स पैक बैंड को बनाने में बड़ा हाथ है यशराज फ़िल्म्स का.
गायक सोनू निगम को इस बैंड का गाईड बनाते हुए, बीते साल यशराज फिल्म्स ने पूरी तरह से किन्नरों के बैंड को अपने बैनर तले लांच किया.
बैंड की एक और सदस्य आशा कहती हैं, \"हमारा वर्ग हमेशा से ही मज़ाक का विषय रहा है और जब इस बैंड की बात सामने आई, मुझे लगा कोई फिर से मज़ाक कर रहा है.\"
वो आगे कहते हैं,\" मुझे लगा था कि हम हिजड़ो पर कौन ध्यान देता है, लेकिन आज जब ये बैंड सामने आया है, यकीन मानिए मैने अपने अंदर सम्मान अनुभव किया और अब मैं इस बैंड से हमेशा के लिए जुड़े रहना चाहती हूँ.\"
सोनू निगम कहते हैं,\"टैलेंट किसी में भी हो सकता है, इसके लिए लड़का या लड़की होना ज़रुरी नहीं है. सिक्स पैक बैंड के सदस्य टैलेंट में किसी से कम नहीं हैं और इनकी एल्बम के सामने आते ही ये बात साबित भी हो जाएगी.\"
बैंड की सदस्य कोमल कहती हैं,\"परिवार ने तो मुझे निकाल दिया था, मुझे शौक नहीं है कि मैं सिग्नल पर भीख मांगूं या शादियों में नाचूँ और ताली बजाउं, लेकिन यही मेरी मज़बूरी थी क्योंकि कोई हमें मुंह भी नहीं लगाता.\"
वो थोड़े आक्रोश में कहती हैं, \"हमारे किन्नर समाज में कितने पढ़े लिखे लोग हैं, लेकिन काम के अभाव में वो भी सिग्नल पर भीख मांग रहे हैं. हमें छक्का, हिजड़ा, सिक्सर और भी कई नामों से बुलाया जाता है. जब जॉब मांगने जाते हैं तो लोग कहते हैं, रोड पर जा कर ताली बजा!\"
कोमल कहती हैं कि जिस कंपनी ने उन्हें सम्मान से जीने का हक़ दिलाया है, वो भले ही उनके नाम से कुछ मुनाफ़ा कमा रही हो लेकिन उनके लिए वो भगवान है.
हाल ही में किन्नरों को लेकर राष्ट्रगान का वीडियो भी बनाया गया था और सिक्स पैक बैंड के सभी सदस्य इस तरह के प्रयासों को किन्नर समाज के लिए एक बड़ी राहत मानते हैं.
भाविका कहती हैं,\"आप नहीं समझ सकते कि यह हमारे लिए कितनी बड़ी बात है, क्योंकि आप हाशिए पर नहीं है, आपके साथ आईडेंटिटी क्राईसिस नहीं है. आप लिंग भेद का शिकार नहीं हैं, आप नहीं समझ सकते.\"
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