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डाउनलोड करेंसीरिया मामले में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लख़दर ब्राहिमी ने कहा है कि होम्स शहर में फंसे महिलाओं और बच्चों को वहां से सुरक्षित निकलने की इजाज़त देने के लिए सीरियाई सरकार सहमत हो गई है.
जिनेवा में चल रही शांति वार्ता के दूसरे दिन इस पर फ़ैसला हुआ. सीरिया के उपविदेश मंत्री फ़ैसल मेकदाद ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि हथियारबंद लोग महिलाओं और बच्चों को होम्स शहर छोड़कर जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं लेकिन सरकार की तरफ़ से वे लोग जाने के लिए आज़ाद हैं.
लख़दर ब्राहिमी ने कहा कि विपक्षी गुट सरकार को इस बात की सूची देंगे कि कितने लोग होम्स में बंदूक़धारियों के क़ब्ज़े में हैं.
शंकाए बरकरार
उन्होंने कहा कि पूरी बातचीत के बाद किसी समग्र समझौते की संभावना कितनी है, अभी इस बात का आकलन करना जल्दबाज़ी होगी.
उन्होंने स्वीकार किया कि बातचीत की रफ़्तार धीमी है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सोमवार को दोनों पार्टियां आगे के रास्ते के बारे में कोई बयान जारी करेंगी.
साथ ही उन्होंने ये भी उम्मीद जताई कि सोमवार को संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस का एक मानवीय प्रतिनिधिमंडल होम्स जा सकेगा.
ख़बरों के मुताबिक़ सैकड़ों लोग होम्स शहर में फंसे हुए हैं जिनमें कई तो गंभीर रूप से ज़ख़्मी और घायल हैं. जिनेवा स्थित बीबीसी संवाददाता ब्रिजेट केंडल ने कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो होम्स पर समझौता इस शांति वार्ता का पहला ठोस नतीजा होगा.
उपविदेश मंत्री मेकदाद ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि स्थानीय अधिकारियों की मदद से होम्स शहर तक पहुंचा जा सकता है लेकिन इस बात का भी ख़्याल रखा जाना चाहिए कि मदद का सामान चरमपंथियों के हाथों में न पड़ जाए.
सीरियाई सरकार हर हथियारबंद विरोधी को चरमपंथी क़रार देती है. लख़दर ब्राहिमी ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को तो सरकार तुरंत शहर छोड़ने की अनुमति दे देगी लेकिन सरकार ने व्यस्क पुरूषों की लिस्ट मांगी है जो होम्स शहर छोड़ना चाहते हैं ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि वे सरकार विरोधी लड़ाके नहीं हैं.
ब्राहिमी का कहना था, आप जानते हैं कि होम्स शहर के बीचोबीच का हिस्सा एक लंबे समय से घिरा हुआ है. अब मुझे आशा है कि हमलोग कम से कम आम नागरिकों के लिए कोई समाधान ढूंढने की तरफ़ बढ़ रहे हैं.
क़ैदियों की रिहाई?
विद्रोही सरकारी जेलों में बंद हज़ारों क़ैदियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं. ब्राहिमी ने कहा कि रविवार को बातचीत के समय पैदा हुए माहौल से उन्हें काफ़ी हिम्मत मिली है क्योंकि उस दौरान दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के लिए सम्मान दिखाया और एक दूसरे की बात सुनी.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि दोनों पक्ष अभी भी एक दूसरे से सीधे बात नहीं कर रहें हैं, बल्कि उनके ज़रिए हो दोनों गुट आपस में बात करते हैं.
साल 2011 में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन में अब तक एक लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. इसके अलावा लगभग एक करोड़ लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा जिसके कारण सीरिया के भीतर और उसके पड़ोसी देशों के लिए एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है.
लेकिन जिनेवा शांतिवार्ता के उद्देश्यों को लेकर भी दोनों गुटों में मतभेद बने हुए हैं. सीरियाई सरकार का कहना है कि बातचीत का मुख्य मक़सद विदेशों से समर्थित 'आतंकवाद' का हल ढूंढना है, जबकि सरकार विरोधियों का कहना है कि शांतिवार्ता के दौरान सरकार इस बात को लिख कर दे कि वो जिनेवे-1 कम्यूनिक को पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है.
जिनेवा-1 कम्यूनिक में सीरिया से कहा गया है कि वो एक अंतरिम सरकार का गठन करे जिसमें मौजूदा सरकार, विद्रोही गुट और दूसरे संगठनों के लोग शामिल हों.
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