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एसीबी ने निर्मला से गबन की राशि के बारे में पूछा तो बोलीं- सिर चकरा रहा है

3 वर्ष पहले
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जोधपुर. आठ करोड़ रुपए का गेहूं घोटाले की आरोपी निलंबित आईएएस निर्मला मीणा ने शुक्रवार को भी जांच में सहयोग नहीं किया। घोटाले के बारे में जब एसीबी ने उनसे महज पांच सवाल किए तो आठ घंटे में बार-बार उनका सिर चकरा जाता। पूछताछ के दौरान डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गहलोत ने घोटाले के बारे महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की है। इस आधार पर शनिवार को एसीबी फिर से मीणा व गहलोत को आमने सामने पूछताछ करेगी। गहलोत ने अपनी दुकानों का रिकार्ड एसीबी को सौंप दिया।

 

 यह है मामला

- तत्कालीन डीएसओ निर्मला मीणा पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में लगभग 35 हजार क्विंटल गेहूं गलत तरीके से वितरित किया गया था। एसीबी ने अपनी जांच में पाया था कि तत्कालीन डीएसओ मीणा ने सिर्फ मार्च 2016 में 33 हजार परिवार नये जोड़े और उच्चाधिकारियों को स्वयं की ओर से प्रेषित रिपोर्ट में अंकित कर 35 हजार 20 क्विंटल गेहूं अतिरिक्त मंगवा लिया था। नये परिवारों को ऑनलाइन नहीं किया गया। फिर मीणा ने 8 करोड़ रुपए का अतिरिक्त गेहूं का आवंटन करवा लिया। ठेकेदार सुरेश उपाध्याय व स्वरूपसिंह राजपुरोहित की आटा मिल भिजवा दिया था। करोड़ों रुपए का गबन की जांच के बाद राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को निलम्बित कर दिया था। बाद में आटा मील मालिक स्वरूपसिंह राजपुरोहित ने भी पूछताछ में कबूल किया था कि उसने 105 ट्रक में 10 हजार  500 क्विंटल गेहूं काला बाजार में बेचा है।

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