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शादी के खर्च का ब्योरा मैरिज अफसर रखे; खर्च में कमी कर एक हिस्सा वधू को देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

दहेज मामलों और शादी पर होने वाले अनाप-शनाप खर्चों के कम करने की कोशिश।

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2018, 08:40 AM IST
supreme court said to center for keeping marriage expence record

नई दिल्ली. आपके घर में होने वाली शादियों के खर्चे पर भी सरकार की नजर रहने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो ऐसी व्यवस्था तैयार करे, जिससे ये पता चल सके कि कोई व्यक्ति शादी में कितना खर्च कर रहा है। इसका मकसद है- दहेज लेन-देन को रोकना और साथ ही दहेज कानून के तहत दर्ज होने वाले झूठी शिकायतों पर भी नजर रखना।

शादी के खर्च की जानकारी देना होगी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र से कहा कि- शादी में हुए खर्चों का हिसाब-किताब बताना अनिवार्य करने पर विचार करिए। वर-वधू दोनों पक्षों को शादी पर हुए खर्चों की जानकारी मैरिज ऑफिसर को बताना अनिवार्य होना चाहिए। केंद्र सरकार इस बारे में जल्द नियम बनाए। एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि- अगर शादी में दोनों पक्षों की ओर से हुए खर्च का ब्योरा मौजूद रहता है तो दहेज प्रताड़ना के तहत दायर किए गए मुकदमों में पैसे से जुड़े विवाद हल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा शादी में होने वाले बेवजह के खर्च में कटौती करके उसका एक हिस्सा वधू के बैंक खाते में भी जमा किया जा सकता है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर वो इसका इस्तेमाल कर सकती है।

अदालत ने सरकार से मांगी राय

इस पूरी प्रक्रिया को अमल में कैसे लाया जाए, इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से राय मांगी है। कोर्ट ने कहा कि सरकार अपने लॉ ऑफिसर के जरिए इस मामले पर अपने विचार अदालत के सामने रखे। अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिंहा से भी कहा है कि वो कोर्ट को इस मामले में मदद करें।

कोर्ट ने सरकार से नया नियम बनाने की बात कही

दरअसल सुप्रीम कोर्ट एक पारिवारिक विवाद पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें महिला ने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दायर कराया है। ससुराल वाले महिला के आरोपों को नकार रहे हैं। इसी मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये नया नियम बनाने की बात सरकार से कही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के मामले में बड़ी तादाद में की जाने वाली गिरफ्तारियों पर भी चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामले में गिरफ्तारी के वक्त पुलिस के लिए निजी आजादी और सामाजिक व्यवस्था के बीच बैलेंस रखना जरूरी है। कोर्ट ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना से जुड़ा मामला गैर-जमानती है इसलिए कई लोग इसे हथियार भी बना लेते हैं। दरअसल दहेज प्रताड़ना के ज्यादातर मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं और सजा दर सिर्फ 15% है।

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