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करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच: आर्थिक स्थिति बेहतर करनी है तो पर्याप्त हो जजों की संख्या

सरकार को समझना होगा कि सही मायनों में लोगों का कल्याण तभी होगा, जब उन्हें सस्ता और जल्दी इंसाफ मिले।

नगमा नासिर | Last Modified - May 10, 2018, 01:11 AM IST

करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच: आर्थिक स्थिति बेहतर करनी है तो पर्याप्त हो जजों की संख्या
जब यह खबर जाहिर हुई कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के जज जस्टिस शाहरुख कथावाला शुक्रवार सुबह से शनिवार तड़के 3 बजे तक सुनवाई करते रहे तो लोगों ने उनके जज्बे की खूब तारीफ की। जब कोई जज लगातार 16 घंटे काम कर 135 केस को निपटाए तो यह बिल्कुल प्रशंसा के लायक है। दरअसल, जज साहब एक दिन नहीं, बल्कि पिछले एक हफ्ते से रात में सुनवाई कर रहे थे। लेकिन, सवाल है कि क्या किसी ने सोचा कि जज साहब को इतनी मशक्कत करने की जरूरत क्यों पड़ी? इसका दूसरा पहलू है कि अगर देश की अदालतों में जजों की संख्या पर्याप्त होती तो इतने ज्यादा मामले अदालतों में लंबित नहीं होते और जस्टिस कथावाला को लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती।
अतिरिक्त समय देकर सुनवाई करने की पहल 2017 में देश के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर ने की थी। उन्होंने भी जजों की कमी को लेकर कई दफा सवाल उठाए, लेकिन सरकार खामोश रही। वर्तमान में, विभिन्न अदालतों में 38 प्रतिशत जज कम हैं। निचली अदालतों में 6 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। तीन करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं। सर्वोच्च न्यायालय में 60 लाख जबकि उच्च न्यायालयों में 40 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। इसके बावजूद जजों की नियुक्ति को लेकर रस्साकशी कम होने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में पूर्वोत्तर के तीन हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम और सरकार के बीच बढ़ी तल्खी भी इसी समस्या का एक हिस्सा है।
जजों की नियुक्ति में सरकार की यह उदासीनता कई मामलों में हैरान करने वाली है। एक तरफ कल्याणकारी शासन का दावा और दूसरी तरफ लोगों को मिलने वाला महंगा इंसाफ खुद में विरोधाभासी है। सरकार को समझना होगा कि सही मायनों में लोगों का कल्याण तभी होगा, जब उन्हें सस्ता और जल्दी इंसाफ मिले। इससे न केवल लोगों का समय बचाकर उनकी उत्पादकता को बेहतर किया जा सकता है बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर बेहतर जीवन शैली भी मुहैया कराई जा सकती है। जाहिर है अंतिम रूप से देश का ही फायदा होने वाला है।
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