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स्ट्रोक की शिकार बच्ची को \'गोल्डेन पीरियड\' में इलाज देकर बचाया

3 वर्ष पहले
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स्ट्रोक की शिकार बच्ची को \'गोल्डेन पीरियड\' में इलाज देकर बचाया

बच्ची को \'गोल्डेन पीरियड\' के अंदर इलाज मिल गया जिस कारण उसकी जिंदगी बच गई।
इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली में इमरजेंसी विभाग प्रमुख डॉ. प्रियदर्शनी पाल सिंह ने कहा, \"\"स्ट्रोक के बाद तकरीबन चार घंटे की अवधि को गोल्डेन पीरियड कहा जा सकता है। इस अवधि के अंदर सही इलाज मिलने पर मरीज के जीवित रहने और पूरी तरह से ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। जब बच्ची को भर्ती किया गया, उसके शरीर के ऊपरी बाएं हिस्से, बाएं हाथ-पैर में बहुत ज्यादा कमजोरी थी। एमआरआई और एमआर एंजियोग्राम से हमें उसकी समस्या का पता चला। बीमारी का पता चलने पर हम सभी हैरान रह गए।\"\"
इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के पीडिएट्रिक न्यूरोलोजिस्ट व वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. वी. बी. गुप्ता, ने कहा, \"\"उसका पीटी/ एपीटीटी, प्लेटलेट काउंट, कॉग्यूलेशन प्रोफाइल, प्लाज्मा फाइब्रिनोजन नॉर्मल थे। लेकिन होमोसिस्टीन लेवल असामान्य पाया गया, यानि उसमें स्ट्रोक की संभावना थी। छोटे पीएफओ (पेटेंट फोरामेन ओवेल) का इको किया गया, जो दिल में एक छेद होता है। हमने एक घंटे के अंदर टीपीए के साथ इलाज शुरू करने का फैसला लिया। रक्त का प्रवाह सामान्य बनाए रखने के लिए पैसिव लिंब फिजियोथेरेपी शुरू की गई।\"\"
धीरे धीरे बच्चे स्टेबल होने लगी, उसके बाएं हिस्से में गतिविधि शुरू हो गई और उसकी बाईं टांग में हल्का दर्द रह गया।
डॉ वी. बी. गुप्ता ने कहा, \"\"इस मामले में माता-पिता ने स्थिति की गंभीरता को समझा और तुरंत मल्टी-स्पेशिलिटी अस्पताल पहुंचे। बच्चों में स्ट्रोक के मामले बहुत कम देखे जाते हैं, बहुत से लोगों ने ऐसा सुना तक नहीं होगा।\"\"
बच्ची के माता-पिता को घर पर दवाएं एवं पैसिव फिजियोथेरेपी जारी रखने की सलाह दी गई है।
--आईएएनएस
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