पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंइंटरनेशनल डेस्क. ताजमहल दुनिया के अजूबों में शुमार है। इसे देखने के लिए देश ही नहीं दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं। पर जिस आगरा में ये धरोहर मौजूद है, वहां पहुंचने के लिए शहर के भयानक जाम से गुजरना पड़ता है। तो क्या ये संभव है कि ताजमहल को आगरा में ही कहीं ऐसी जगह शिफ्ट कर दिया जाए जहां पहुंचने के लिए ट्रैफिक जाम से न जूझना पड़े? बीबीसी ने ताजमहल को शिफ्ट करने की धारणा पर एक आर्टिकल पब्लिश किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ताजमहल को शिफ्ट किया जा सकता है क्योंकि ऐसा कोई पहली बार नहीं होगा। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र में ऐसा प्रयोग करीब आधी सदी पहले किया जा चुका है। वो भी मशीनों से नहीं बल्कि इंसानों के जरिए, और वो प्रयोग सफल भी रहा था।
- यहां तीन हजार साल पुराने ऐतिहासिक मंदिर को उठाकर दूसरी जगह ले जाकर उसी रूप में फिर से स्थापित कर दिया गया था।
- मिस्र के इस मंदिर का नाम अबु सिम्बल है, जिसे प्राचीन घाटी नुबियन में पहाड़ काटकर बनाया गया था। इसे यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल कर रखा है।
- इस मंदिर का निर्माण फराओ (राजा) रैमसेस ने करवाया था। मंदिर की छत से लेकर फर्श तक... फराओ को मिली कामयाबी के किस्से उकेरे गए हैं।
- ब्रिटिश जियोग्राफिक एक्स्पेडिशन कंपनी की डायरेक्टर किम कीटिंग के मुताबिक, मिस्र ने अपनी धरोहरों को बचाने के लिए काफी काम किया है। ये मंदिर उसी की एक मिसाल है।
- इस मंदिर को अगर दूसरी जगह पर शिफ्ट नहीं किया गया होता तो पास से ही गुजरने वाली नील नदी से जुड़ी झील में डूबकर तबाह हो चुका होता।
ऐसे दिया इस प्रोजेक्ट को अंजाम
- यूएन की संस्था यूनेस्को ने इसे इंसानियत के लिए जरूरी मानते हुए बचाने का फैसला किया था। उसने मिस्र में तमाम देशों से जानकार बुलाए थे, ताकि मंदिर की शिफ्टिंग का काम किया जा सके।
- इन लोगों के बीच तय हुआ कि मंदिर को टुकड़ों में काटकर दूसरी जगहों पर ले जाया जाएगा। फिर उसे दूसरी जगह पर एक साथ जमाया जाएगा।
- इस टीम ने करीब 5 साल तक काफी मशक्कत से मंदिर के टुकड़े-टुकड़े किए। फिर टीम ने इन्हें उठाया और उसी पहाड़ी पर करीब 60 मीटर ऊंचाई पर लाकर जोड़ दिया।
- मुख्य मंदिर रैमसेस को 860 टुकड़ों में काटा गया था। वहीं उनकी रानी के नाम बने मंदिर के दो सौ से ज्यादा टुकड़े कर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था।
मंदिर की खासियत रही बरकरार
- इसमें सबसे बड़ी खासियत ये थी कि दूसरी जगह ले जाने के बाद भी उसमें पुराने मंदिर के बराबर ही रोशनी आती थी।
- साल में दो बार तय तारीख को सूरज की किरणें मंदिर के अंदर तक पहुंचती थीं और अंदर लगे रैमसेस के स्टैचू को रोशन करती थीं।
- ये दो दिन भी खास थे। एक 22 फरवरी की तारीख थी, जिस दिन राजा ने गद्दी संभाली थी। वहीं दूसरी तारीख 22 अक्टूबर थी, जब रैमसेस सेकंड का जन्म हुआ था।
- अबु सिम्बर मंदिर 1968 में नई जगह पर फिर से तैयार हो गया था। इस कारनामे को अंजाम दिए आधी सदी से ज्यादा का वक्त बीत चुका है।
ताजमहल को कहां किया जा सकता है शिफ्ट
दिल्ली से जब आगरा की ओर जाते हैं तो ताजमहल यमुना नदी के दाईं तरफ पड़ता है। ये शहर के बीचोंबीच का हिस्सा है, जहां जाम की भयानक समस्या है।
- इसी ताजमहल को अगर यमुना के उस पार यानी बाईं तरफ शिफ्ट कर दिया जाए तो जाम की समस्या कम हो जाएगी।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.