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लॉ की पढ़ाई करने के बाद जज और वकील के अलावा ये भी हैं करियर ऑप्शन

अपनी रूचि के अनुसार आप क्षेत्र चुन सकते हैं। इनमें सिविल, टैक्स, क्रिमिनल, कॉर्पोरेट मामले आदि शामिल हैं।

Danik Bhaskar | Jul 28, 2018, 01:42 PM IST

एजुकेशन डेस्क। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में देशों की ओर से बड़े वकील पैरवी करते हैं जैसे कुलभूषण जाधव के मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच चले मुकदमे में भारत की ओर से हरीश साल्वे ने वकालत की। भारत के जस्टिस दलबीर भंडारी वहां जज हैं। वहीं, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में किसी भी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री तक पर नरसंहार, मानवाधिकार के उल्लंघन आदि के मुकदमे चल सकते हैं। सूडान के राष्ट्रपति ओमार बशीर सहित कई नेताओं के खिलाफ वारंट जारी कर रखे हैं। कुछ पूर्व राष्ट्राध्यक्षों व फौजी अफसरों को सजा भी हुई है।

दसवीं, 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद
12वीं करने के बाद आप कानून के क्षेत्र में कॅरियर बनाने की दिशा में कदम रख सकते हैं। किसी भी स्ट्रीम (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स आदि) के छात्र इसे अपना सकते हैं। कुछ यूनीवर्सिटी व कॉलेजों में प्रवेश की अपनी प्रक्रिया है, लेकिन भारत के सभी 19 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) और लॉ कॉलेजों में कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) में हासिल आल इंडिया रैंक और स्कोर के आधार पर दाखिला लिया जाता है। कुछ प्रमुख प्राइवेट लॉ कॉलेज एलसेट इंडिया के आधार पर प्रवेश देते हैं। इनमें ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, अलायन्स स्कूल ऑफ़ लॉ, यूपीएस देहरादून शामिल हैं। वहीं, सिम्बायोसिस लॉ स्कूल पुणे, हैदराबाद और नॉएडा में दाखिले के लिए सेट (सिम्बायोसिस एंट्रेंस टेस्ट ) पास करना होता है।

लॉ के अंतर्गत कोर्सेस:
1. क्रिमिनल लॉ:
- यह सबको पढ़ना पड़ता है। इसके अध्ययन से ही क्राइम्स और उसके प्रति कानून और प्रावधान की जानकारी मिलती है।
2. कॉरपोरेट लॉ
इसके अंतर्गत कॉरपोरेट और बिज़नेस वर्ल्ड में होने वाली व्यावसायिक समस्याओं और अपराधों को रोकने तथा फाइनेंस प्रोजेक्ट, टैक्स लाइसेंस और ज्वॉइंट स्टॉक से संबंधित काम और कानून की जानकारी होती हैं।
3. बौद्धिक सम्पदा तथा पेटेंट कानून
- इसके तहत बताया जाता है कि बौद्धिक सम्पदा और पेटेंट क्या होते हैं, उनसे जुड़े कानून आदि के बारे में बताया जाता है।
-किसी का आइडिया चुरा कर काम करना बौद्धिक सम्पदा कानून का उल्लंघन माना जाता है।
4. साइबर लॉ
- कंप्यूटर जगत में नित नए ईज़ाद, सोशल नेटवर्किंग, नेट बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग वगैरह से साइबर क्षेत्र में क्राइम का दायरा बढ़ा है।
-इस कानून के तहत साइबर क्राइम से जुड़े मुद्दों पर कानून जानकारी देता है कि उनसे कैसे निपटा जाये और उनके लिए सजा का क्या प्रावधान है।
5. फैमिली लॉ
- यह महिलाओं के लिए उपयुक्त और पसंदीदा क्षेत्र है। इसके तहत तलाक, गोद लेने, पर्सनल लॉ, शादी, गार्जियनशिप एवं अन्य सभी पारिवारिक मामले आते हैं।
- पारिवारिक मामलों को उसी स्तर पर सुलझाने के लिए हर राज्य के सभी जिलों में फैमिली कोर्ट की स्थापना हैं।
6. बैंकिंग लॉ
- बैंकिंग के तहत लोन, लोन रिकवरी, गिरवी आदि से संबंधित कानून और कार्यों का निपटारा कैसे किया जाए और उससे सम्बन्धित नियम और कानून का क्या प्रावधान है इसपर अध्ययन किया जाता है।
7. टैक्स लॉ
- टेक्स लॉ के तहत सभी प्रकार के टैक्स जैसे सर्विस टैक्स, सेल टैक्स, इनकम टैक्स आदि से सम्बन्धित लॉ की जानकारी होती है।


कानून के इन क्षेत्रों में कॅरियर बनाया जा सकता है
1. एडवोकेट के तौर पर प्रैक्टिस:
- लॉ करने के बाद आप सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में खुद की प्रैक्टिस कर सकते हैं, शुरुआती दौर में किसी सीनियर एडवोकेट के अधीन प्रैक्टिस कर सकते हैं।
- अपनी रूचि के अनुसार आप क्षेत्र चुन सकते हैं। इनमें सिविल, टैक्स, क्रिमिनल, कॉर्पोरेट मामले आदि शामिल हैं।

2. लीगल एनालिस्ट :
- बड़े उद्योग घरानों और लॉ फर्म्स में व्यावसायिक समस्याओं और अन्य न्यायिक समाधान के लिए लीगल एनालिस्ट की आवश्यकता होती है।
- एक लीगल एनालिस्ट के वार्षिक पैकेज की शुरुआत में 6-10 लाख रु. तक होती है।

3. लीगल जर्नलिस्ट
-मीडिया हाउसेस में लीगल, क्राइम व कोर्ट की खबरें कवर करने के लिए भी लॉ के छात्रों की मांग है।

4. लीगल एडवाइज़र
- बहुत से उद्योगपति, कंपनियां, नेता तथा संस्थाएं न्यायिक अड़चनों के समाधान हेतु लीगल एडवाइज़र नियुक्त करते हैं।

5. सरकारी वकील
- बार कॉउंसिल की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद आप सरकार और उसके विभिन्न विभागों के लिए केस लड़ सकते हैं।

6. जुडिशल सर्विस और पब्लिक सर्विस कमीशन
- राज्य सरकार और केंद्र सरकार समय-समय पर जुडिशल सर्विस और सिविल सर्विस की परीक्षा आयोजित करती हैं, इसमें सफल होकर आप कोर्ट में जज तथा अन्य ऊंचे पदों पर कार्य कर सकते हैंं।

7. जुडिशल क्लर्कशिप
- जुडिशल क्लर्कशिप या लॉ क्लर्क, जज के सहायक के तौर पर कार्य करते हैं, ये जज को विधि संबंधी या केस से सम्बंधित अनुसंधान में सहायक का कार्य करते हैं।
- जुडिशल क्लर्कशिप की परीक्षा पास करने के बाद आप इस पद पर सेवा कर सकते हैं।

8. वकालत पढ़ने के बाद और प्रेक्टिस से पहले यह जरूरी
-एलएलबी की डिग्री मिलने के बाद वकालत करने के लिए स्टेट बार कॉउन्सिल में एनरॉल कराने की आवश्यकता होती है।

कहां-कहां तथा कैसे-कैसे रोज़गार के अवसर
- वैश्वीकरण के कारण हर क्षेत्र में विधि और कानून से जुड़े विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है, चाहे वो लॉ फर्म हो, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, प्राइवेट सेक्टर अंडरटेकिंग, सेलेब्रटी हो या बिज़नेस टाइकून सभी को विधि परामर्शी की जरूरत है।
- आप खुद की प्रैक्टिस कर सकते हैं, समय-समय पर न्यायिक सेवा के लिए रिक्तियां निकलती है, लॉ के विद्यार्थियों के लिए प्रशासनिक सेवा भी एक बेहतर विकल्प है।
- यही नहीं आप स्वतंत्र विधि परामर्शी के तौर पर भी काम कर सकते हैं, राजनीतिक पार्टिया भी लीगल एडवाइज़र और पॉलिटिकल एडवाइज़र के लिए विधि के छात्रों को प्राथमिकता देते हैं।
- सीए फर्म और चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी टैक्स लॉयर की जरूरत पड़ती है, टैक्स लॉ में रोजगार की असीमित संभावनाएं हैं।
- अगर आपकी रुचि अकादमिक की ओर है तो आप लॉ में मास्टर्स डिग्री करने के बाद यूजीसी नेट की परीक्षा पास कर असोसिएट प्रोफेसर के तौर पर किसी लॉ स्कूल और कॉलेज में पढ़ा सकते हैं।

कहां कितनी कमाई
लॉ फर्म्स
-5-25 लाख सालाना। कई लॉ फर्म्स 50 लाख सालाना तक का पैकेज भी देती हैं।

एडवोकेट :
- हुनर और काबिलियत से असीमित कमा सकते हैं। भारत में कई ऐसे लॉयर है जो एक कोर्ट पेशी के लिए 5 लाख से 1 करोड़ तक चार्ज करते हैं।
- फिर भी न्यूनतम 25-30 हज़ार रुपए की आमदनी आराम से की जा सकती है।

लॉ स्कूल प्रोफेसर
- लॉ के प्रोफेसर को शुरुआती दौर में तीस हज़ार रुपये तक सैलरी मिल सकती है जो आगे चलकर 1-2 लाख रु. महीने तक होता है।

लीगल एडवाइजर
- 5 लाख-12 लाख तक सालाना कमाया जा सकता है जो आगे चलकर और भी बढ़ सकता है।