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महाभारत 2019: जाति के आधार पर आरक्षण नहीं चलेगा, विद्रोह हो जाएगा- श्रीश्री रविशंकर

राजनीति, राममंदिर, आरक्षण समेत तमाम मुद्दों पर दैनिक भास्कर दिल्ली के संपादक आनंद पांडेय ने श्रीश्री से खास बातचीत की।

Danik Bhaskar | Jun 21, 2018, 07:30 AM IST
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर बाबाओं-संतों पर निगाह रखने के लिए अलग सरकारी बॉडी की भी वकालत करते हैं।  -फाइल आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर बाबाओं-संतों पर निगाह रखने के लिए अलग सरकारी बॉडी की भी वकालत करते हैं। -फाइल

  • श्रीश्री ने कहा, राममंदिर के मुद्दे पर तो आम जनता को आगे बढ़ना पड़ेगा
  • उन्होंने कहा, जिसे हम सेक्यूलर कहते हैं वही, हिंदू वैल्यूज हैं

नई दिल्ली. आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर मानते हैं कि मोदी सरकार से अपेक्षाएं बहुत ज्यादा थीं। लोगों को लगा था कि सबको नौकरी मिल जाएगी, जो कठिन है। वे बाबाओं-संतों पर निगाह रखने के लिए अलग सरकारी बॉडी की भी वकालत करते हैं। राजनीति, राममंदिर, आरक्षण समेत तमाम मुद्दों पर दैनिक भास्कर दिल्ली के संपादक आनंद पांडेय ने महाभारत 2019 के तहत श्रीश्री से खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने आरक्षण से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि जाति के आधार पर आरक्षण नहीं चलेगा, जो सवर्ण गरीब इसके दायरे से बाहर हैं, उनमें विद्रोह हो जाएगा।

Q. मोदी सरकार को चार साल हो गए हैं, ओवरऑल इन वर्षों को कैसे देखते हैं?

A. ये तो आपका काम है, आप सब आंकड़ों को देखते हैं। हम कैसे आंक सकते हैं?

Q. कुछ तो बदलाव आपको दिख रहा होगा?
A. पॉजिटिव तो काफी है, मगर अपेक्षाएं भी बहुत ज्यादा थीं। लोगों को यह भरोसा था कि सबको नौकरी मिल जाएगी। वो तो कठिन है।

Q. मोदी की आर्थिक नीतियों पर क्या राय है?
A. लॉन्ग टर्म बेनिफिट तो हैं। जीएसटी तो होना ही था, आवश्यक था। ये एक क्रांतिकारी कदम था। उसके लागू होने में काफी कमियां रहीं, मगर इसका परिणाम अच्छा निकलेगा।

Q. मोदी विरोधी कहते हैं कि उनके सत्ता में आने के बाद सोसाइटी में इनटॉलरेंस बढ़ी है?
A. विरोध करने वाले कुछ न कुछ मुद्दा लेकर विरोध करेंगे और जब तक किसी काम का विरोध नहीं होता, तब तक उस काम की पूर्णता भी नहीं होती। तो विरोध तो होना चाहिए।

Q. राहुल को बतौर प्रधानमंत्री कैसे देखते हैं?
A. (थोडी हिचकिचाहट के साथ) धर्म के क्षेत्र में रहने से हम सबके लिए भी कानून होते हैं, नियम होते हैं। अपना अभिप्राय सबके ऊपर नहीं थोप सकते। निष्पक्ष रहते हैं। धर्मगुरु हो, जज हो, मीडिया हो, हमें निष्पक्ष रहना चाहिए।

Q. आपके पास पूरी दुनिया में काम करने का अनुभव है। आपको कभी लगता है कि- हां, ये आदमी मोदी को टक्कर दे सकता है?
A. कोई भी व्यक्ति निखर सकता है। देश के अच्छे नेता ऊपर आ सकते हैं।

Q. अयोध्या पर मुहिम कहां तक पंहुची?
A. अयोध्या के मुद्दे पर हमने ऐसा सॉल्यूशन दिया, जिससे जीत दोनों पक्षों की हो। अब दोनों पक्षों के जो मुखिया हैं, धर्म गुरु हैं, उनको आगे बढ़ना है। वो बढ़ेंगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है। सभी लोग सौहार्द्रपूर्ण तरीके से इसको करना चाहते हैं। संघर्ष चाहने वाले बहुत थोड़े लोग हैं।

Q. मोदी सरकार के पास जबरदस्त बहुमत था फिर भी क्या वह राममंदिर पर काम नहीं कर पाई?
जवाब- सभी काम सरकार कर सकती है, ऐसा नहीं है। खासतौर से राममंदिर के मुद्दे पर तो आम जनता को आगे बढ़ना पड़ेगा, साथ ही उन्हें भी जो दोनों पक्ष के धार्मिक लोग हैं। कोर्ट से जो भी निर्णय होगा, वो एक पक्ष को आघात पहुंचाएगा। जिन्हें आघात पहुंचेगा, वे चुप नहीं रहेंगे।

Q. नंबर सरकार के पास थे तो आपको नहीं लगता कि सरकार को कोई पहल करनी चाहिए थी, कोई ऑर्डिनेंस लेकर आती, कानून बनाती?
A. मेरे हिसाब से तो यह उत्तम नहीं होगा। सरकार ऑर्डिनेंस लाए, इससे तो लोगों के दिल नहीं जुड़ सकते। एक पक्ष असंतुष्ट बना रहेगा।

Q. मौजूदा परिदृश्य में क्या आपको लगता है हिंदुस्तान कभी हिंदू राष्ट्र हो पाएगा?
A. हिन्दू राष्ट्र क्या है? जहां समानता हो, समान अधिकार हों, जेंडर इक्वेलिटी हो, सबको बराबर अपॉर्चुनिटी मिले, पूजा-पाठ की स्वतंत्रता हो। जिसे हम सेक्यूलर कहते हैं वही, हिंदू वैल्यूज हैं। विविधता को मानते हैं...सबके विकास, सबकी उन्नति को मानते हैं, वही हिंदू राष्ट्र है।

Q. कुछ समय से दलितों के मुद्दे काफी तेजी से बाहर आ रहे हैं। इसकी क्या वजह देखते हैं आप?
A. कहीं भी कुछ होता है तो अब दलित संगठित होकर उसका विरोध करते हैं, इसकी सराहना करनी चाहिए। कुछ लोग इसका नाजायज फायदा उठा रहे हैं। लेकिन मैं ये भी कहूंगा कि गलत विषयों के लिए संगठित होना सही नहीं है।

Q. आरक्षण पर आपका क्या सोचना है?
A. गरीब तबके के लोग हर जाति में हैं, उनको उठाना चाहिए। सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से उन्हें आरक्षण मिलना जरूरी है।

Q. अभी तो ऐसा नहीं हो रहा। ब्राह्मण का बच्चा गरीब है, तो उसको वो सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
A. देखिए बहुत दिन तक ये नहीं चलेगा। फिर विद्रोह करके वो उठ खड़े हो जाएंगे।

Q. गरीबी के आधार पर आरक्षण होना चाहिए। क्या आप इसे एंडोर्स करते हैं?
A. हां, मैं एंडोर्स करता हूं। मैंने देखा है कि सवर्ण या ऊंची जाति के लोग भी बहुत गरीब हैं। दिल्ली में कुली का काम कर रहे हैं, साइकिल रिक्शा चला रहे हैं- ये सभी वर्ण के लोग हैं। गरीबों का जीवनस्तर ऊपर उठाना चाहिए।

Q. ऐसा कहा जाता है कि आर्ट ऑफ लिविंग यानी सोसायटी का एलीट क्लास?
A. ये गलतफहमी है। अगर एलीट क्लास है, तो फिर करोड़ों फॉलोअर कैसे हो सकते हैं?

Q. कुछ समय से संत-बाबा गलत वजहों से सुर्खियों में आ रहे हैं। आसाराम हो, राम-रहीम हो...या
A. (सवाल बीच में ही काटते हुए) देश में एक लाख के करीब संन्यासी हैं। वे लोगों को अच्छा रास्ता दिखा रहे हैं। नशेबाजी से दूर रख रहे हैं। मानवीय मूल्यों को उठाने के लिए बहुत काम कर रहे हैं। इनमें से दो-तीन-चार अपवाद हो जाते हैं। वही ज्यादा दिखाए जाते हैं।

Q. ऐसे फर्जी बाबाओं पर लगाम लगाने के लिए कानून को आगे आना चाहिए या समाज को?
A. कानून भी सख्त होना चाहिए व समाज में भी बॉडी हो जो ऐसी चीजें देखे। रोक लगाए।

Q. क्या कोई बार कौंसिल या प्रेस कौंसिल जैसी संस्था हो जो बाबाओं को सर्टिफाइ करे?
A. अच्छा होगा। कोई एक ऐसा केंद्रीय संगठन हो देश के जाने-माने महापुरुषों का, गुरुओं का, संन्यासियों का, जो निगाह रखे। सरकार कहां निगाह रख पाएगी?

Q. जैसे ही संत या साधु ब्रैंड बनते हैं, वो वेलनेस प्रोडक्ट बनाने लगते हैं। ऐसा क्यों?
A. बेरोजगारी ज्यादा है। रोजगार देने के लिए कर रहे हैं। किसानों को ऑर्गेनिक खेती सिखा रहे हैं। इसके लिए मार्केट नहीं है तो फिर हमें ही खरीदना पड़ता है। प्रॉफिट कमाना ध्येय नहीं है। इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिल रहा है।

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राहुल को बतौर प्रधानमंत्री के सवाल पर उन्होंने कहा,  धर्मगुरु हो, जज हो, मीडिया हो, हमें निष्पक्ष रहना चाहिए। राहुल को बतौर प्रधानमंत्री के सवाल पर उन्होंने कहा, धर्मगुरु हो, जज हो, मीडिया हो, हमें निष्पक्ष रहना चाहिए।