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डाउनलोड करेंनींद की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है
शोधकर्ताओं का कहना है कि नींद पूरी नहीं होने से स्कूल में छात्रों का प्रदर्शन प्रभावित होता है.
खासकर धनी देशों में ये समस्या ज़्यादा है. विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल और कम्प्यूटर का इस्तेमाल इसका मुख्य कारण है.
अध्ययन से पता चला है कि नींद पूरी नहीं होना गंभीर मामला है.
कक्षा में ऊंघ रहे छात्रों के कारण दूसरे छात्रों को भी परेशानी होती है और पढ़ाई की रफ्तार थम जाती है.
बॉस्टन कॉलेज ने इस संबंध में दुनियाभर से आंकड़े जुटाए और फिर इनकी आपस में तुलना की.
इसमें पाया गया कि नींद से वंचित छात्रों की सबसे ज्यादा संख्या अमरीका में है.
सोना ज़रूरी हैशिक्षकों के मुताबिक नौ और दस साल के 73 प्रतिशत तथा 13 और 14 साल के 80 प्रतिशत छात्र कम नींद की समस्या से जूझ रहे हैं.
ये अंतरराष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 47 प्रतिशत प्राथमिक छात्रों को और 57 प्रतिशत माध्यमिक छात्रों को और अधिक नींद की जरूरत है.
न्यूजीलैंड, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, आयरलैंड और फ्रांस जैसे देशों में भी नींद से वंचित छात्रों का आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय औसत से अधिक है.
फिनलैंड भी उन देशों में भी शामिल है जहां बच्चे अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते.
दूसरी तरफ अजरबैजान, कजाक़स्तान, पुर्तगाल, चेक गणराज्य, जापान और माल्टा ऐसे देश हैं जिनका रिकॉर्ड इस मामले में बहुत अच्छा है.
यानी इन देशों में बच्चे भरपूर नींद लेते हैं.
मस्तिष्क की कार्यप्रणालीये विश्लेषण वैश्विक शैक्षिक रैंकिंग के लिए जुटाए गए आंकड़े का एक हिस्सा है.
इसके तहत 50 से भी अधिक देशों में नौ लाख से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक छात्रों का टेस्ट लिया गया.
नींद नहीं आने से आपके सीखने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं.
सर्रे विश्वविद्यालय के निद्रा शोध केन्द्र के निदेशक डर्क जान डिज्क ने कहा, \"नींद पूरी नहीं होने से सीखने, याद रखने और पढ़ने-लिखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.\"
नींद नहीं आने और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को लेकर हुए शोध से ये बात साबित हुई है कि याददाश्त के लिए नींद बेहद जरूरी है.
उनींदी स्थिति में दिमाग को चीजों को ग्रहण करने और याद रखने में परेशानी होती है.
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