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8 साल तक रोजाना एक फैमिली से मिलने आती रही गिलहरी, खिड़की पर देती दस्तक और तब तक बैठी रहती जबतक कोई देख ना ले

एक वर्ष पहले
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साउथ केरोलिना (अमेरिका). शहर में रहने वाले ब्रेंटली हैरिसन और उनकी फैमिली ने एक बेबी गिलहरी की उस वक्त मदद की थी, जब उस पर एक उल्लू ने हमला किया था और वो घायल हालत में उनके घर के बाहर छुपी हुई थी। ये वाकिया साल 2009 का है और उस वक्त बेबी गिलहरी की उम्र मुश्किल से सिर्फ 4 हफ्ते रही होगी। हैरिसन फैमिली ने उसे बचाते हुए उसका इलाज कराया था। हालांकि उस वक्त उन्हें पता नहीं था कि इस मदद के जरिए वो उसके साथ जिंदगी भर का रिश्ता जोड़ रहे हैं।

जुड़ गया अनजाना रिश्ता...

- हैरिसन फैमिली को जब वो गिलहरी मिली थी, तब वो काफी छोटी और घायल हालत में थी। जिसके बाद उन लोगों ने उसे तब तक अपने साथ रखा जब तक कि वो पूरी तरह ठीक नहीं हो गई। उन्होंने उसके खाने पीने का भी पूरा ध्यान रखा। यहां तक कि उन्होंने उसका नाम रखते हुए, उसे 'बेला' कहना शुरू कर दिया।
- कुछ महीनों बाद जब साल 2010 की गर्मियों तक बेला पूरी तरह ठीक हो गई, तो इस फैमिली ने उसे घर के पास ही मौजूद जंगलों में छोड़ दिया। उन्हें लगा था कि अब बेला से शायद दोबारा कभी मुलाकात नहीं होगी। लेकिन उनकी सोच कुछ ही दिनों में गलत साबित हो गई।

घर के मेंबर की तरह हो गई 'बेला'

- अपनी जान बचाने वाली उस फैमिली से कुछ ही दिनों में गिलहरी को इतना ज्यादा लगाव हो गया था कि जंगल में छोड़ने के बाद भी वो उनसे मिलने के लिए आने लगी। बेला रोज उनके घर में आती और तब तक खिड़की पर बैठी रहती, जब तक कि कोई उसे नोटिस ना कर ले। ये सिलसिला अगले 8 सालों तक चलता रहा।
- उस फैमिली के लिए अपनापन देखने से ऐसा लगने लगा जैसे वो गिलहरी उन लोगों को अपना परिवार ही मानती है। यहां तक कि जब वो लोग गार्डन में बैठते थे तो ये भी वहां पहुंचकर उनके साथ खेलने लग जाती। वे उसे उसके फेवरेट सामान खाने के लिए देते थे।

सबसे बड़ी खुशी भी इसी फैमिली के साथ शेयर की

- हमेशा की तरह एक दिन जब बेला उन लोगों के घर पहुंची तो उन्होंने देखा कि उसके पैर में चोट लगी हुई है। जिसके बाद उस फैमिली ने एकबार फिर उसे तब तक अपने साथ रखने का फैसला कर लिया, जब तक कि वो ठीक नहीं हो जाती। वो फैमिली फिर उसकी केयर करने लगी।
- इलाज शुरू होने के कुछ दिन बाद जब एक दिन उस फैमिली ने गिलहरी का हाल जानने के लिए उसके पिंजरे में देखा तो वो हैरान रह गए। पिंजरे के अंदर बेला के साथ तीन छोटी-छोटी गिलहरियां भी मौजूद थीं। बेला ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी और अहम पलों को भी उन्हीं लोगों के साथ शेयर किया।
- अब बेला खुद चाहती थी कि उसके बच्चे उसी घर में पैदा हों या ये घटना संयोग थी, इस बारे में तो कोई नहीं बता सकता। लेकिन उसकी और उसके बच्चों की केयर वहां से अच्छी नहीं हो सकती थी। शायद ये बात वो भी समझती होगी। अपनी नई फैमिली के साथ बेला तब तक वहां रही जब तक कि उसके बच्चे घोंसले में रहने लायक नहीं हो गए।

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