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कहां का है यह हवाईज़ादा..

6 वर्ष पहले
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जेसन कैफ़री

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

जॉर्ज मेल की आंखें बचपन से एक ही सपना बुना करतीं- हवा में उड़ान भरने का.

लेकिन पिता की अकाल मौत के बाद उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई और पायलट बनने का सपना भी अधूरा रह गया.

वे पायलट तो न बन सके पर उन्होंने एक हवाईजहाज ज़रूर बना डाला और एक ड्रोन बनाने की तैयारी है.

दक्षिणी सूडान के जूबा शहर में रहने वाले जॉर्ज मेल के काम से दक्षिणी सूडान की सरकार इतनी खुश हुई कि उन्हें सरकारी नौकरी दे दी गई. हालांकि उन्हें अधिकारियों से हवाईजहाज़ का परीक्षण करने की इजाज़त नहीं मिली है.

23 साल के जॉर्ज मेल कहते हैं, "मैं बचपन से ही एयरोनॉटिक इंजीनियर बनने के ख्वाब देखता था."

पढ़ाई छूटी

जॉर्ज बचपन के उस जुनून को याद करते हैं. "जब मैं छोटा था तो हवा में उड़ने की कोशिश करता था. एक बार घर के पर्दे में धातु के दो पंख लगाकर छत पर जा पहुंचा. मगर पंछी की तरह आसमान में उड़ने की कोशिश में मेरी टांग टूट गई."

असफल होने के बावजूद जॉर्ज ने हवाईजहाज़ के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की.

उगांडा हाईस्कूल में पढ़ते हुए 2011 में पिता चल बसे तो फ़ीस के भी लाले पड़ गए. पढ़ाई छोड़कर घर बैठना पड़ा.

मगर उनके सपनों और हौसलों ने हार नहीं मानी. उन्होंने एयरोनॉटिक्स के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ना शुरू किया.

बड़ी मुश्किल से हवाईजहाज़ बनाने का सामान जुटाया. जूबा के मेटल वर्कशाप के सामान से एल्यूमिनियम एयरफ्रेम बनाया और फिर इसे चलाने के लिए बाहर से दो छोटे पेट्रोल इंजन मंगवाए.

घर के पिछले हिस्से में बगीचे की कुर्सी से पायलट की सीट बनाई. हवाई जहाज़ बनाने की सारी जानकारियां इंटरनेट और पुरानी किताबों से इकट्ठा कीं.

गृहयुद्ध

साल 2013 में गंभीर सत्ता संघर्ष के कारण हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा.

2013 के आखिर में दक्षिणी सूडान के दो दिग्गज राजनेताओं के बीच सत्ता संघर्ष चरम पर पहुंच गया और देश में लगभग गृहयुद्ध की स्थिति बन गई.

जूबा के जॉर्ज मेल के घर के इर्द-गिर्द सड़कों-गलियों पर तनाव चरम पर था.

वे बताते हैं, "बहुत सारे लोग हिंसा की आशंका से इलाक़ा छोड़कर चले गए. मगर मैं नहीं हिला. खुद को कमरे में बंद कर प्रोजेक्ट चालू रखा."

नौकरी

दक्षिणी सूडान की अर्थव्यवस्था को अफ्रीका की बेहद पिछड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता है. परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य होने के कारण उन्होंने अपनी गतिविधियां छिपाकर रखीं.

जॉर्ज मेल कहते हैं, "जब भी मैं कोई सामान लाता, तो उसे झाड़ियों में छिपा देता. डर था कि घरवाले कहना शुरू कर देंगे कि मैं फ़ालतू चीज़ों पर पैसे बर्बाद कर रहा हूं."

मगर जब वे अपना काम लेकर दक्षिणी सूडान के वायुसेना दफ़्तर गए तो अधिकारी उनके काम से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत अपने आईटी डिपार्टमेंट में नौकरी दे दी.

मगर अब वे निजी महत्वाकांक्षाओं से हटकर देश के भविष्य के लिए कुछ करना चाहते हैं. उनका अगला क़दम किसानों के लिए एक खाास ड्रोन बनाना है जो पूरे खेत में बीज फैला सके.