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स्नेक बाइट का शिकार हुई 5 साल की बच्ची, सांप को भी बोतल में अस्पताल ले आए परिजन

3 वर्ष पहले
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जालंधर.  सिविल अस्पताल में सोमवार रात उस समय हलचल मच गई, जब कुछ लोग स्नेक बाइट की शिकार 5 साल की बच्ची के साथ सांप को भी बोतल में डाल कर अस्पताल ले आए। डॉक्टरों को बच्ची में जहर के लक्षण नहीं मिले, फिर भी उसे ट्रामा वार्ड में भर्ती कर लिया। बच्ची को अटेंड करने वाली स्टाफ नर्स ने बताया कि रात लगभग 10 बजे बस्ती दानिशमंदा की रहने वाली महक को अस्पताल लाया गया।

 

 

 

नहीं मिला डसने का निशान

सिविल अस्पताल के स्टाफ के मुताबिक जब बच्ची को परिजन अस्पताल लेकर आए तो वे घबराए हुए थे और बोतल में सांप भी साथ लेकर लाए थे। हालांकि, अस्पताल स्टाफ को बच्ची के शरीर पर सांप के डसने का कोई निशान दिखाई नहीं दिया। जहर के असर का कोई लक्षण दिखाई नहीं दिया तो जहर रोधी टीका नहीं लगाया गया। बाद में बच्ची को छुट्टी दे दी गई।

 

सांप न लाएं अस्पताल : डॉ. बावा

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. केएस बावा ने बताया कि सिविल अस्पताल में मौजूद इंजेक्शन में पंजाब के सभी जहरीले सांपों से लड़ने की क्षमता है। इसीलिए इसे पॉलीवेलेंट एंटी वेनम इंजेक्शन कहा जाता है। इसमें क्रेट, कोबरा और दो तरह से वाइपर सांपों के जहर को काटने वाली दवा होती है। स्नेक बाइट के शिकार व्यक्ति के परिजन अपने साथ सांप लेकर न आएं। इससे स्टाफ नर्स और डॉक्टर असहज हो जाते हैं। उनमें खौफ पैदा हो सकता है। 

 

सांप के डसने से ही डर जाते हैं लोग

दूसरी तरफ जानकारों का कहना है कि कई सांप ऐसे होते हैं, जिनके दांत नहीं होते और लोग उनके डसने की प्रक्रिया से ही डर जाते हैं। इसके अलावा कई सांप डसने के बाद निशान नहीं छोड़ते, इसलिए ऐसे मामलों में एहतियात बरतने की जरूरत रहती है।

 

एक घंटे बाद एक और मामला आया सामने

11 बजे एक और स्नेक बाइट का मामला सामने आ गया। काहनपुर गांव से 29 वर्षीय रविपाल को सांप ने डस लिया था। उसमें भी जहर के लक्षण नजर नहीं आए। उसे जिस जगह सांप ने डसा था, वहां से खून निकल रहा था। इसलिए एहतियात के तौर पर रविपाल को पॉलीवेलेंट एंटी वेनम का एक टीका लगाया गया। कुछ देर बाद उसे भी छुट्टी दे दी।