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डाउनलोड करेंअंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की एक नई रिपोर्ट के अनुसार सीरिया सरकार \'जानबूझ कर और ग़ैरक़ानूनी\' तरीके से हजारों घरों को गिरा रही है.
ह्यूमन राइट्स वॉच के सीरिया सरकार पर लगाए गए इस आरोप का आधार कुछ सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें हैं.
इन तस्वीरों में साल 2012 और 2013 में सीरिया की राजधानी दमिश्क और हमा में मौजूद विपक्षी ठिकानों में विस्फोटक और बुलडोजर से बड़े पैमाने पर ध्वस्त हुए घरों के मलबे दिख रहे हैं.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जनता की संपत्ति को नष्ट करना और सामूहिक सजा देना एक युद्ध अपराध है.
यह जानकारी तब सामने आई है जब जिनेवा में सीरियाई सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता चली रही है.
जिनेवा शांति वार्ता की मध्यस्थता कर रहे संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लखदर ब्राहिमी ने आशंका जताई है कि वार्ता का मौजूदा सत्र बिना किसी संतोषजनक परिणाम के ख़त्म हो जाएगा. यह वार्ता शुक्रवार को समाप्त होने वाली है.
\'नक्शे से मिट गए\'ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट \'रेज़्ड टू द ग्राउंड\' में इससे जुड़े सात प्रमाण दर्ज हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि ये प्रमाण जुलाई 2012 और जुलाई 2013 के बीच जुटाए गए हैं.
रिपोर्ट में सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों, ऑनलाइन वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों की मदद से इस बात के संकेत दिए गए हैं कि इन इमारतों और घरों को गिराने का करने का काम सरकारी फौज की ओर से किया गया है.
उपग्रह से जुटाई गई दमिश्क और हमा के सात जिलों की ये तस्वीरें तोड़-फोड़ के पहले और बाद की हैं. कई तस्वीरों में बहुमंजिला इमारतें मलबे में तब्दील होती दिखाई दे रही हैं.
ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि इसने कम से कम 145 हेक्टेयर जमीन पर हुई तोड़-फोड़ को दर्ज किया है.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने आरोप लगाए हैं कि इस विध्वंस के कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं.
संस्था के आपात अनुसंधानकर्ता ओली सोलवांग ने कहा, \"पड़ोसी को नक्शे से मिटा देना युद्ध का जायज तरीका नहीं है.\" उन्होंने आगे कहा, \"ये तोड़फोड़ अवैध है. सीरियाई सरकार के अपराधों की लंबी फेहरिस्त में अब एक और नया अपराध जुड़ गया है.\"
वे कहते हैं, \"यह तो विद्रोह का समर्थन करने के संदेह में किसी समुदाय को दी गई सामूहिक सजा है.\"
ह्यूमन राइट्स वॉच ने सीरियाई सरकार से मांग की है कि वह फौरन इन विध्वंसों को रोके. संस्था ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है और सरकार पीड़ितों को मुआवजा और वैकल्पिक आवास मुहैया करवाए.
संस्था ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् से आग्रह किया है कि वह सीरिया का यह मामला अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में भेजे.
\'अवैध निर्माण\'सीरिया के सरकारी अधिकारियों ने ह्यूमन राइट्स वॉच को स्पष्टीकरण दिया है कि इन इमारतों को इसलिए ढहा दिया गया क्योंकि ये गैरक़ानूनी ढंग से बनाई गई थीं.
हालांकि न्यूयार्क मूल की इस संस्था को जानकारी मिली है कि सरकार समर्थित इलाकों में इस तरह की तोड़फोड़ का कोई मामला सामने नहीं आया है.
बल्कि संस्था ने यह भी पाया कि यह तोड़फोड़ सैनिक अधिकारियों की देख-रेख में किया गया और कई जगह तो ऐसा करते समय सरकारी और विरोधी बलों के बीच संघर्ष भी हुए.
प्रभावित इलाकों के कई बाशिंदों ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया कि उनके घर अवैध नहीं थे और ये कि उनके पास अपने घर के जरूरी क़ानूनी दस्तावेज भी हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी बलों ने उन्हें पहले से कोई सूचना या चेतावनी नहीं दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपना सामान भी हटाने नहीं दिया गया.
स्लोवांग कहते हैं, \"लोगों को अपनी आंखें खोलनी चाहिए कि यह सब सरकार की ओर से की गई कोई शहरीकरण की कार्रवाई नहीं बल्कि खूनी लड़ाई है.\"
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