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सिंगापुर की तरक्की का राज किसी भी प्रोजेक्ट में नहीं होती एक दिन की भी देरी

मलेशिया से अलग होकर सिंगापुर 1965 में अस्तित्व में आया और फिर शुरू हुआ किस्मत बदलने का मिशन।

Danik Bhaskar | Jun 05, 2018, 07:59 PM IST
  • 707 वर्ग किलोमीटर में फैला सिंगापुर तेजी से विकास कर रहा है
  • प्लानिंग के तहत यहां होता है काम, 1 दिन का भी विलंब नहीं
  • हर चीज का है सिस्टमैटिक मैनेजमेंट

सिंगापुर. सिंगापुर का नाम सुनते ही मन में गगनचुंबी इमारत और वहां की चकाचौंध की तस्वीरें सामने आने लगती होंगी पर महज 50 साल पहले भारत से चार हजार किलोमीटर दूर स्थित इस देश की हालत खराब थी। मलेशिया से अलग होकर सिंगापुर 1965 में अस्तित्व में आया और फिर शुरू हुआ किस्मत बदलने का मिशन। सबकुछ बाहर से इम्पोर्ट...

- मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच 707 वर्ग किलोमीटर में फैला एक छोटा सा देश है सिंगापुर। यहां की आबादी 60 लाख के करीब है, जहां ज्यादातर चीजें दूसरे देशों से इम्पोर्ट करके लाई जाती हैं। चाहे दूध हो या फल, सब्जियां, अनाज व अन्य वस्तुएं। इसके बावजूद दिनों-दिन सिंगापुर की अर्थव्यवस्था बढ़ती जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगले 100 साल की एडवांस प्लानिंग होती है। यहां पर 40 वर्ष का कंसेप्ट प्लान और फिर 10 वर्ष का मास्टर प्लान बनाकर डेवलपमेंट किया जाता है।

किसी भी प्रोजेक्ट में 1 दिन की भी देरी नहीं

- इस विकास का सबसे बड़ा कारण है समय का सदुपयोग। यहां लोग प्लानिंग और उसे वक्त पर पूरा करने में भरोसा रखते हैं। हर काम की डेडलाइन तय होती है। चाहे प्राइवेट हो या सरकारी काम, इसमें 1 भी दिन का विलंब नहीं होता।

गजब का वेस्ट मैनेजमेंट

सिंगापुर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (कूड़ा प्रबंधन) से भारत को सीख लेनी चाहिए। कूड़ा फैलाने पर इतनी कड़ी पेनाल्टी है कि कोई लापरवाही की सोच भी नहीं सकता। कूड़े को बंद गाडिय़ों में ही डंपिंग ग्राउड ले जाया जाता है। मिट्टी-मलबा लग जाए तो गाडिय़ां धुलने व सूखने के बाद ही सड़क पर उतर सकती हैं। कूड़े से बिजली भी पैदा की जाती है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्या कहने

- सिंगापुर में ट्रैवल करना एक मजेदार अनुभव है। यहां कहीं भी मिनटों में पहुंचा जा सकता है। भूमिगत मेट्रो (एमआरटी यानी मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) तो है ही, मोनो रेल, केबल कार (रोपवे), सिटी बसें व टैक्सी आदि का ऐसा नेटवर्क है कि कहीं जाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता। दो-दो मिनट पर कोई न कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध है।

लोग गाड़ी कम खरीदें इसलिए ज्यादा टैक्स

- यहां लोग गाड़ियां कम खरीदते हैं। इसके लिए इंपोर्ट टैक्स के साथ ही दूसरे टैक्स बहुत ज्यादा रखे गए हैं। इससे ट्रैफिक के साथ प्रदूषण भी कम रहता है। लोग फिट रहें, इसके लिए सरकार प्रतिदिन 10 किमी या अधिक पैदल चलने वालों को प्रोत्साहन राशि भी देती है।

अपराध करने का कोई सोचता नहीं

- सिंगापुर के अखबारों में अपराध की खबरें बहुत कम मिलती हैं। कारण है छोटे अपराध के लिए बेहद कड़ी सजा और पेनाल्टी। वर्षों की जेल और इलेक्ट्रिक कोड़े की मार का डर। दुष्कर्म पर तो सजा-ए-मौत है। धार्मिक भावनाएं भड़काना गुनाह है। सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के प्रति पूरे सम्मान के साथ मिलजुल कर रहना होता है।