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शिवराज को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने केके मिश्रा खिलाफ मानहानि प्रकरण को खारिज किया, सजा भी खत्म की

3 वर्ष पहले
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भोपाल. मानहानि मामले में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता केके मिश्रा के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा केके मिश्रा के खिलाफ मानहानि केस में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ट्रायल सही तरीके से नहीं चला। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मामले को रद किया। इसके साथ ही शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा और जुर्माने को भी खत्म कर दिया है। 

-बता दें केके मिश्रा ने 21 जून 2014 को पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री पर व्यापमं मामले को लेकर आरोप लगाया था, जिसमें कहा गया था कि उनकी ससुराल गोंदिया के 19 परिवहन निरीक्षक भर्ती हुए।

- साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री निवास से किसी प्रभावशाली महिला द्वारा व्यापमं के आरोपी नितिन महिन्द्रा आदि को 129 फोन कॉल किए गए. मिश्रा ने फूलसिंह चौहान, प्रेमसिंह चौहान, गणेश किरार और संजय सिंह चौहान पर भी आरोप लगाए थे। इस मामले में 24 नवंबर 14 को सरकार की अनुमति से लोक अभियोजक ने मुख्यमंत्री की मानहानि का मुकदमा दायर किया था. कोर्ट ने केके मिश्रा को 50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया था। 

जिला कोर्ट के फैसले को बताया था गलत

-केके मिश्रा ने जिला न्यायालय के फैसले को गलत बताया था और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। ये भी कहा था कि वह अपने आरोपों पर कायम हैं और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी।  

शिवराज को देनी पड़ी थी सफाई 
-केके मिश्रा ने परिवहन आरक्षक भर्ती में शिवराज सिंह और उनकी पत्नी साधना सिंह पर आरोप लगाए थे। इसके बाद शिवराज सिंह को सफाई देनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था कि गोंदिया (महाराष्ट्र) में उनकी पत्नी के किसी रिश्तेदार को परिवहन आरक्षक पद पर चयनित नहीं किया गया है। उन्होंने ये भी कहा था कि पूरे महाराष्ट्र में कोई व्यक्ति इस पद पर चयनित नहीं हुआ है।

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