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देश के चार शहरों में ट्रैफिक जाम से सालाना 1.43 लाख करोड़ रुपए का नुकसान- रिपोर्ट

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और कैब संचालक कंपनी उबर की एक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के चार प्रमुख शहर पूरे एशिया के शहरों से 149 फीसदी ज्यादा भीड़भाड़ वाले हैं। पीक ट्रैफिक आवर्स के दौरान इन चार शहरों में सालाना 1.43 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

 

सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले शहर
- यह रिपोर्ट दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरू और कोलकाता में किए गए सर्वे पर आधारित है। उबर के ग्लोबल सीओओ बर्ने हार्फोर्ड, बीसीजी के ग्लोबल सेक्टर हेड (इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ट्रांसपोर्ट), सुरेश सुबुधि और उबर के सीनियर डायरेक्टर (पब्लिक पॉलिसी एंड गर्वनमेंट रिलेशन) की मौजूदगी में ये रिपोर्ट जारी की गई। 

 
राइडशेयरिंग से हो सकता है समाधान 

- रोजाना के सफर में दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरू और कोलकाता में सामान्य से डेढ़ गुना ज्यादा वक्त लग रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रैफिक संकट से निपटने का राइड शेयरिंग ही एकमात्र तरीका है। बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की 'अनलॉकिंग सिटीज: द इम्पैक्ट ऑफ राइडशेयरिंग एक्रॉस इंडिया' नाम से यह रिपोर्ट सामने आई है।

- इस बारे में कैब ऑपरेटर कंपनी उबर के भारत और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट अमित जैन का कहना है कि इस रिपोर्ट के जरिए हम स्थानीय प्रशासन और योजना बनाने वाली अथॉरिटी का ध्यान इस ओर खींचना चाहते हैं। हम यह बताना चाहते हैं कि कार शेयरिंग से किस तरह इस समस्या का समाधान हो सकता है।    

 

89% लोगों का कार खरीदने का प्लान  

- इस सर्वे के मुताबिक, अगले पांच साल में 89% लोगों का कार खरीदने का प्लान है। इनमें से 79 फीसदी लोग अपना प्लान बदल सकते हैं अगर राइडशेयरिंग के जरिए सस्ते और सुविधाजनक सफर का ऑप्शन मिल जाए।   

- उबर के ग्लोबल सीओओ बर्ने हार्फोर्ड के मुताबिक, "अगर कार खरीदने का ट्रेंड जारी रहता है तो कुछ ही सालों में भारतीय शहरों में ट्रैफिक पूरी तरह थम सकता है। राइडशेयरिंग ट्रैफिक समस्या का समाधान हो सकता है, क्योंकि इसके जरिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से कम कारों में ज्यादा लोगों को राइड मिल सकती है। हम इन शहरों को ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलवा सकते हैं, लेकिन इसके लिए मिलकर काम करना होगा।" 

 

राइडशेयरिंग से 31% तक घट सकता है ट्रैफिक 

- रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात में राइडशेयरिंग के जरिए निजी कारों की संख्या में 33-68% कमी आ सकती है और ट्रैफिक लोड 17-31% तक कम हो सकता है। 

- उबर के भारत और साउथ एशिया प्रेसिडेंट अमित जैन जैन का कहना है, "आने वाले समय में हम कई ऐसे प्रयोग करेंगे, जिससे लोग राइडशेयरिंग के फायदे समझ सकेंगे। इस तरह हमें सरकार के साथ मिलकर काम करने में मदद मिलेगी।"   

 

राइडशेयरिंग के लिए लोगों में गहरी रुचि

- दिल्ली और मुंबई में जिन कार मालिकों को लेकर ये सर्वे किया गया, उनमें से औसतन 25% ने राइडशेयरिंग में गहरी दिलचस्पी दिखाई। 

- बीसीजी के ग्लोबल सेक्टर हेड (इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ट्रांसपोर्ट), सुरेश सुबुधि के मुताबिक, "सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या और ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए राइडशेयरिंग एक व्यावहारिक तरीका है।"

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