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बीसीसीआई के संविधान के मसौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य क्रिकेट इकाइयों से सुझाव मांगे, 11 मई आखिरी तारीख

सुप्रीम कोर्ट में पेश संविधान के मसौदे में 'एक राज्य एक वोट', 'एक सदस्य एक पद' वाली लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें शामिल हैं।

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 05:30 PM IST
लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआई को फटकार लगा चुका है। - फाइल लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआई को फटकार लगा चुका है। - फाइल

  • सुप्रीम कोर्ट ने बिहार को रणजी ट्रॉफी समेत राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने की मंजूरी देने का बीसीसीआई को आदेश दिया था।
  • शीर्ष न्यायालय ने कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (सीओए) को बीसीसीआई का नया संविधान बनाकर पेश करने का आदेश दिया था।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों की क्रिकेट एसोसिएशंस और बीसीसीआई के पदाधिकारियों को क्रिकेट की शीर्ष संस्था के संविधान के मसौदे पर उनके सुझाव मांगे हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) की ओर से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के खिलाफ दायर की गई एक अवमानना याचिका का भी निपटारा किया। बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं।

मसौदे पर सुप्रीम कोर्ट लगाएगा मुहर, बीसीसीआई को मानना होगा

- बेंच ने कहा कि बीसीसीआई के संविधान के मसौदे को वह मंजूरी देगी। जिसे मानने के लिए बीसीसीआई बाध्य होगा। हालांकि उसने स्पष्ट किया कि 2016 के फैसले को वापस लेने की मांग वाली याचिकाओं पर उसका फैसला संविधान के मसौदे की प्रमाणिकता पर निर्भर होगा।

- सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य क्रिकेट संघों और बीसीसीआई के पदाधिकारियों को 11 मई तक अपने सुझाव अमीकस क्यूरी को देने को कहा है। इसी दिन मामले में आगे की सुनवाई होगी।

- कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (सीओए) ने पिछले साल अक्टूबर में बीसीसीआई के संविधान का मसौदा सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था। इसमें बीसीसीआई में संगठनात्मक सुधारों पर जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को भी शामिल किया गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ही सीओए का गठन किया था।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान के मसौदे में लोढ़ा कमेटी की सभी सिफारिशों को शामिल करना चाहिए, ताकि अंतिम फैसले के लिए उसके समक्ष एक समग्र दस्तावेज रखा जा सके।

सीएबी ने 20 अप्रैल को दायर की थी याचिका
- सीएबी ने इस साल 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

- उसने आरोप लगाया था कि बीसीसीआई ने बिहार की किसी भी क्रिकेट एसोसिएशन को ना तो इस साल फरवरी में हुई विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने के लिए बुलाया और ना ही रणजी ट्रॉफी या अन्य नेशनल चैम्पियनशिप्स में भाग लेने की मंजूरी दी।

- सीएबी के अनुसार, बीसीसीआई के पदाधिकारी शीर्ष कोर्ट के पूर्व में दिए गए फैसले का पालन नहीं कर रहे हैं।

सितंबर से राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भाग ले सकेगी बिहार की टीम

- सीएबी की टीम इस साल सितंबर से राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट टूर्नामेंट में भाग ले सकेगी। दरअसल, उसकी याचिका पर बेंच ने बीसीसीआई और सीओए से सवाल किया कि अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

- सीओए और बीसीसीआई की ओर से पेश एडवोकेट क्रमशः पराग त्रिपाठी और सीयू सिंह ने बेंच को बताया कि इस साल सितंबर से शुरू होने वाले क्रिकेट सीजन में बिहार की टीम राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भाग ले सकेगी।

- पराग और सीयू सिंह के प्रस्ताव पर सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम ने भी सहमति जताई। सुब्रमण्यम को सुप्रीम कोर्ट ने अमीकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। इस पर बेंच ने बीसीसीआई और सीओए के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

एमसीए के चुनाव पर लगाई रोक

- इसके अलावा बेंच ने महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को अगली सुनवाई तक चुनाव टालने के निर्देश दिए। एमसीए के चुनाव कल यानी 2 मई को होने थे।

Supreme Court says to State cricket bodies, Give suggestions on BCCI draft constitution
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लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआई को फटकार लगा चुका है। - फाइललोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआई को फटकार लगा चुका है। - फाइल
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