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डाउनलोड करेंभोपाल. सांवले बच्चे को गोरा करने के लिए पत्थर से घिसने के मामले में बाल कल्याण समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला सशक्तीकरण अधिकारी और जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव व एडीजे को सौंपी गई है। इस रिपोर्ट में बाल कल्याण समिति ने मातृछाया संस्था और गोद देने वाली संस्था शासकीय बालगृह देहरादून को दोषी माना है। समिति ने संबंधित संस्थाओं के प्रभारियों को हटाने और संस्था के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट के साथ अब जिला विधिक प्राधिकरण अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपेगा।
बाल आयोग ने शुरू से पल्ला झाड़ा, सीधे संज्ञान नहीं लिया
बाल कल्याण समिति के 4 सदस्यीय कमेटी ने जांच में पाया कि बच्चे के मामले में हर स्तर पर लापरवाही हुई है। कमेटी ने बच्चों को गोद देने के बाद संस्थाएं किसी भी स्तर पर फालोअप नहीं करती। कमेटी ने मातृछाया संस्था और गोद दिए जाने वाली संस्था के अलावा केंद्रीय दत्तक प्राधिकरण( कारा) व राज्य दत्तक प्राधिकरण (सारा) को भी दोषी पाया है। जिन्होंने कोई गाइड लाइन नहीं बनाई है और न ही कोई मॉनीटरिंग कमेटी बनाई है, जो गोद जाने वाले बच्चो की 15 साल तक निगरानी कर सके।
ये मुख्य सिफारिश की....
- माता-पिता की जमानत रद्द करने की सिफारिश की है।
- शासकीय बालगृह देहरादून को दोषी मानते हुए समिति ने संस्था की प्रभारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की है। वहीं राज्य दत्तक ग्रहण प्राधिकरण देहरादून को कोर्ट में बच्चे के अडाप्शन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने और बच्चे को दोबारा लीगल फ्री करने की प्रक्रिया शुरू करने करने के लिखा है।
अभी तक बाल आयोग ने नहीं की कोई कार्रवाई...
बच्चे को प्रताड़ित किए जाने के मामले में आयोग की भूमिका पर भी सवाल है। अभी तक इस गंभीर मामले में न तो खुद जांच की और शासन को भी कोई सिफारिश नहीं की है।
रिपोर्ट देखी नहीं
बाल आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि बाल कल्याण समिति ने रिपोर्ट दी है। शिवपुरी में होने की वजह से नहीं देख पाया। जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश आयोग शासन से करेगा।
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