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गूगल पर सर्च करता था- फेल होने वालों के लिए ऑप्शन, 12वीं फेल बन गया करोड़पति

एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखने वाले ऋषभ अपने पिता की तरह सिविल इंजीनियर बनना चाहते थे।

Danik Bhaskar | Jun 09, 2018, 08:39 PM IST
आज करोड़पति बन चुके ऋषभ लवानिया 12th क्लास में फेल हो गए थे। आज करोड़पति बन चुके ऋषभ लवानिया 12th क्लास में फेल हो गए थे।

* ऋषभ लवानिया बन चुके लोगों के लिए मिसाल
* 17 साल की उम्र में 12th क्लास में हो गए थे फेल
* आज हैं करोड़ों रुपए की कंपनी के मालिक

नेशनल डेस्क. 17 साल की उम्र में ज्यादातर बच्चे स्कूल की पढ़ाई कर रहे होते हैं, और अपना करियर बनाने के बारे में सोचते हैं, लेकिन ऐसे में अगर कोई 12th में फेल हो जाए तो लोग उसे लेकर तमाम तरह के सवाल उठाने लगते हैं। लेकिन एक यूथ ऐसा भी है जो जिसने 12th में फेल होने के बाद भी हार नहीं मानी और वो कर दिखाया, जिसकी मिसालें आज दी जा रही हैं। इस लड़के का नाम ऋषभ लवानिया है, ऋषभ की उम्र फिलहाल 24 साल हो चुकी है, लेकिन उनकी सक्सेस स्टोरी 17 साल की उम्र में 12th में फेल होने के बाद ही शुरू हुई थी, और आज वे अपने दम पर करोड़पति बन चुके हैं। फेल होने के बाद करते थे गूगल पर ये सर्च...

- आज करोड़ों लोगों के लिए आइडल बन चुके ऋषभ की सक्सेस स्टोरी तब से शुरू होती है, जब वो 12th में फेल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने जो किया वो आज मिसाल बन चुका है।
- एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखने वाले ऋषभ अपने पिता की तरह सिविल इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन 12th में फेल होने के बाद उनका ये सपना टूट गया और उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचा।
- ऋषभ का कहना है कि 12th क्लास में फेल होने के बाद वो अक्सर गूगल पर सर्च करते थे, '12th में फेल होने के वालों के लिए क्या बेहतर ऑप्शन हैं?'
- ऋषभ जानते थे कि उनके पास अनुभव की कमी है, जिसके बाद उन्होंने ऐसे लोगों से दोस्ती कर ली जिन्हें बिजनेस को लेकर काफी अच्छी समझ थी।
- लवानिया के मुताबिक, 'मैंने कई इंवेस्टमेंट एनालिस्ट के साथ बातचीत शुरू की। इस दौरान NASSCOM और FICCI में मेरे कई अच्छे दोस्त बन गए जिन्होंने मेरी सोच बदलने में मेरी काफी मदद की।'

6 महीने में ही फ्लॉप हो गया था पहला आइडिया

- इस युवा उद्यमी ने गुड़गांव में 'रेड कार्पेट' के नाम से इवेंट बेस्ड अपनी पहली कंपनी शुरू की। उनका ये आइडिया 6-7 महीने में ही फ्लॉप हो गया। हालांकि इससे वे निराश नहीं हुए और उन्होंने जीवन में कुछ बेहतर करने की प्रेरणा ली।
- इसके बाद 'जस्ट गेट इट' नाम की रेस्टोरेंट लॉजिस्टिक फर्म शुरू करने से लेकर 'इगोन जेन्डर' नाम की ग्लोबल एग्जेक्यूटिव सर्च फर्म ज्वॉइन करने तक उन्हें कई कड़वे अनुभव भी हुए।
- उनका कहना है कि ऐेसे कुछ और अनुभवों के बाद वे साल 2015 में अमेरिका चले गए, जहां उनकी मुलाकात केशु दुबे से हुई, जिनके साथ मिलकर उन्होंने Xelert8 नाम की डाटाबेस टेक कंपनी शुरू की।
- केशु दुबे से मुलाकात होने के बाद ऋषभ ने एक इंवेस्टर के रूप में दुनिया घूमना शुरू कर दिया। उन्होंने भारत, चीन, अमेरिका और जापान जैसे देशों में स्टार्टअप के बारे में जानने की कोशिश की।
- Xelert8 कंपनी लवानिया के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि कुछ ही वक्त बाद इस कंपनी को एक चाइनीज कंपनी ने अच्छी खासी कीमत देकर खरीद लिया।

बन गए इंवेस्टर

- Xelert8 कंपनी को बेचने के बाद कुछ वक्त पहले तक लोगों से फंड लेने वाले लवानिया अब खुद इंवेस्ट करने में सक्षम हो गए।

- ऋषभ का कहना है कि 'आज मैं ऐसे लोगों के साथ मिलकर इंवेस्ट करता हूं, जो ग्राउंड लेवल से आते हैं। जो जमीनी हकीकत को जानते हैं, असल में मैं ऐसे आइडिया में निवेश करना चाहता हूं जिसमें वैल्यू फोर मनी हो।'

- लवानिया अब अपने नए प्रोजेक्ट Weetrackers के साथ नई ऊंचाईयों को छूना चाहते हैं। ये एक मीडिया प्लेटफॉर्म है, जहां लोग बिजनेस पर्सनालिटीज और एंटरप्रेनर्स की स्टोरी पढ़ सकते हैं।
- ऋषभ के मुताबिक अपने इस प्रोजेक्ट के लिए वे भारत सरकार और नीदरलैंड्स सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे है। इस प्रोजेक्ट का मकसद लोगों को साउथ अफ्रीका में बिजनेस सेट करने में मदद करना है।
- WeeTracker की प्लानिंग को लेकर उनका कहना है कि मेरे पास कई अफ्रीकी उद्यमियों की लिस्ट है जो कि उद्यमिता के बारे में सीखने के लिए भारत आना चाहते हैं।
- ऋषभ के मुताबिक हम भारत, चीन, अमेरिका और जापान में मेंटर, उद्यमियों और प्रोडक्ट मैनेजमेंट के नेटवर्क को बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
- 24 साल के इस युवा एंटरप्रेनर का कहना है कि 'मैं इस बात की चिंता नहीं करता कि मेरे कर्मचारी ऑफिस में सही टाइम पर आ रहे हैं या नहीं या जल्दी जा रहे हैं। मुझे बस इस बात से मतलब है कि नई बातों को सीखने के लिए उनमें कितना जुनून है, और वो काम में क्या क्वालिटी दे रहे हैं।'

फेल होने के बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने के प्लान बनाया। फेल होने के बाद उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने के प्लान बनाया।