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कोर्ट के बाहर कोई सुसाइड कर ले तो क्या जज को आरोपी बना देंगे: हाईकोर्ट

3 वर्ष पहले
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चंडीगढ़/जालंधर.  पंजाब में नशा तस्करी के मामले की जांच कर रही एसआईटी के हेड पंजाब के डीजीपी (एचआरडी) सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने डीजीपी सुरेश अरोड़ा और डीजीपी (इंटेलीजेंस) दिनकर गुप्ता पर उन्हें इंद्रप्रीत चड्‌ढा सुसाइड केस में फंसाने का आरोप लगाया है। चट्टोपाध्याय की अर्जी पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में चट्टोपाध्याय के खिलाफ जांच पर रोक लगाने के निर्देश देते हुए केस की जांच से जुड़ा तमाम रिकार्ड तलब किया है।

 

 

कोर्ट- हाईकोर्ट के बाहर कोई सुसाइड कर ले तो क्या उस जज को आरोपी बना देंगे

- जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस शेखर धवन की बेंच ने मामले पर 23 अप्रैल के लिए अगली सुनवाई तय करते हुए कहा कि सुसाइड केस की जांच जारी रखी जा सकती है, लेकिन चट्टोपाध्याय के खिलाफ जांच न की जाए।

- बेंच ने इस मामले में आईजीपी एलके यादव की जांच के तौर तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाईकोर्ट के बाहर कोई सुसाइड कर ले तो क्या उस जज को आरोपी बना देंगे जिसकी कोर्ट में सुसाइड करने वाले का केस लंबित था। यह जांच करने वाले अफसर के माइंड सेट को दर्शाता है।

 

फिर तो जज से भी पूछताछ हो

- चट्टोपाध्याय की तरफ से सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कोर्ट में कहा कि एनआरआई कमीशन में चट्टोपाध्याय के साथ हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज मैंबर थे। ऐसे में तो उन जज से भी पूछताछ की जानी चाहिए।

- यही नहीं सुसाइड करने वाले की डायरी के मुताबिक जांच की जा रही है तो हाईकोर्ट के सिटिंग जज द्वारा याचिका खारिज करने पर उनके खिलाफ भी पूछताछ के लिए चीफ जस्टिस से परमिशन ली जानी चाहिए थी। खंडपीठ ने कहा कि वे सुनवाई कर रहे जज की ईमानदारी पर संदेह नहीं कर सकते।

 

चट्टोपाध्याय का दावा- तस्करी में डीजीपी अरोड़ा और गुप्ता के नाम भी 

-  चट्टोपाध्याय ने अपनी 10 पन्नों की अर्जी में कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें एसएसपी राजजीत सिंह और इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह के नशा तस्करी मामले से जुड़े होने के आरोपों पर एसआईटी गठित कर जांच के निर्देश दिए थे।

-  इस मामले की जांच के दौरान पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा और डीजीपी (इंटेलीजेंस) दिनकर गुप्ता का नाम भी सामने आ रहा है। इसमें डीजीपी का एक बेनामी मकान का भी खुलासा हो रहा है।

-  उन्होंने अपनी दलीलों को लेकर छह दस्तावेज सील कवर में कोर्ट में दिए। ड्रग्स मामले में उनके साथ जांच कर रहे अफसरों की प्रमोशन, पोस्टिंग और कैरियर की प्रोग्रेस भी इन सीनियर अफसरों के हाथों में है।

- ऐसे में ड्रग्स मामले की जांच को प्रभावित करने का सीधा प्रयास किया जा रहा है।  ड्रग्स मामले में पहली स्टेटस रिपोर्ट देने के बाद उनका नाम सुसाइड केस में लिया गया। इस तरह उन्हें दबाव में लिए जाने का प्रयास किया जा रहा है।

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