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1998 का मामला: जब SONY ने लॉन्च कर दिया था कपड़ों के आरपार देखने वाला कैमरा, भारी विरोध के बाद वापस मंगाने पड़े थे 70 हजार Camera

1998 में जब ये टेक्नोलॉजी लोगों के हाथ लगी तो लोगों के मिक्स रिएक्शन देखने को मिले।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 01:51 PM IST

टोक्यो. दुनियाभर में कंपनियां अपने प्रोडक्ट में खराबी के बाद उसे ग्राहकों से वापस मंगा (रिकॉल) लेती हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि किसी कंपनी को अपने प्रोडक्ट के ऐसे फीचर की वजह से उसे मार्केट से वापस लेना पड़ा, क्योंकि उसका फीचर कुछ ज्यादा ही एडवांस्ड था। जी हां, 1998 में जापान में 'सोनी कंपनी' ने अपने एक कैमकार्डर (हैंडिकैम वीडियो कैमरा) को मार्केट से रिकॉल कराना पड़ा था। इसकी वजह थी इसका विवादित फीचर 'नाइटविजन इन्फ्रारेड टेक्नोलॉजी'। इस फीचर से हैंडीकैम 717 सीरीज का कैमकॉर्डर रात के अंधेरे में आसानी से फोटो खींच लेता था। लेकिन इन्फ्रारेड की वजह से हैंडीकैम ने एक्स-रे कैपेबिलिटीज भी हासिल कर ली थीं। इस वजह से ग्राहक कैमरे से लोगों के कपड़े के आरपार देख सकता था। जब ये बात SONY तक पहुंची तो उसने तकरीबन 70 हजार वीडियो कैमरा रिकॉल करा लिए। कैसे काम करता था इन्फ्रारेड?...

- कैमरे में इन्फ्रारेड की मदद से लोग दूसरे लोगों के कपड़े के आरपार देख सकते थे। या यूं कहें कि कैमरे से देखने पर उन्हें सामने वाला शख्स आंशिक रूप से बिना कपड़ों के दिखता था।
- दअरसल, कुछ चीजें इन्फ्रारेड को अब्जॉर्ब कर लेती थी और उनके पार की चीजें दिखने लग जाती थी। हालांकि हर कपड़े के पार देख पाना आसान नहीं था, लेकिन फिर भी विशेष प्रकार के और पतले कपड़ों जैसे- स्विमसूट में यह इन्फ्रारेड टेक्नोलॉजी काम कर जाती थी।
- अमेरिका के एबीसी न्यूज के मुताबिक, 1998 में जब ये टेक्नोलॉजी लोगों के हाथ लगी तो लोगों के मिक्स रिएक्शन देखने को मिले। हालांकि ज्यादातर लोगों ने इसका विरोध किया था। मीडिया में खबर आने के बाद सोनी ने 717 सीरीज के प्रोडक्ट को रिकॉल करा लिया। न्यूज के मुताबिक, उस समय तकरीबन 70 हजार कैमरा वापस मंगाए गए और इसमें बदलाव करके वापस मार्केट भेजे।


क्या होता है इन्फ्रारेड टेक्नोलॉजी?
- इन्फ्रारेड से पहले हमें रंगों के बारे में समझना हाेगा। दरअसल, जब सूरज की किरण प्रिज्म से होकर निकलती है तो सात रंग बनते हैं। सबसे पहला रंग लाल और अाखिरी रंग बैंगनी होता है। ये रंग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्ज हैं। एक्स-रे मशीन भी एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव है। लेकिन वहीं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्ज दिखती हैं, जिनके प्रति हमारी आंखें संवेदनशील होती हैं।
- लाल से ठीक नीचे वाली वेव्ज इन्फ्रारेड कहलाती हैं। वहीं, बैंगनी से ऊपर वाली वेव्ज को अल्ट्रावॉयलट वेव्ज कहते हैं। ये दोनों ही वेव्ज हमें नहीं दिखती हैं। क्योंकि इनके ठीक पहले ही हमारी आंखों की संवेदनशीलता का स्पेक्ट्रम समाप्त हो जाता है।