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SoC ने मोबाइल एप्लिकेशन की घोषणा की

आज के समय में हमारे भारतीय समाज की बड़ी कमी एक परामर्शदाता को देखने की आवश्यकता के लिए स्वीकृति है

Dainik Bhaskar

Oct 03, 2018, 07:04 PM IST
SOC announces mobile application for student counselling

25 सितंबर 2018, मुंबई: स्कूल ऑफ काउंसलिंग (SoC) ने मुंबई में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान अपने 24/7 काउंसलिंग मोबइल ऐप को प्‍लेस्‍टोर पर लॉन्‍च किया। अपने पहले पैन इंडिया काउंसलिंग शिखर सम्मेलन की शुरूआत को चिह्नित करते हुए उन्‍होंने नवी मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की है। इस आयोजित कार्यक्रम में डॉ चेतन विस्पूट, मनोवैज्ञानिक श्री के आर ओन्कर, शिक्षाविद श्रीमती मधु शैलेन्द्र, शिक्षाविद श्री हरि शाही कोच और सलाहकार मौजूद थे। स्कूल ऑफ काउंसलिंग ऐसा उपाय है जिसकी आवश्यकता सभी शैक्षिक संस्थानों को काउंसलिंग को होगी।

SoC संस्‍था भूमिगत रूप से ऐसी शुरूआत कर रही है, जिसमें करियर, बच्‍चों के गुस्‍से, हार-अकेलापन, अवसाद, कॉर्पोरेट योग्यता जैसी समस्‍या को लेकर उनके माता-पिता के मार्गदर्शन में सेवाएं प्रदान करेगी। इसकी ब्रांच दिल्ली, लखनऊ, देहरादून और हैदराबाद जैसे शहरों में है। शिखर सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्‍य लोगों को काउंसलिंग के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ बच्चों और शैक्षिक संस्थान की रोजमर्रा की समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञ पैनल द्वारा समाधान देना है।

आज के समय में हमारे भारतीय समाज की बड़ी कमी एक परामर्शदाता को देखने की आवश्यकता के लिए स्वीकृति है क्योंकि कई मिथ समाज को घेरे हुए है। लोगों का मानना है कि काउंसलिंग सिर्फ मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए होती है। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्‍य लोगों में ये जागरूकता लाने का है जिससे वह जान सकें कि काउंसलिंग केवल मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो अपने मानसिक स्वास्थ्य में सुधार चाहते हैं। काउंसलिंग स्कूल की नींव पायल भारद्वाज ने रखी है और विशेषज्ञ सलाहकारों के साथ भारत में काउंसलिंग को एक नया रूप देने की शुरूआत की है।

काउंसलिंग सेशन के माध्यम से वे बच्चे को उनकी बुद्धि, रुचि, योग्यता और व्यक्तित्व को समझने, चर्चा करने और विकसित करने में मदद करती हैं। स्कूल ऑफ काउंसलिंग (एसओसी) की एमडी, मिस पायल भारद्वाज ने बताया, मेरे लिए काउंसलिंग मानव की संतुष्टि की एक सतत प्रक्रिया है। मैंने कैंसर रोगियों के परिवारों की के साथ-साथ स्‍ट्रगलिंग मॉडल और उभरते कलाकारों की भी काउंसलिंग की। धीरे-धीरे समझा कि यह एक व्यक्तिगत अधिकार है ताकि हमारा आने वाला कल बेहतर हो सके। यह केवल शुरूआती वर्षों में ही संभव है। इसलिए मैंने
केवल छात्रों की ओर ध्यान केंद्रित किया और मेरे लिए हर समय शारीरिक रूप से सलाहकार छात्रों के लिए उपस्थित होना असंभव था, इसलिए मैंने इसकी शुरूआत की।

यह कैसे काम करता है?

पहले दिन: पहले दिन एक संक्षिप्त सत्र में काउंसलिंग के बारे में जानकारी दी जाती है। इस सत्र को ग्रुप काउंसलिंग सत्र के रूप में संबोधित किया जाता है, जिसमें बच्चों की समस्याओं के बारे में बात की जाती है उन समस्याओं के सही वैकल्पिक समाधानों पर चर्चा की जाती है। सत्र आयोजित होने के बाद बच्‍चों की के मल्‍टीपल इंटेलीजेंस और व्यक्तित्व का विश्लेषण करने के लिए उनका टेस्‍ट लिया जाता है।

दूसरा दिन: सत्र के दूसरे दिन यहां बच्‍चों के लिए गए टेस्‍ट रिपोर्ट पर उनके माता-पिता के सामने चर्चा की जाती है। जिसमें बच्‍चों की क्षमता, दिलचस्पी और वे आगे बढ़कर अच्‍छे स्‍कोर कैसे प्राप्त कर सकते हैं पर बात होती है। यह तब होता है जब बच्चा अपनी समस्याओं के बारे में और अधिक खुल कर बात करता है। जिसके बाद तरीकों और सुझावों पर चर्चा की जाती है। उसके बाद बच्चे को करियर के लिए अच्‍छा विकल्प, कॉलेज, एंट्रेंस परीक्षा और अंत में सही लोगों से मिलने की उनकी क्षमता पर बात होती है। जिससे उनका अपना भ‍विष्‍य चुनने में आसानी होती है।

हर तीन महीने में बच्‍चों में हो रहे सुधारों की समीक्षा का आकलन किया जाता है। जिन लोगों को व्यवहार और अवसाद के बारे में शिकायत होती है, उन्‍हें हैं लंबे वक्‍त के लिए अलग से काउंसलिंग सत्र के तहत ट्रीट किया जाता है। और उनकी समस्‍याओं का समाधान खोजा जाता है।

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