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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो रहे जस्टिस जे चेलमेश्वर ने सीनियर वकीलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 1 करोड़ रुपए दिन की फीस लेने वाले वकील किसी मुद्दे पर मुंह नहीं खोलते हैं और अपना स्टैंड कभी जाहिर नहीं करते। जस्टिस चेलमेश्वर ने वकीलों के एनजीओ लायर कलेक्टिव कार्यक्रम में चार जजों के साथ अपनी कॉन्फ्रेंस को लेकर कहा कि वह कुछ मुद्दों और सिद्धांतों के लिए खड़े हुए। वह किसी के खिलाफ नहीं थे। इसमें कोई स्वार्थ नहीं था। बता दें कि जस्टिस चेलमेश्वर उन चार जजों में शामिल थे, जिन्होंने कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के काम काज पर सवाल खड़े किए थे।
युवा पीढ़ी का साथ मिला
- 12 जनवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा- युवा पीढ़ी के वकीलों ने न्यायपालिका के लोकतंत्रीकरण के लिए उनका समर्थन किया, तो पुराने वकीलों और सेवानिवृत्त जजों ने हमले किए। जब हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उन्होंने सवाल उठा दिए- क्या जज को प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए?
- जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, मैंने अपने किसी भी फैसले के बचाव के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। पता था कि सार्वजनिक रूप से जब मुंह खोलूंगा तो ये सब बातें कही जाएंगी।'
सिद्धांतों के लिए खड़ा होना चाहिए
- जस्टिस चेलमेश्वर ने शनिवार को उनके आवास पर आए वकीलों के एक समूह से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, "मैं मुद्दों और मूल्यों पर खड़ा रहा। जब मुझे लगा कि चीजें गलत दिशा में जा रही हैं, तब मैंने सवाल खड़े किए। मेरा मानना है कि अगर अच्छा हो रहा है तो उसे मंजूर करना चाहिए।"
- उन्होंने कहा, "अगर कोई बात संदिग्ध है या संदेह है, तो उसकी पड़ताल करना चाहिए। गड़बड़ी मिले तो उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए। अगर कुछ गलत है, तो उसे खत्म करना चाहिए। मैं इसी सिद्धांत को मानता हूं। इसमें निजी हित या किसी की मुखालफत जैसा कुछ नहीं है। यह व्यवस्था से जुड़ा मामला है।"
विदाई समारोह में शामिल न होना निजी मामला
- जस्टिस चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के विदाई समारोह में शामिल होने से मना करने पर कहा कि रिटायरमेंट उनका निजी मामला है, इसको सार्वजनिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। बता दें कि 18 मई को विदाई समारोह होना था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से मिले न्योता को ठुकरा दिया था।
कोर्ट के अंदरूनी मामलों में जजों द्वारा बाहरी मदद की तलाश करना गलत : जस्टिस ठाकुर
- सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पूर्व सीजेआई नाखुश पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों द्वारा 12 जनवरी को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को गलत बताया। उन्होंने एनजीओ ‘ग्लोबल ज्यूरिस्ट’ के कार्यक्रम में ‘इंडीपेंडेंस आॅफ ज्यूडिशियरी’ में कहा- ‘संस्थागत समस्याओं को सुलझाने के लिए बाहरी मदद की तलाश नहीं करनी चाहिए।’
- जस्टिस ठाकुर ने जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘परेशान करने वाला’ कार्यक्रम बताया और कहा कि इसम जिन मुद्दों को सार्वजनिक किया गया, उससे मीडिया और राजनीतिज्ञों को उन मामलों पर चर्चा करने का एक मौका मिला, जिन्हें ‘सुप्रीम कोर्ट के भीतर सुलझाया जाना चाहिए था।’
जनवरी में चेलमेश्वर समेत 4 जजों ने चीफ जस्टिस पर उठाए थे सवाल
- इस साल 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें जस्टिस जे चेलमेश्वर के अलावा जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ भी शामिल थे।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, “लोकतंत्र दांव पर है। ठीक नहीं किया तो सब खत्म हो जाएगा।”
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