किसान की बेटी बनीं पायलट, 7वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान आसमान में हवाई जहाज को उड़ते देखा था तभी सोच लिया था बनूंगी तो सिर्फ पायलट / किसान की बेटी बनीं पायलट, 7वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान आसमान में हवाई जहाज को उड़ते देखा था तभी सोच लिया था बनूंगी तो सिर्फ पायलट

सुशील लोढा

Sep 10, 2018, 06:40 PM IST

राजस्थान के काला पीपल गांव की भाग्यलक्ष्मी पायलट बनते ही बोलीं- मैं छात्राओं की मदद करूंगी।

story of farmer daughter Pilot Bhagyalakshmi

भीलवाड़ा (राजस्थान)। काला पीपल गांव की पायलट भाग्यलक्ष्मी से मिलिए, 11 साल पहले आसमान में हवाई जहाज उड़ता देखकर पायलट बनने का सपना देखना शुरू किया। सपने को हकीकत में बदलने के लिए किसान पिता व स्कूल टीचर ने मदद की। भाग्यलक्ष्मी आज इंडिगो एयरलाइंस में पायलट बन गई है।

भाग्यलक्ष्मी पायलट बनते ही बोलीं- मैं छात्राओं की मदद करूंगी

- पहली सैलरी मिली तो टीचर से कहा- सर मैं पायलट बन गई हूं। अब गांव की बेटियों के लिए पढ़ने और आगे बढ़ने में पूरी मदद करूंगी। भाग्यलक्ष्मी ने 2007 में सातवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान आसमान में हवाई जहाज को उड़ते देखा। पिता से पूछा कि हवाई जहाज कौन उड़ता है।

- पिता ने कहा- पायलट। सुबह स्कूल जाकर शिक्षक सतीश व्यास से कहा- सर मुझे पायलट बनना है, क्या करना होगा। सातवीं कक्षा की बच्ची का यह सवाल सुनकर टीचर ने कहा- बेटा पहले तो तुम्हे दसवीं पास कर साइंस-मैथ्स लेनी होगी। इसके बाद तुम पायलट बनने की राह पर चल सकती हो। फिर क्या था, भाग्यलक्ष्मी ने पायलट बनने का सपना हकीकत में बदलने की ठान ली।

- भाग्य लक्ष्मी ने बताया कि रात में छत पर सोते समय आसमान में टिमटिमाती लाइटें देखी। पिता से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह हवाई जहाज है। मैंने और सवाल किए तो उन्होंने डांटकर सुला दिया। मैंने उस रात पायलट बनने का सपना देखा फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सपने को हकीकत में बदलकर ही दम लिया।

मदद: पिता ने मेरा सपना पूरा किया...

भाग्यलक्ष्मी ने बताया कि पापा ने लोगों की परवाह न कर मेरे हर सपने को पूरा करने में कसर नहीं छोड़ी। पायलट बनीं तो टीचर को पहली पोस्टिंग की जानकारी दी। मैंने वेतन के बारे में बताना चाहा तो उन्होंने कहा कि वेतन नहीं इस मुकाम पर पहुंचना मायने रखता है।अब मैं गांव की छात्राओं की मदद करूंगी।

इच्छा: मेरी इच्छा है टीचर मेरी फ्लाइट में बैठे...

जब वो गांव के स्कूल में पढ़ती थी, तो बच्चों को खाना परोसकर खाती। कुछ बच्चे थालियां छोड़ देते थे तो साफ करती। कासोरिया से 10वीं पास कर वह नवोदय विद्यालय में गई। कानपुर से उड़ान शुरू की। वह इंडिगो में दिल्ली में को-पायलट है। उसका सपना है एक बार टीचर मेरी फ्लाइट में हो और विशेष अनाउंस करुं।

लक्ष्य: सपने के बारे में पापा को भी नहीं बताया...

पायलट बनने का सपना देखा। पापा को भी नहीं बताया। 10वीं पास की तो पापा ने बायोलॉजी लेने काे कहा, मैं मैथ्स चाहती थी। मैंने पायलट बनने की इच्छा जताई। पापा मान गए। 12वीं के बाद पता चला कि उदयपुर से एकेडमी पॉयलट की ट्रेनिंग कराती है। मगर खर्च 20 लाख तक था। पापा को कहा तो वे तैयार हो गए।

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