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डाउनलोड करेंतुषार बनर्जी
बीबीसी संवाददाता
बड़े शहरों पर जनसंख्या का भार कम करने और छोटे शहरों को पहली कतार में आगे लाने के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी मसौदा तैयार किया है.
भारत में स्मार्ट सिटी बनाने की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचारों के वक्त से ही करते आए हैं.
सरकार ने बजट में इसके लिए 7060 करोड़ रूपए का प्रावधान भी किया है.
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार आबादी के अनुसार स्मार्ट सिटी का निर्धारण किया जा रहा है.
(\'स्मार्ट सिटीज़\' पर बीबीसी हिन्दी की विशेष सिरीज़)
40 लाख तक की आबादी वाले शहर स्मार्ट सिटी के लिए पहली पसंद हैं, जबकि इससे बड़े शहरों के साथ सैटेलाइट शहरों को स्मार्ट बनाने की योजना है.
वाराणसी, बोधगया और अमृतसर जैसे कई धार्मिक शहरों को भी ‘स्मार्ट’ बनाए जानी की योजना है.
स्मार्ट सिटी में खासस्मार्ट सिटी कैसा हो, इसका मसौदा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने सार्वजनिक किया है. आइए एक नज़र डालते हैं कुछ अहम सुझावों पर:
देश के सौ स्मार्ट शहरों में 24 घंटे बिजली और पानी की उपलब्धता. ऐसा ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाए जाने की योजना है, जिससे 30 से 45 मिनट में शहर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक की दूरी तय की जा सके. हर घर से अधिकतम 800 मीटर की दूरी पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध हो. इन शहरों में स्मार्ट हेल्थकेयर सेवाओं और सरकारी कार्यों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम उपलब्ध हो. स्मार्ट सीवेज-कूड़ा निस्तारण प्रणाली का इंतजाम. सरकारी कामकाज को पारदर्शी रखने की योजना है ताकी निवेशकों में भरोसा जगे और व्यापार और रोज़ग़ार के मौके बढ़े. स्मार्ट शहरों में स्मार्ट शिक्षा का प्रबंधआईटी नेटवर्क से जुड़े इन शहरों में जनप्रबंधन के लिए ज्यादा से ज्यादा तकनीक के प्रयोग की योजना है. कैसे आगे बढ़ रही है योजनाख़बरों के मुताबिक राज्य सरकारों ने इस परियोजना की रिपोर्ट बनाने के लिए केंद्र से तकनीकी मदद और इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए वित्तीय सहायता मांगी है.
राज्यों का मत है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए मूल निवेश सरकार करे और उसे सुचारू ढंग से चलाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप के विकल्पों को तलाशा जाए.
शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने राज्यों के सुझावों पर विचार के लिए अधिकारियों को ज़रूरी निर्देश दिए हैं.
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