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छोटे कारोबारी दिवालिया होने पर कर्ज ले सकेंगे, जेल भी नहीं जाना पड़ेगा; कानून में जुड़ सकता है प्रावधान

सरकार दिलालिया कानून में अक्टूबर तक नया प्रावधान जोड़ सकती है

Dainik Bhaskar

Jul 19, 2018, 10:15 AM IST
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- 5 लाख से ज्यादा छोटे कारोबारियों को फायदा होने की उम्मीद

- पोंजी स्कीम पर रोक के लिए बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स बिल पेश

नई दिल्ली. प्रोपराइटरशिप एवं पार्टनरशिप के तहत चलने वाली छोटी फर्म के मालिकों को अब दिवालिया होने पर जेल नहीं जाना होगा। उन्हें कारोबार फिर शुरू करने के लिए कर्ज भी दिया जाएगा। ये फर्में भी इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत खुद को दिवालिया घोषित सकेंगी। अभी सिर्फ बड़ी कंपनियां ही इस कोड के तहत खुद को दिवालिया घोषित कर सकती हैं। सरकार अक्टूबर तक नया प्रावधान जोड़ सकती है। फेडरेशन ऑफ स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज के मुताबिक इससे 5 लाख से ज्यादा छोटे उद्यमियों को फायदा हो सकता है। कंपनी मामलों के मंत्रालय इसके लिए फरवरी में कमेटी बनाई थी। इसके सदस्य अनिल भारद्वाज ने बताया कि छोटे उद्यमी डिफॉल्टर होते हैं तो विभिन्न एजेंसियां उन पर अलग-अलग मुकदमे कर देती हैं। नए प्रावधान में ये उद्यमी तय एजेंसी के समक्ष मामला रखेंगे, सिर्फ वही एजेंसी पूरा मामला देखेगी। बड़ी कंपनियों के मामले इनसॉल्वेंसी बोर्ड में चलते हैं, छोटी कंपनियों के मामले डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल में चलेंगे।

पोंजी स्कीम पर रोक के लिए बिल : देश में अवैध निवेश योजनाओं (पोंजी स्कीम्स) के जरिए आम जनता से पैसा जुटाने वालों पर अंकुश के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में विधेयक पेश किया। इसमें पाेंजी स्कीम चलाने वालों पर 50 करोड़ रुपए जुर्माना और 10 साल तक की कैद का प्रावधान है। वित्त राज्य मंत्री पोन राधाकृष्णन की ओर से पेश किए गए इस विधेयक का नाम बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स बिल 2018 है। इसमें जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने में विफल रहने वाली कंपनियों पर दंड लगाने और उनकी संपत्ति अटैच करने का प्रावधान है।

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