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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की बैठक बुधवार को होगी। इसमें शीर्ष अदालत के लिए तीन हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नामों पर चर्चा की जाएगी। ये नाम अंतिम मुहर के लिए केंद्र सरकार के पास भेजे जाएंगे। 11 मई को हुई बैठक में उत्तराखंड के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ का नाम केंद्र को दोबारा भेजने पर ही सैद्धांतिक सहमति बन पाई थी। सरकार पहले उनका नाम का प्रस्ताव खारिज कर चुकी है।
दोबारा विचार के लिए केंद्र ने लौटाया था जस्टिस जोसेफ का नाम
- केंद्र ने जस्टिस जोसेफ के नाम पर दोबारा विचार करने के लिए इसे कॉलेजियम को लौटाया था।
- चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम की बैठक में जस्टिस जोसेफ का नाम केंद्र को दोबारा भेजने पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी।
- कॉलेजियम के बाकी सदस्य- जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस जोसेफ कुरियन ने भी हिस्सा लिया था।
केंद्र को मंजूरी देनी होगी, समय सीमा तय नहीं
- कॉलेजियम अगर किसी जज के नाम की सिफारिश दोबारा भेजता है तो केंद्र सरकार को उसे मंजूरी देनी ही होती है। हालांकि, इसकी कोई समय सीमा तय नहीं है कि केंद्र कितने दिन में इसे मंजूरी दे।
किन नामों पर हो सकती है चर्चा
- बैठक में कलकत्ता, राजस्थान और तेलंगाना-आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नामों पर चर्चा होगी। पिछली बैठक में इनके नामों पर पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई थी।
कांग्रेस का आरोप- केंद्र सरकार बदले की राजनिति कर रही
- कांग्रेस ने इस मामले में केंद्र सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया था।
- पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरेजवाला ने कहा था, "भारत की न्यायिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा हमला किया जा रहा है। अगर देश इसके खिलाफ नहीं खड़ा हुआ तो ये लोकतंत्र को खत्म कर देगा। उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जोसेफ देश के सबसे वरिष्ठ मुख्य न्यायाधीश हैं, इसके बावजूद मोदी सरकार उन्हें सुप्रीम कोर्ट में भेजने से इनकार कर रही है। क्या ये उत्तराखंड में लगा राष्ट्रपति शासन रद्द करने का बदला है?"
- 2016 में उत्तराखंड में सियासी टकराव पर मोदी सरकार की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। लेकिन कुछ दिन बाद ही जस्टिस केएम जोसेफ ने इसे रद्द कर दिया था।
जस्टिस जे चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस को लिखा था पत्र
- इससे पहले जस्टिस जे चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस को एक लेटर लिखकर जस्टिस केएम जोसेफ का नाम केंद्र को दोबारा भेजने की सलाह दी थी।
जजों की जरूरत क्यों?
- कॉलेजियम और केंद्र दोनों के पास फंसे जजों के 36 फीसदी पद खाली हैं। ये भरें तो बाकी जजों से रोजाना 7 हजार केसों का बोझ घटेगा। 146 नाम दो साल से अटके हैं। 36 नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास लंबित हैं। 110 नामों को केंद्र सरकार से मंजूरी का इंतजार है।
- देश के 24 हाईकोर्ट में 395 और सुप्रीम कोर्ट में जजों के 6 पद रिक्त हैं।
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