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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. जस्टिस बृजमोहन हरिकृष्ण लोया की मौत के मामले में एसआईटी जांच कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि जज लोया की मौत प्राकृतिक थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में दायर की गईं सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है। सीबीआई के स्पेशल जज लोया की मौत को लेकर कुछ याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं थीं। इनमें मांग की गई थी कि इस मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी से कराई जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई पिछले ही पूरी कर चुका था। महाराष्ट्र सरकार ने स्वतंत्र जांच का यह कहते हुए विरोध किया था कि इस बारे में दायर याचिकाएं राजनीति से प्रेरित हैं।
आखिर कैसे हुई थी जज लोया की मौत?
- सीबीआई के स्पेशल जज लोया की मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में हुई थी। वो एक शादी में जा रहे थे। बताया जाता है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।
- पिछले साल उनकी मौत के हालात पर बहन ने शक जाहिर किया। इसके तार सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से जोड़े गए।
अमित शाह भी थे आरोपी
- सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस को 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और सोहराबुद्दीन शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया।
- पहले इस केस की सुनवाई जज जेटी उत्पत कर रहे थे, लेकिन 2014 में अचानक उनका तबादला कर दिया गया था। फिर केस की सुनवाई जज बीएच लोया ने की।
- सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के बिजनेसमैन विमल पाटनी, गुजरात पुलिस के पूर्व चीफ पीसी पांडे, एडीजीपी गीता जौहरी, गुजरात पुलिस के ऑफिसर अभय चुडासम्मा और एनके अमीन को बरी किया जा चुका है। पुलिस अफसरों समेत कुल 23 आरोपियों के खिलाफ अभी भी जांच चल रही है।
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