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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. देश में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में खाली पदों को लेकर लंबे समय से बहस छिड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का कहना है कि केंद्र सरकार नामों को स्वीकृत नहीं कर रही जबकि केंद्र ने नाम अटकाने के लिए कॉलेजियम को जिम्मेदार ठहराया है। जब इन अटके मामलों की पड़ताल की गई तो पता चला कि इनके टकराव के कारण सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों के 36% खाली पद फंसे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट में जजों के 401 पद खाली हैं। दो साल से 146 पद कॉलेजियम और केंद्र के पास अटके हुए हैं। यदि ये पद भर जाएं तो बाकी जजों से रोज 7 हजार से ज्यादा केसों का बोझ कम हो सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में एक जज को रोजाना औसतन 50 से 60 केसों की सुनवाई करनी पड़ती है। बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज और कॉलेजियम में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नामों को स्वीकृति न देने पर नाराजगी जताई और खुद संज्ञान लेने की बात कही।
- उन्होंने कहा था कि कई बार गर्भवती महिला की डिलीवरी का समय होने पर जब शिशु पैदा नहीं होता तो डॉक्टरों को सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। इसके उलट केंद्र सरकार पहले से कह रही है कि देरी उनकी तरफ से नहीं है। हाल में समाप्त हुए संसद सत्र में केंद्र ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट और देश के 24 हाईकोर्ट में 262 जहों की नियुक्ति को मंजूरी दे चुकी है। कई नाम कॉलेजियम स्वीकार नहीं कर रहा।
कॉलेजियम के पास लंबित नाम
- कॉलेजियम के पास 6 नाम 30 जून 2017 से, एक नाम 7 सितंबर 2017 से, पांच नाम 24 अक्टूबर 2017 से, 5 नाम 21 फरवरी 2018 से और पांच नाम 23 नवंबर 2017 से लंबित हैं। ये नाम केंद्र सरकार ने प्रस्तावित कर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास भेजे थे, मगर कॉलेजियम से इन नामों को अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।
केंद्र सरकार के पास लंबित नामों की संख्या
- कॉलेजियम की फाइनल सिफारिश वाले 24 नाम हैं। यानी आपत्तियां निपटाने के बाद इनकी सिफारिश की गई। 86 नाम ऐसे हैं जिन्हें कॉलेजियम ने पहली बार भेजा है। इनमें सबसे ज्यादा इलाहाबाद हाईकोर्ट के 33, दूसरे पर कलकत्ता हाईकोर्ट के 13, तीसरे पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 11 और दिल्ली हाईकोर्ट के 9 नाम लंबित हैं।
जजों को नियुक्त करने की प्रक्रिया ये...
- कॉलेजियम जजों के नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजती है। केंद्र भी अपने कुछ प्रस्तावित नाम कॉलेजियम को भेजती है। केंद्र के पास कॉलेजियम से आने वाले नामों को लेकर आपत्तियों की छानबीन की जाती है। इन आपत्तियों सहित नामों को कॉलेजियम के पास भेजा जाता है। कॉलेजियम इन आपत्तियों को दूर कर फाइनल संस्तुति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजती है।
#केंद्र सरकार के पास लंबित कुछ मामले
केएम जोसेफ और इंदु मल्होत्रा का मामला
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के तौर पर नियुक्ति के लिए केएम जोसफ और इंदु मल्होत्रा का नाम सरकार के पास जनवरी 2018 को भेजा था। मगर केंद्र सरकार ने इन नामों को मंजूरी नहीं दी। कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार जोसेफ को पदोन्नत करने की इच्छुक नहीं है, क्योंकि जोसेफ वही जज हैं, जिन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट में मई 2016 में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को अवैध घोषित किया था।
मोहम्मद निजामुद्दीन का मामला- तीन बार नहीं दी मंजूरी
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए मोहम्मद निजामुद्दीन का नाम केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र सरकार ने 11 नवंबर 2016 को उनके नाम को स्वीकृति देने से इंकार कर दिया और नाम वापस कॉलेजियम के पास भेज दिया। काॅलेजियम ने मोहम्मद का नाम फिर से 15 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार के पास भेजा। जिसे केंद्र सरकार ने 1 मार्च 2017 को वापस भेज दिया। कॉलेजियम ने 7 अप्रैल 2017 को तीसरी बार उनका नाम केंद्र को भेजा, तब से इनका नाम सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित है।
चर्चित नाम जो केंद्र सरकार के पास अभी तक लंबित हैं
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में बर्षद अली खान का नाम हाईकोर्ट जज के लिए कॉलेजियम की अनुशंसा के बावजूद केंद्र सरकार के पास 4 अप्रैल 2016 से लंबित है। वहीं मोहम्मद मंसूर का नाम केंद्र सरकार के पास 16 नवंबर 2016 से लंबित है।
- कलकत्ता हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए सम्बा सरकार, सब्यसाजी चौधरी, रवि कपूर, अरिंदम मुखर्जी और साक्य सेन के नामों की अनुशंसा 4 दिसंबर 2017 को कॉलेजियम ने की थी। उसके बाद से यह केंद्र सरकार के पास लंबित है। कलकत्ता हाईकोर्ट में 72 जजों के पद हैं। जिनमें से 33 पर ही जज हैं।
- कर्नाटक हाईकोर्ट में कॉलेजियम ने नरेंद्र प्रसाद के नाम की अनुशंसा मार्च 2017 में की थी। करीब 1 साल से यह नाम स्वीकृति के लिए केंद्र के पास लंबित है। यहां पर वकीलों ने खाली पदों को भरने की मांग के लिए पिछले साल हड़ताल की थी, उस समय केंद्र सरकार ने यहां पर पांच जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी।
- मद्रास हाईकोर्ट में 4 दिसंबर 2017 को कॉलेजियम ने वरिष्ठ वकील सुब्रहमण्यम प्रसाद और आठ जजों समेत 9 नामों की अनुशंसा कर केंद्र सरकार को भेजी थी। मगर केंद्र से अभी तक मंजूरी नहीं मिली।
- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से कॉलेजियम द्वारा प्रस्तावित हरनेश सिंह गिल का नाम 6 अप्रैल 2017 से केंद्र सरकार के पास लंबित है।
- त्रिपुरा हाईकोर्ट से अरिंधम लोध का नाम 1 नवंबर 2017 से केंद्र सरकार के पास लंबित है।
पिछले दो साल में केंद्र सरकार ने कितने पद भरे?
वर्ष-2016, पद-134
सुप्रीम कोर्ट- 04
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस- 14
हाईकोर्ट जज- 126
वर्ष- 2017, पद-128
सुप्रीम कोर्ट जज- 05
हाईकोर्ट चीफ जस्टिस- 08
हाईकोर्ट जज- 115
केंद्र ने संसद में कहा था 24 हाईकोर्ट में 262 पदों पर नियुक्ति को मंजूरी दी
146 नाम दो साल से अटके हैं
36 नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास फिलहाल उलंबित
110 नामों को केंद्र सरकार से मंजूरी का इंतजार
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